आज के दौर में कई कंपनियों में ज्यादा देर तक काम करना सफलता से जोड़कर देखा जाता है. टेक इंडस्ट्री में तो 6 दिन ऑफिस जाना और 12 घंटे तक काम करना भी आम हो गया है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा होती है. लेकिन भारतीय मूल के उद्यमी हार्दिक जगदा का मानना है कि काम की गुणवत्ता ज्यादा मायने रखती है, न कि कर्मचारी कितने घंटे काम करता है. वह खुद सुबह 3 से 5 बजे के बीच उठते हैं और हफ्ते में छह दिन काम करते हैं, लेकिन अपनी कंपनी में कर्मचारियों के लिए लंबे कामकाजी घंटों को जरूरी नहीं मानते.
कौन हैं हार्दिक जगदा?
बता दें कि हार्दिक जगदा अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में रहते हैं. वह Proximity Works के संस्थापक और CEO हैं. 35 साल के हार्दिक ने साल 2017 में अपनी कंपनी को शुरू करने के बारे में सोचना शुरू किया था. हालांकि, घर की आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण वह तुरंत अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार में पूरी तरह नहीं जुट सके.
उन्होंने नौकरी के साथ सुबह और शाम अपने प्रोजेक्ट्स पर काम करना जारी रखा. इसके बाद 2019 में उन्होंने Proximity Works की शुरुआत की. पहले तो कंपनी ने पहले लाइव स्पोर्ट्स स्ट्रीमिंग से जुड़ी तकनीक पर काम किया और 2020 में इस क्षेत्र के लिए AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की डायरेक्शन में आगे बढ़ें. आज उनकी कंपनी में दुनियाभर में करीब 45 लोग काम करते हैं. इनमें से पांच कर्मचारी अमेरिका में हैं, जबकि बाकी अलग-अलग जगहों पर काम करते हैं. उनके सह-संस्थापक भारत में रहते हैं.
सुबह 3 बजे से शुरू हो जाता है काम
हार्दिक आमतौर पर सुबह 3 से 5 बजे के बीच उठ जाते हैं. वह सुबह 6 बजे तक ईमेल और मैसेज देखने से बचते हैं, ताकि इस समय का इस्तेमाल जरूरी फैसलों और कंपनी के काम से जुड़े प्लानिंग में की जा सकें. वह सुबह एक्सरसाइज करते हैं और अपने निजी और प्रोफेशनल गोल को लिखते हैं. उनके मुताबिक, दिन के शुरुआती घंटे उन्हें बिना किसी रुकावट के सोचने और जरूरी काम करने का मौका देते हैं. हार्दिक ने बताया कि सुबह 7 बजे के बाद अलग-अलग टाइम जोन में काम करने वाले कर्मचारियों के मैसेज और काम से जुड़ी बातचीत शुरू हो जाती है. इसी वजह से वह दिन के शुरुआती घंटों को अपने लिए बचाकर रखना चाहते हैं.
दोपहर तक मीटिंग खत्म करने की कोशिश
हार्दिक ने बताया कि पहली मीटिंग आमतौर पर सुबह 7:30 से 8 बजे के बीच शुरू होती है. वह कोशिश करते हैं कि दोपहर 2:30 बजे तक मीटिंग खत्म हो जाए. इसके बाद वह दोबारा एक्सरसाइज करते हैं और काम से जुड़े कुछ अन्य कामों के लिए समय निकालते हैं. वह दिनभर लगातार काम करते रहने के बजाय बीच-बीच में छोटे ब्रेक भी लेते हैं.
अहम मीटिंग से पहले वह अपने कैलेंडर में 15 मिनट का समय रखते हैं, ताकि बातचीत के उद्देश्य पर ध्यान दे सकें. उनकी कोशिश यह भी रहती है कि शाम का समय परिवार और करीबी लोगों के साथ बिताया जाए. वह रात करीब 9 बजे सोने की योजना बनाते हैं, ताकि पर्याप्त नींद ले सकें.
क्या है 996 वर्क कल्चर?
टेक इंडस्ट्री में 996 वर्क कल्चर का मतलब है सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक काम करना और ऐसा हफ्ते में छह दिन करना. इस तरह कुल 72 घंटे प्रति सप्ताह काम करना पड़ सकता है. कुछ कंपनियों में लंबे समय तक काम करने को सफलता और ज्यादा प्रोडक्टिविटी से जोड़कर देखती हैं. लेकिन हार्दिक का मानना है कि सिर्फ काम के घंटों की संख्या बढ़ाने से बेहतर नतीजे मिलने की गारंटी नहीं होती. उनके मुताबिक, काम का ऐसा ढांचा होना चाहिए, जिसमें कर्मचारी अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर प्रदर्शन कर सकें. उनका जोर काम की मात्रा के बजाय उसकी गुणवत्ता पर है.
खुद छह दिन काम करते हैं, लेकिन टीम पर नहीं डालते दबाव
हार्दिक आमतौर पर हफ्ते में छह दिन काम करते हैं. शनिवार को वह किसी ऐसे स्किल को बेहतर बनाने के लिए काम करते हैं, जिसे वह सीखना चाहते हैं. हालांकि, वह अपने कर्मचारियों से उसी दिनचर्या का पालन करने की उम्मीद नहीं करते.
उनकी कंपनी में लोग अपनी सुविधा और सबसे बेहतर काम करने के समय के अनुसार काम कर सकते हैं. टीम के इंजीनियरों के लिए जरूरी है कि वे अपने सहकर्मियों के साथ रोजाना करीब पांच से छह घंटे का साझा कामकाजी समय रखें, ताकि आपस में बातचीत और जरूरी काम हो सकें.
हार्दिक का मानना है कि कर्मचारियों को काम की जिम्मेदारी समझनी चाहिए और नतीजे देने पर ध्यान देना चाहिए. केवल इस बात पर नजर रखना कि कोई कितने घंटे ऑनलाइन रहा, काम का सही पैमाना नहीं है. उनकी सोच है कि सही समय पर काम करना, सीखने का मौका मिलना और बीच-बीच में आराम करना भी अच्छे प्रदर्शन का हिस्सा है. उनके मुताबिक, बेहतर काम करने के लिए केवल लंबे घंटे नहीं, बल्कि सही दिनचर्या और काम करने का बेहतर तरीका जरूरी है.
आजतक एजुकेशन डेस्क