'फ्लायदुबई' के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार की आसमान में दिखाई गई अदम्य वीरता और सूझबूझ की गूंज अब देश के सर्वोच्च मंचों तक पहुंच गई है. नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की जमकर तारीफ की.
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संकट और बेहद मुश्किल वक्त में कैप्टन स्मित ने जो साहस और उपस्थिति दिखाई, उस पर आज पूरा भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया गर्व कर रही है. पीएम मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बहुत बड़ा हादसा टाल दिया और 9/11 जैसी खौफनाक साजिश को नाकाम कर दिया.
जानिए कैसे बने पायलट
कैप्टन स्मित मछार के लिए एविएशन (उड्डयन) कभी बचपन का सपना नहीं था. करीब 9,750 घंटों की उड़ानों का तजुर्बा रखने वाले और एक दशक से अधिक समय से व्यावसायिक विमान उड़ा रहे इस भारतीय पायलट ने कभी अपने पारिवारिक कपड़ा कारोबार को आगे बढ़ाने की योजना बनाई थी. लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि टेक्सटाइल इंजीनियरिंग से शुरू हुआ सफर मैनेजमेंट की पढ़ाई से होता हुआ सीधा कॉकपिट तक जा पहुंचा.
वही ट्रेनिंग और अनुभव 30 सितंबर 2026 को उस वक्त 174 जिंदगियों के लिए मसीहा बन गया, जब आसमान में 30 हजार फीट की ऊंचाई पर मौत मंडरा रही थी.
टेक्सटाइल इंजीनियरिंग से एविएशन का अनोखा मोड़
स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद स्मित मछार ने अपने पारिवारिक कपड़े के कारोबार को संभालने के इरादे से टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था. बाद में उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध 'वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट' से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की पढ़ाई की.
इसी दौरान, महज 19 साल की उम्र में वे एक एविएशन सेमिनार में शामिल हुए. उस एक सेमिनार ने उनकी जिंदगी का रुख बदल दिया. स्मित ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पायलट बनना उनका बचपन का सपना नहीं था, बल्कि मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान उन्हें फ्लाइंग का जुनून सवार हुआ. हालांकि, शुरुआत में उनकी मां इस नए करियर को लेकर काफी चिंतित थीं.
न्यूजीलैंड में ली फ्लाइंग ट्रेनिंग, स्पाइसजेट से 'फ्लायदुबई' तक
अपने फैसले पर अडिग रहते हुए स्मित पायलट की ट्रेनिंग के लिए न्यूजीलैंड चले गए. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने जून 2011 में स्पाइसजेट एयरलाइंस जॉइन की. करीब 11 साल से ज्यादा समय तक स्पाइसजेट में सेवाएं देते हुए वे सीनियर कमांडर और लाइन ट्रेनिंग कैप्टन के पद तक पहुंचे, जहाँ वे नए पायलटों को ट्रेनिंग देते थे.
जून 2022 में, बोइंग 737 उड़ानों में महारत हासिल करने के बाद, वे 'फ्लायदुबई' में डायरेक्ट-एंट्री कैप्टन के रूप में शामिल हो गए.
जब कॉकपिट में मिला धोखा: 174 यात्रियों की बची जान
30 सितंबर 2026 को कैप्टन स्मित की बरसों की मेहनत और सूझबूझ का सबसे कड़ा इम्तिहान था. वे 'फ्लायदुबई' की फ्लाइट FZ1073 (बोइंग 737 मैक्स 8) को दुबई से तेल अवीव ले जा रहे थे. विमान में 27 बच्चों समेत 174 यात्री सवार थे.
अचानक, ओमान मूल के सह-पायलट ने विमान को क्रैश करने की साजिश के तहत कैप्टन स्मित पर चाकू से हमला कर दिया. फ्लाइट डेटा के मुताबिक, महज 30 सेकंड के भीतर विमान करीब 14,000 फीट नीचे गिर गया और आपातकालीन कोड 7700 व 7500 एक्टिव हो गए.
गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने गजब का साहस दिखाया. उन्होंने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे बाहर मौजूद क्रू मेंबर्स और यात्रियों को अंदर आने का मौका मिल गया. यात्रियों और क्रू ने मिलकर सिरफिरे सह-पायलट को दबोच लिया. इसके बाद, विमान में यात्रा कर रहे 'फ्लायदुबई' के ही दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने कमान संभाली और प्लेन को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंड कराया.
मुंबई के रहने वाले कैप्टन स्मित मछारका अस्पताल में ऑपरेशन हुआ है और अब उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. एक साधारण बैकग्राउंड से आकर 174 जिंदगियों के रक्षक बने कैप्टन स्मित का यह अदम्य साहस आज पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन चुका है.
आजतक एजुकेशन डेस्क