क्या महिलाओं के लिए वाकई बेस्ट है बैंकिंग सेक्टर? जान‍िए इसके पीछे के तर्क

अक्सर जब भी नौकरी की बात होती है, तो महिलाओं के लिए बैंकिंग सेक्टर सबसे अच्छा माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक में महिलाओं को कई सुविधांए मिलती हैं. लेकिन क्या आपको इसके बारे में पता है? अगर नहीं, तो चलिए जानते हैं. 

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बैंकिंग सेक्टर में महिलाओं को मिलती है कई सुविधाएं. बैंकिंग सेक्टर में महिलाओं को मिलती है कई सुविधाएं.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

बैंक में नौकरी को लेकर युवाओं के बीच हमेशा से आकर्षण रहा है. अच्छी सैलरी और करियर ग्रोथ के साथ बैंक कर्मचारियों को कई तरह की सुविधाएं भी मिलती हैं. ये सुविधाएं केवल यहीं तक सीमित नहीं होती हैं. मैटरनिटी लीव, सैबेटिकल लीव, बच्चों की देखभाल से जुड़ी सुविधाएं और कार्यस्थल पर सुरक्षा जैसे प्रावधान महिलाओं के लिए अहम हो सकते हैं.

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खासकर शादी या परिवार की जिम्मेदारियों के बाद करियर जारी रखने की सोच रही महिलाओं के लिए ये सुविधाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं. हालांकि, हर बैंक में नियम और सुविधाएं एक जैसी नहीं होतीं. ऐसे में जानते हैं कि बैंक की नौकरी में महिलाओं को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं और इनका लाभ किन नियमों के तहत मिलता है. 

महिलाओं को मिलती है लंबी मैटरनिटी लीव

सरकारी क्षेत्र के बैंकों में महिला कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लीव का प्रावधान है. वित्त मंत्रालय के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारियों की छुट्टियों और दूसरी सुविधाएं इंडस्ट्री लेवल पर होने वाले बाइपार्टाइट सेटलमेंट और जॉइंट नोट के तहत तय होती हैं. मंत्रालय ने बताया है कि महिला कर्मचारियों को उनकी पूरी सेवा अवधि के दौरान कुल 12 महीने तक मैटरनिटी लीव का प्रावधान है. यानी बैंकिंग सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं को नौकरी के साथ मैटरनिटी लीव की सुविधा भी मिलती है. 

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बच्चे की देखभाल के लिए भी मिल सकती है छुट्टी

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. वह ये है कि सरकारी क्षेत्रों के बैंकों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों जैसी अलग चाइल्ड केयर लीव (CCL) की व्यवस्था नहीं है. वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया था कि PSB कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान नहीं है, लेकिन महिला कर्मचारियों के लिए सैबेटिकल लीव की सुविधा है, जिसका इस्तेमाल चाइल्ड केयर समेत अलग-अलग कारणों के लिए किया जा सकता है. इसके लिए बैंक दो साल की CCL को सभी महिला बैंक कर्मचारियों पर लागू नियम बताना सही नहीं होगा. 

गोद लिए बच्चे के लिए भी सुविधा

ये सुविधाएं केवल यहीं पर खत्म नहीं होती है. बैंकिंग क्षेत्र में मातृत्व से जुड़ी सुविधाओं में समय-समय पर बदलाव भी किए गए हैं. उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि SBI की 2024-25 की बाइपार्टाइट सेटलमेंट संबंधी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कानूनी रूप से एक साल से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला कर्मचारी को अधिकतम 9 महीने की मातृत्व छुट्टी दी जा सकती है. यह छुट्टी कुल 12 महीने की निर्धारित सीमा के भीतर होती है.  

IVF ट्रीटमेंट के लिए भी छुट्टी का प्रावधान

SBI की इसी आधिकारिक व्यवस्था में IVF उपचार के लिए भी मातृत्व अवकाश का प्रावधान किया गया है. मेडिकल सर्टिफिकेट देने पर यह छुट्टी कुल 12 महीने की निर्धारित सीमा के भीतर दी जा सकती है. ध्यान रहे कि यह जानकारी SBI की लागू सेवा व्यवस्था से जुड़ी है, इसलिए इसे हर बैंक पर इस तरह की सुविधा लागू नहीं होती है.

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काम के दौरान महिलाओं की सुरक्षा पर भी जोर

बैंकिंग सेक्टर में महिला कर्मचारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) से जुड़े नियम लागू हैं. उदाहरण के तौर पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी आधिकारिक करियर जानकारी में बताया है कि उसने प्रशासनिक कार्यालयों में Internal Complaint Committees गठित की हैं और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को प्रतिबंधित किया है. इसका मतलब है कि किसी महिला कर्मचारी को कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार या यौन उत्पीड़न की शिकायत होने पर तय शिकायत व्यवस्था का सहारा मिल सकता है. 

SBI में महिलाओं के लिए अलग वेलनेस स्पेस

वहीं, SBI ने महिला कर्मचारियों के लिए कई विशेष पहल भी शुरू की हैं. बैंक की FY 2024-25 Sustainability Report के मुताबिक, जिन कार्यालयों या शाखाओं में 50 से ज्यादा महिला कर्मचारी हैं, वहां महिलाओं के लिए निजी वेलनेस स्पेस उपलब्ध कराने की पहल की गई है. इनमें गर्भवती कर्मचारियों के लिए भी सुविधाएं और menstrual hygiene से जुड़े केयर बॉक्स शामिल हैं.

SBI ने महिलाओं को करियर में आगे बढ़ाने के लिए Return-to-Work Program भी शुरू किया है, जिसका उद्देश्य मातृत्व या करियर ब्रेक के बाद काम पर लौटने वाली महिलाओं को दोबारा काम के माहौल में सहज होने में मदद करना है. 

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बच्चों की देखभाल के लिए SBI में क्रेच अलाउंस

कई बार जब महिलाएं मां बनती हैं, तो वह बच्चे को घर पर छोड़कर नौकरी करने के लिए आती हैं. लेकिन SBI ने अपनी महिला कर्मचारियों के लिए क्रेच अलाउंस की सुविधा देता है. अपनी आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक कामकाजी माताओं को बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच अलाउंस की सुविधा भी देता है. इसका उद्देश्य महिला कर्मचारियों को सुरक्षित और भरोसेमंद childcare की व्यवस्था में आर्थिक मदद देना है. 

सैबेटिकल की सुविधा भी मिल सकती है

महिलाओं के लिए लंबे ब्रेक की जरूरत पड़ने पर सैबेटिकल एक महत्वपूर्ण सुविधा हो सकती है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सैबेटिकल का प्रावधान है और इसका इस्तेमाल चाइल्ड केयर जैसे कारणों के लिए किया जा सकता है. SBI की FY 2024-25 रिपोर्ट के मुताबिक, महिला कर्मचारियों और बच्चों या बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी वाले सिंगल पुरुष कर्मचारियों के लिए अधिकतम दो साल तक सैबेटिकल लीव का प्रावधान है. हालांकि, बैंक में मिलने वाली सुविधा के लिए कई शर्तें लागू होती है. ऐसे में पहले शर्तों को सही से पढ़ना जरूरी है. 

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