दुबई में सालाना 1 करोड़ रुपये से अधिक की नौकरी छोड़कर आरोही सूर्या ने भारत में अपना कारोबार शुरू करने का फैसला किया. उन्होंने अपने पति अनमोल गोयल के साथ 2022 में निजी बचत से 65 लाख रुपये लगाकर पौधों से बने दूध का ब्रांड डांसिंग काउ शुरू किया. स्टार्टअप पीडिया के मुताबिक, वित्त वर्ष 25 में कंपनी ने 2.2 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व दर्ज किया.
डांसिंग काउ का विचार भारत में डेयरी से मुक्त सही विकल्प तलाशने के दौरान आया. निजी जरूरत से शुरू हुई आरोही की यह तलाश जल्द ही कारोबार के मौके में बदल गई. उत्पाद तैयार करने में करीब 10 महीने लगे और मार्च 2023 में इसकी बिक्री शुरू हुई. इसके बाद कंपनी ने सीधे ग्राहकों के साथ कैफे और रेस्तरां तक पहुंच बनाई.
आरोही ने 2011 से 2015 के बीच एलएनएम इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से बीटेक किया. इसके बाद उन्होंने 2015 से 2017 तक आईएमटी दुबई से एमबीए की पढ़ाई की. एमबीए के दौरान उन्होंने फ्रांस के ईएससी रेनेस स्कूल ऑफ बिजनेस में इंटरनेशनल मार्केटिंग के सेमेस्टर एक्सचेंज कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया.
उन्होंने इमामी, लैंडमार्क ग्रुप और भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ समेत कई संस्थानों में इंटर्नशिप के जरिए बाजार शोध, बिक्री और आंकड़ों के विश्लेषण का शुरुआती अनुभव हासिल किया.
2017 में वह दुबई के प्रोफेशनल ट्रेडर्स क्लब डीएमसीसी में डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ के तौर पर शामिल हुईं. वहां उन्होंने डिजिटल अभियान, दर्शकों के विश्लेषण और संभावित ग्राहकों से संपर्क बनाने पर काम किया. बताया गया कि उनके एक प्रोजेक्ट से सालाना आधार पर लीड फॉर्म जमा होने की संख्या 67% बढ़ी.
नवंबर 2018 में आरोही ने एचटीसी में पश्चिम एशिया और अफ्रीका क्षेत्र के लिए मार्केटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली. उनके काम में कंपनी के स्मार्टफोन, वर्चुअल रियलिटी उत्पादों और 5जी राउटर के लिए मार्केटिंग रणनीति, जनसंपर्क, खुदरा मार्केटिंग और वृद्धि से जुड़ी पहल शामिल थीं.
कॉरपोरेट नौकरी के साथ आरोही ने दुबई के उद्यम यल्ला वेजी की सह-संस्थापक बनकर कारोबार में भी हाथ आजमाया. उन्होंने इसमें मुख्य मार्केटिंग अधिकारी के तौर पर काम किया. बताया गया कि इस उद्यम से उन्हें सफल निकासी मिली.
लखनऊ लौटने के बाद आरोही को पौधों से बने उन अलग-अलग उत्पादों तक पहुंचने में मुश्किल हुई, जिनकी उन्हें दुबई में आदत हो गई थी. इसी दौरान उनकी मां को मधुमेह का पता चला और डॉक्टर ने उन्हें खाने से डेयरी उत्पाद हटाने की सलाह दी. विकल्प तलाशते समय आरोही का ध्यान ओट मिल्क पर गया.
आरोही को भारतीय ग्राहकों तक डेयरी से मुक्त विकल्प आसानी से पहुंचाने का मौका नजर आया. इसके बाद उन्होंने और अनमोल गोयल ने 2022 में डांसिंग काउ बनाने के लिए अपनी निजी बचत से 65 लाख रुपये लगाए.
विचार को ऐसा उत्पाद बनाने में समय लगा, जिसे ग्राहक रोजाना इस्तेमाल करना चाहें. टीम ने करीब 10 महीने तक अलग-अलग सामग्री के साथ प्रयोग किए. स्वाद, गाढ़ापन और एक जैसा रूप हासिल करने के लिए ओट मिल्क के मिश्रण में लगातार सुधार किया गया.
संस्थापक चाहते थे कि उत्पाद केवल अलग पेय बनकर न रह जाए. उनका मकसद इसे चाय, कॉफी, दलिया और मिठाइयों जैसी रोजाना की चीजों में इस्तेमाल के लायक बनाना था.
सही उत्पादन साझेदार तलाशना भी मुश्किल साबित हुआ. उद्यम के बारे में दी गई जानकारी के मुताबिक, उस समय भारत में पौधों से दूध बनाने वाली गिनी-चुनी कंपनियों के पास ही अपनी उत्पादन इकाइयां थीं.
संभावित साझेदारी तलाशने के लिए आरोही ने कई बार पुणे की यात्रा की. अलग-अलग डेयरी उत्पादकों से बातचीत के बाद संस्थापकों ने ऐसी इकाई चुनी, जो साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़ी उनकी जरूरतों पर खरी उतरती थी.
मार्च 2023 में डांसिंग काउ ने अपनी ओटिश श्रृंखला के दो उत्पादों के साथ व्यावसायिक बिक्री शुरू की. इनमें पेय और खाना बनाने के लिए तैयार ओटिश एक्स्ट्रा क्रीमी ओट मिल्क और चॉकलेट स्वाद वाला विकल्प ओटिश रिच चॉकलेट मिल्क शामिल थे.
संस्थापकों ने खानपान सेवा क्षेत्र में भी मौका देखा. कैफे और रेस्तरां को आपूर्ति करने से वे परिचित पेय और मिठाइयों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच सकते थे. इससे उन कारोबारों के साथ रिश्ते बनाने का भी मौका मिला, जो अपने खाने और पेय की सूची में ओट मिल्क का इस्तेमाल कर सकते थे.
मार्केटिंग, ग्राहक शोध और वृद्धि की रणनीति में आरोही का अनुभव भारतीय ग्राहकों के सामने एक अपेक्षाकृत अनजान उत्पाद श्रेणी पेश करने में काम आया.
स्टार्टअप पीडिया के मुताबिक, डांसिंग काउ ने पहले साल करीब 30,000 ग्राहकों को सेवाएं दीं और 90 लाख रुपये का राजस्व कमाया. संस्थापकों ने सीधे ग्राहकों तक पहुंचने के साथ कैफे और रेस्तरां से साझेदारी कर ब्रांड का विस्तार किया. बाद में कंपनी ने पूरे भारत में 500 से अधिक प्रतिष्ठानों को आपूर्ति शुरू कर दी.
वित्त वर्ष 25 तक कंपनी 1.25 लाख से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दे चुकी थी. इस दौरान उसने 2.2 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व दर्ज किया, जो पहले साल के राजस्व से करीब 144% अधिक था.
आरोही की इंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई, कॉरपोरेट मार्केटिंग का अनुभव और कारोबार से जुड़ी पिछली पृष्ठभूमि ने इस उद्यम की नींव रखने में मदद की. हालांकि, कंपनी की वृद्धि के लिए बड़े स्तर पर उत्पाद विकसित करने, उत्पादन साझेदारी बनाने और ग्राहकों का भरोसा जीतने की कोशिश भी करनी पड़ी.
आरोही सूर्या का सफर दिखाता है कि आरामदायक नौकरी छोड़ने का मतलब शून्य से शुरुआत करना नहीं है. पढ़ाई, कॉरपोरेट अनुभव और पुराने उद्यमों से मिला ज्ञान और हुनर नए कारोबारी मौके में उपयोगी बन सकता है.
उनका अनुभव ग्राहकों की वास्तविक जरूरत पहचानने और विचार को कामयाब उत्पाद में बदलने की चुनौतियों से निपटने का महत्व भी बताता है. मिश्रण में सुधार से लेकर सही उत्पादन साझेदार तलाशने तक, डांसिंग काउ को खड़ा करने के लिए धैर्य, प्रयोग और बाजार की साफ समझ की जरूरत पड़ी.
आरोही और अनमोल ने अपनी निजी समस्या से कारोबारी मौका पहचाना और 65 लाख रुपये की बचत लगाकर डांसिंग काउ शुरू किया. सावधानी से बनाई गई योजना, लगातार प्रयोग और कोशिशों के बाद कंपनी ने वित्त वर्ष 25 में 2.2 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व दर्ज किया. यह सफर बताता है कि कई बार खुद महसूस की गई समस्या ही कारोबार के विचार की शुरुआत बन सकती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क