सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर एक बार फिर 2016 की वो रात चर्चा में है. 28-29 सितंबर 2016 की इसी रात को भारतीय सेना ने LoC पार कर आतंकी ठिकानों पर हमला किया था और उरी आतंकी हमले का बदला लिया था. अब इस हमले के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं. इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र रामराव निंभोरकर (रिटायर्ड) ने उस रात की गतिविधियों को याद किया है.
लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र रामराव निंभोरकर (रि) ने सोमवार को कहा कि सेना के पास कार्रवाई की पूरी क्षमता थी, लेकिन अंतिम फैसला राजनीतिक नेतृत्व को लेना था. उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के 'दृढ़ संकल्प' ने इस मिशन को हकीकत में बदलने में अहम भूमिका निभाई.
सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान अहम ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने वाले तीन सीनियर आर्मी कमांडरों में से एक सेना के इस पूर्व अधिकारी ने कहा कि PM मोदी और तत्कालीन रक्षा मंत्री पर्रिकर अपने एक्शन के नतीजों की ज़िम्मेदारी लेने को तैयार थे.
निंभोरकर उस दौरान नगरोटा स्थित 16 कॉर्प्स (व्हाइट नाइट कॉर्प्स) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) थे. उन्होंने राजौरी और पुंछ के दो सीमावर्ती ज़िलों में ऑपरेशनल तैयारी और रणनीतिक कार्रवाई को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई थी.
भारत ने क्यों किया था सर्जिकल स्ट्राइक
भारत ने 28-29 सितंबर 2016 की दरम्यानी रात को पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था. इससे पहले 18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी में भारतीय सेना के बेस पर आतंकवादी हमला हुआ था. इस हमले में 19 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. भारत सरकार और सेना के अनुसार हमलावर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आए थे और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से जुड़े थे.
यह हमला सीमा पार से लगातार हो रहे आतंकवाद का हिस्सा था. भारत ने इसे सीधी चुनौती माना और जवाबी कार्रवाई के रूप में लाइन ऑफ कंट्रोल के पार आतंकी लॉन्च पैड्स पर सटीक सैन्य हमला किया. इन हमलों का उद्देश्य था आतंकियों के ठिकानों को नष्ट करना, उनके घुसपैठ के प्रयास रोकना और यह संदेश देना कि भारत सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा.
सरकार ने इसे आतंकवाद के खिलाफ रक्षात्मक और सटीक कार्रवाई बताया, जिसमें नागरिक क्षेत्रों को निशाना नहीं बनाया गया. यह घटना भारत-पाकिस्तान संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई.
जनरल की जुबानी, सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी
16 कॉर्प्स के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र रामराव निंभोरकर (रि) ने सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बताया कि 28 सितंबर 2016 की रात को हमारे सैनिक सीमा पार गए और उरी, पुंछ और भीमबर सेक्टर में 82 आतंकवादियों को मार गिराया." उन्होंने आगे कहा कि हमारी स्ट्राइक की योजना और उसे अंजाम देने का तरीका इतना सटीक था कि इसमें कोई 'कोलेटरल डैमेज' (आम नागरिकों या संपत्ति को नुकसान) नहीं हुआ.
इस काम के लिए चुनी गई दो यूनिट में उधमपुर स्थित 9 पैरा (SF) और 4 पैरा (SF) के स्पेशल फोर्सेस के सैनिक शामिल थे.
निंभोरकर ने कहा, "हमने पाकिस्तान को दिखा दिया कि हम उन पर ज़ोरदार हमला कर सकते हैं. इसे बालाकोट स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर में और आगे बढ़ाया गया."
उन्होंने बताया, "तत्कालीन सेना प्रमुख ने हमसे स्ट्राइक की योजनाएं मांगीं. हमने उन्हें योजनाएं तो दीं, लेकिन हमें उनके मंज़ूर होने का पक्का भरोसा नहीं था. हमें सुखद आश्चर्य हुआ जब रक्षा मंत्री पर्रिकर ने हमले की मंजूरी का फ़ैसला नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा, श्रीनगर स्थित 15 कॉर्प्स (चिनार कॉर्प्स) के तत्कालीन GOC लेफ्टिनेंट जनरल सतीश कुमार दुआ और मुझे बताया."
उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, "जब हमने सर्जिकल स्ट्राइक शुरू की तो भारत में सिर्फ़ 18 लोगों को ही इसके फ़ैसले के बारे में पता था. हम तीनों उनमें सबसे जूनियर थे."
उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक अपना मिशन पूरा करने और टारगेट को हिट करने के बाद अगले दिन सुबह करीब 5 बजे भारतीय ज़मीन पर वापस आ गए थे. हमें जो भी उपकरण चाहिए थे, वे मिले और एयर सपोर्ट की ज़रूरतें भी पूरी की गईं."
निंभोरकर ने कहा, "पीएम मोदी और पर्रिकर के मज़बूत इरादों की वजह से ही यह अभूतपूर्व मिशन पूरा हो सका."
रविवार को PM मोदी ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक आतंकी हमलों के दर्द का भारत की ओर से दिया गया निर्णायक जवाब था और इसने देश की आतंकवाद-विरोधी नीति का एक नया उदाहरण पेश किया.
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