रूसी मिसाइल से और घातक होगा भारत का सुखोई फाइटर जेट... उड़ेगी दुश्मनों की नींद

भारत सुखोई-30 MKI की ताकत बढ़ाने की तैयारी में है. इसे रूस की RVV-BD लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल से लैस किया जाएगा, जिसकी मारक क्षमता करीब 300 किमी है. चीन-पाकिस्तान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता के बीच इसे भारतीय वायुसेना की हवाई ताकत बढ़ाने वाला अहम कदम माना जा रहा है.

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सुखोई-30 MKI भारतीय वायुसेना का मुख्य लड़ाकू विमान है और इसके 260 से ज्यादा विमान सेवा में हैं. (Photo- ITG) सुखोई-30 MKI भारतीय वायुसेना का मुख्य लड़ाकू विमान है और इसके 260 से ज्यादा विमान सेवा में हैं. (Photo- ITG)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:04 PM IST

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा से ठीक पहले भारतीय वायुसेना ने एक बड़ा फैसला लिया गया है. वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले सुखोई Su-30 MKI लड़ाकू विमानों को रूस की बेहद घातक और लंबी दूरी की 'RVV-BD' मिसाइल से लैस करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. 

यह मिसाइल भारत को चीन और पाकिस्तान के खिलाफ हवाई युद्ध में एक मजबूत और निर्णायक बढ़त दिलाएगी. इस मिसाइल की मदद से भारतीय लड़ाकू विमान करीब 300 किलोमीटर तक दूर टारगेट को निशाना बना सकेंगे. 

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रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस मिसाइल को सुखोई-30 MKI में इस्तेमाल करने के लिए विमान में जरूरी बदलाव किए जाएंगे. रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने सोमवार को करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी. इसी पैकेज में सुखोई-30 MKI के साथ RVV-BD मिसाइल के एकीकरण से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल बताया गया है.

AWACS और बड़े हवाई लक्ष्यों के लिए अहम

RVV-BD की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी दूरी है. इस तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल केवल दुश्मन के लड़ाकू विमानों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि हवा में मौजूद AWACS, AEW&C विमान, निगरानी विमान और हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर जैसे महत्वपूर्ण टारगेट के खिलाफ भी किया जा सकता है. ऐसे विमान दुश्मन की हवाई गतिविधियों पर नजर रखने और लड़ाकू विमानों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं.

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जानकारी के मुताबिक RVV-BD के कुछ संस्करण करीब 300 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम हैं और इनकी गति करीब Mach 6 तक बताई गई है. हालांकि वास्तविक मारक क्षमता और प्रदर्शन मिशन, लॉन्च परिस्थितियों और मिसाइल के संस्करण पर निर्भर करेगा.

चीन-पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ेगी क्षमता

भारत का यह कदम क्षेत्र में लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की बढ़ती क्षमता के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. खासकर पाकिस्तान के पास मौजूद चीन की PL-15 मिसाइल को लेकर भी भारत अपनी लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता मजबूत कर रहा है.

सुखोई-30 MKI भारतीय वायुसेना का मुख्य लड़ाकू विमान है और इसके 260 से ज्यादा विमान सेवा में हैं. विमान को पहले से ही लंबी दूरी की हवा से जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल ले जाने की क्षमता हासिल है. RVV-BD के एकीकरण से सुखोई-30 MKI की लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने की क्षमता भी काफी बढ़ जाएगी.

‘सुपर सुखोई’ से भी बढ़ाई जा रही ताकत

सुखोई-30 MKI के आधुनिकीकरण की एक अलग योजना पर भी काम चल रहा है. इसके तहत विमानों में नए रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और एवियोनिक्स लगाए जाने हैं. इससे विमान लंबी दूरी से दुश्मन के लक्ष्यों को पहचानने और उन पर हमला करने में ज्यादा सक्षम होगा.

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भारत स्वदेशी अस्त्र मिसाइल के एडवांस वर्जन और फ्रांस की मेटियोर मिसाइलों पर भी काम कर रहा है. ऐसे में RVV-BD को सुखोई-30 MKI के साथ जोड़ने की योजना भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की हवाई युद्ध क्षमता को और मजबूत करने वाली कड़ी के तौर पर देखी जा रही है.

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