फिर जंग शुरू... कौन से फाइटर जेट और हथियार लेकर ईरान पर टूट पड़ा अमेरिका

ईरान और अमेरिका के बीच फिर जंग छिड़ गई. ईरान के ड्रोन ने अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर गिराया, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के 20 सैन्य ठिकानों पर हमला किया. IRGC ने बहरीन में US Fifth Fleet बेस पर जवाबी हमला किया.

Advertisement
अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमले की तैयारी करता अमेरिकी सैनिक. (Photo: US Centcom) अमेरिका के एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमले की तैयारी करता अमेरिकी सैनिक. (Photo: US Centcom)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. जून 2026 में ईरान और अमेरिका के बीच नई जंग छिड़ गई है. ईरान के ड्रोन ने अमेरिकी आर्मी के अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए. 

इसके बाद ईरान के IRGC ने बहरीन में अमेरिकी Fifth Fleet बेस पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है. खाड़ी क्षेत्र में फिर से युद्ध की आग भड़क उठी है. सभी कुछ एक दिन पहले शुरू हुआ जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी सेना का अपाचे हेलिकॉप्टर मार गिराया गया. अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इसे ड्रोन से हमला करके गिराया. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: अमेरिका का समुद्री ड्रोन... जो ईरान के पंजे से निकाल लाया अमेरिकी पायलटों को

हेलीकॉप्टर में सवार दोनों क्रू सदस्य पानी में गिर गए, लेकिन अमेरिकी नौसेना के समुद्री ड्रोन Saronic Corsair ने उन्हें सुरक्षित बचाया. यह घटना अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई, जिसे अमेरिका ने अनुचित आक्रामकता बताया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर CENTCOM ने तुरंत कार्रवाई की. 

अमेरिका की सैन्य कार्रवाई

CENTCOM ने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हमले किए. अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने कमांड एवं नियंत्रण केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन, निगरानी रडार, ड्रोन भंडारण सुविधाएं और मिसाइल लॉन्चर को निशाना बनाया.

हमले मुख्य रूप से क़ेश्म द्वीप, बंदर अब्बास, सीरिक द्वीप और बंदर जास्क क्षेत्रों में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हुए. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों को भी सटीक हथियारों से तबाह किया गया. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई हाल के हमलों और अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर खतरे के जवाब में की गई.

Advertisement

यह भी पढ़ें: सेना खरीदेगी 300 से ज्यादा K-9 वज्र तोप, चीन-पाक सीमा पर बढ़ेगी ताकत

ईरान की जवाबी कार्रवाई

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन में स्थित अमेरिकी Fifth Fleet बेस पर ड्रोन हमला करने का दावा किया. IRGC ने कहा कि यह हमला Shahed-136 जैसे हमलावर ड्रोन से किया गया. ईरान ने इसे अमेरिकी हमले का जवाब बताया और चेतावनी दी कि अगर हमले जारी रहे तो और भारी जवाब दिया जाएगा. बहरीन और आसपास के क्षेत्रों में एयर रेड सायरन बजाए गए और कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया.

यह भी पढ़ें: महाभूकंप से तबाही, डरा गई सुनामी भी... फिलीपींस की गलियां बर्बादी की गवाही, Video

कौन से हथियार और विमान इस्तेमाल किए?

अमेरिका ने इस हमले में अपने अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया. F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट, F/A-18 सुपर हॉर्नेट और B-52 बॉम्बर्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल थे. सटीक हमलों के लिए JDAM गाइडेड बम, Tomahawk क्रूज मिसाइल और अन्य स्मार्ट हथियारों का प्रयोग हुआ. इन हथियारों की खासियत यह है कि ये बेहद सटीक हैं और सिविलियन इलाकों को नुकसान पहुंचाए बिना सैन्य ठिकानों को नष्ट कर सकते हैं.

फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े हमले किए थे. उसके बाद एक नाजुक सीजफायर हुआ, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल जहाजों की सुरक्षा, नौसैनिक ब्लॉकेड और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर विवाद जारी रहा. ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण चाहता है, जबकि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना चाहता है. अपाचे हेलिकॉप्टर की घटना ने इस सीजफायर को तोड़ दिया.

Advertisement

यह भी पढ़ें: फिर ट्रंप का गेम बिगाड़ेंगे नेतन्याहू? ईरान डील पूरी होने से पहले लेबनान में गिराए बम

खाड़ी क्षेत्र में तेल की आपूर्ति दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस संघर्ष से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकते हैं. अमेरिका ने कहा है कि उसकी सेनाएं क्षेत्र में पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी ईरानी जवाब का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं. वहीं ईरान ने भी मजबूत प्रतिरोध की बात कही है.

भविष्य की संभावनाएं

दोनों पक्ष पूर्ण युद्ध नहीं चाहते, लेकिन छोटी-छोटी घटनाएं बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती हैं. ट्रंप प्रशासन डिप्लोमेसी के जरिए समझौते की बात कर रहा है, लेकिन सैन्य तैयारियां भी तेज हैं. दुनिया भर के नेता इस स्थिति पर चिंता जता रहे हैं और तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं.

ईरान और अमेरिका के बीच यह नया दौर फिर से साबित करता है कि मध्य पूर्व कितना अस्थिर है. अपाचे हेलिकॉप्टर की घटना, अमेरिकी हमले, IRGC का जवाब और Fifth Fleet पर दावा – ये सभी घटनाएं दिखाती हैं कि क्षेत्र में शांति कितनी नाजुक है. दोनों देशों को संयम बरतना होगा, वरना यह छोटा संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »