मिडिल ईस्ट में एक ऐसी घटना घटी है जो आधुनिक युद्ध और बचाव अभियानों की दिशा बदलने वाली साबित हो सकती है. अमेरिकी नौसेना के एक ऑटोनॉमस समुद्री ड्रोन ने दो अमेरिकी सेना के हेलीकॉप्टर क्रू सदस्यों को बचाया, जब उनका अपाचे हेलिकॉप्टर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास गोली मारकर गिराया गया.
यह माना जा रहा है कि अमेरिकी सैन्य इतिहास में पहली बार किसी अनमैन्ड सरफेस वेसल ने समुद्र में फंसे कर्मियों को बचाया है. इस ड्रोन का नाम है Saronic Corsair. यह घटना न केवल तकनीकी सफलता है बल्कि अमेरिका की अनमैन्ड सिस्टम्स की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाती है.
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यह बचाव ऑपरेशन बहुत तेजी से हुआ. हेलीकॉप्टर गिरने के लगभग दो घंटे बाद Corsair ड्रोन ने क्रू को पानी में तैरते हुए ढूंढ लिया, उन्हें अपनी डेक पर सवार किया और सुरक्षित जगह ले जाकर हेलीकॉप्टर द्वारा आगे ट्रांसफर कर दिया. दोनों पायलट स्थिर स्थिति में हैं. कोई गंभीर चोट नहीं आई. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसकी पुष्टि की कि पायलट सुरक्षित हैं.इस घटना ने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है कि कैसे छोटे-छोटे ऑटोनॉमस ड्रोन बड़े खतरनाक मिशनों में जानें बचा सकते हैं.
Saronic Corsair ड्रोन क्या है?
Saronic Corsair एक 24 फीट लंबा ऑटोनॉमस सरफेस वेसल (ASV) है. इसे टेक्सास स्थित कंपनी Saronic Technologies ने बनाया है. यह ड्रोन लगभग 454 किलोग्राम पेलोड ले जा सकता है. करीब 1850 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर सकता है. इसकी टॉप स्पीड लगभग 65 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा है. इतनी क्षमता के साथ यह लंबे समय तक समुद्र में रहकर मिशन पूरा कर सकता है.
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Corsair में एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग सिस्टम लगे हैं. यह अपने आप नेविगेट कर सकता है. सेंसर के जरिए दुश्मन की गतिविधियों को ट्रैक कर सकता है. कम से कम इंसानी दखल के काम करता है. इसका ओपन आर्किटेक्चर डिजाइन इसे विभिन्न मिशनों के लिए अनुकूल बनाता है- चाहे सर्विलांस हो, माइन डिटेक्शन हो या बचाव अभियान.
अमेरिकी नौसेना इसे रेप्लीकेटर प्रोग्राम के तहत खरीद रही है, जिसमें हजारों ऐसे ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म तैनात करने की योजना है. Corsair को मार्च 2026 के अंत में मध्य पूर्व में तैनात किया गया था. यह घटना उसकी पहली बड़ी सफलता है.
यह ड्रोन सस्ता और आकर्षक विकल्प है. पारंपरिक युद्धपोतों की तुलना में इसका निर्माण और रखरखाव सस्ता पड़ता है. एक डिस्ट्रॉयर जितनी लागत में हजारों ऐसे ड्रोन बनाए जा सकते हैं. इससे नौसेना की पहुंच बढ़ती है और सैनिकों को खतरे से दूर रखा जा सकता है.
टास्क फोर्स 59: अनमैन्ड सिस्टम्स का नया केंद्र
यह बचाव टास्क फोर्स 59 ने किया, जो अमेरिकी नौसेना की पहली यूनिट है जो पूरी तरह अनमैन्ड सिस्टम्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर केंद्रित है. इसे 2021 में बहरीन में स्थापित किया गया था. टास्क फोर्स 59 का मुख्यालय बहरीन में है. यह फिफ्थ फ्लीट के अंतर्गत काम करता है. इसका उद्देश्य मध्य पूर्व के पानी में समुद्री सुरक्षा बढ़ाना, मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस मजबूत करना और पारंपरिक जहाजों के साथ अनमैन्ड वाहनों को एकीकृत करना है.
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टास्क फोर्स 59 ने अब तक हजारों घंटे अनमैन्ड वाहनों को ऑपरेट किए हैं. इसमें सतही ड्रोन, पानी के नीचे वाले वाहन (UUV) और हवाई ड्रोन शामिल हैं. Corsair जैसे नए ड्रोन बोट मार्च 2026 से इसमें शामिल हुए हैं. यह यूनिट डिजिटल ओशन की अवधारणा पर काम कर रही है, जहां सेंसर, AI और ऑटोनॉमस व्हीकल एक नेटवर्क बनाकर लगातार जानकारी साझा करते हैं. इससे कमांडरों को रीयल-टाइम निर्णय लेने में मदद मिलती है.
इस यूनिट ने कई एक्सरसाइज किए हैं, जैसे डिजिटल होराइजन, जिसमें विभिन्न देशों के अनमैन्ड सिस्टम्स को शामिल किया गया. इससे पता चलता है कि अमेरिका न केवल अकेले बल्कि सहयोगी देशों के साथ मिलकर इस तकनीक को आगे बढ़ा रहा है.
समुद्री ड्रोन की भूमिका और क्षमताएं
समुद्री ड्रोन (Sea Drones या Unmanned Surface Vessels - USVs) अब युद्ध का नया हथियार बन चुके हैं. ये निगरानी, माइन डिटेक्शन, दुश्मन ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और यहां तक कि हमला करने में भी सक्षम हैं. Corsair जैसे ड्रोन लंबी दूरी तक जा सकते हैं, घंटों या दिनों तक समुद्र में रह सकते हैं. खतरनाक इलाकों में बिना किसी सैनिक के जोखिम के काम कर सकते हैं.
अमेरिका सतही और पानी के नीचे दोनों तरह के ड्रोन इस्तेमाल करता है. पानी के नीचे वाले सिस्टम अक्सर गुप्त रहते हैं. ये ड्रोन नियमित निगरानी से लेकर हाई-रिस्क मिशन तक सब कर सकते हैं. पेंटागन इन्हें पारंपरिक एसेट्स के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना चाहता है, ताकि सेना की क्षमता बढ़े और लागत कम आए.
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लागत का फायदा बहुत बड़ा है. बड़े युद्धपोत महंगे और क्रू की जरूरत पड़ती है, जबकि ड्रोन सस्ते, तेजी से तैनात किए जा सकते हैं और स्वार्म में काम कर सकते हैं. अमेरिकी नौसेना सैकड़ों या हजारों Corsair तैनात करने की योजना बना रही है. इससे दुश्मन पर दबाव बढ़ेगा और जवाबी कार्रवाई तेज होगी.
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
हालांकि यह तकनीक आशाजनक है, फिर भी चुनौतियां हैं. ऑटोनॉमस सिस्टम्स में साइबर अटैक का खतरा, खराब मौसम में प्रदर्शन, कम्युनिकेशन लिंक की विश्वसनीयता और नैतिक मुद्दे शामिल हैं. क्या पूरी तरह AI पर निर्भर रहना सुरक्षित है? इन सवालों पर काम चल रहा है.
फिर भी, भविष्य में ऐसे ड्रोन और ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे. टास्क फोर्स 59 जैसी यूनिट्स इस दिशा में अग्रणी हैं. Saronic जैसी कंपनियां तेजी से प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं. $392 मिलियन के कॉन्ट्रैक्ट से पता चलता है कि नौसेना इस पर कितना भरोसा कर रही है.
समुद्री ड्रोन की लड़ाकू क्षमता
यूक्रेन-रूस युद्ध ने समुद्री ड्रोन की ताकत दुनिया के सामने रख दी है. यूक्रेन के समुद्री ड्रोन ने रूसी युद्धपोतों को डुबोया और यहां तक कि एक हेलीकॉप्टर को भी गिराया - जो अनमैन्ड वाहन के लिए अभूतपूर्व था. इससे साबित हुआ कि छोटे, सस्ते और ऑटोनॉमस व्हीकल बड़े नेवी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.
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अमेरिका इस सबक को ध्यान में रखकर अपना कार्यक्रम चला रहा है. Corsair न केवल बचाव बल्कि हमला करने में भी सक्षम बनाया जा रहा है. स्वार्म टैक्टिक्स से दुश्मन की रक्षा व्यवस्था को भेदना आसान हो जाएगा.
युद्ध का नया युग
Saronic Corsair द्वारा किए गए इस बचाव अभियान ने दिखाया कि अनमैन्ड सिस्टम्स अब सिर्फ सपोर्ट रोल नहीं, बल्कि मुख्य भूमिका निभा सकते हैं. यह घटना पेंटागन की अनमैन्ड वाहनों को बढ़ावा देने की रणनीति की सफलता है. भविष्य में समुद्र की लड़ाइयां ज्यादा स्वायत्त, कम खर्चीली और कम जोखिम वाली होंगी.
मानवीय सैनिकों की जगह कोई नहीं ले सकता, लेकिन Corsair जैसे ड्रोन उन्हें सुरक्षित रखने और मिशन सफल करने में अहम भूमिका निभाएंगे. मध्य पूर्व की तनावपूर्ण स्थिति में यह बचाव न केवल दो जानें बचाने का मामला है, बल्कि सैन्य तकनीक के विकास का मील का पत्थर भी है.
ऋचीक मिश्रा