भारतीय नौसेना ने अरब सागर की सुरक्षा में एक बार फिर अपनी सजगता और त्वरित कार्रवाई का प्रमाण दिया है. INS त्रिकंड ने अदन की खाड़ी एक और समुद्री डकैती के प्रयास को नाकाम कर दिया. प्रभावित जहाज MV गोल्डन आर्सेनल पर मार्कोस कमांडो उतरे और पूरे जहाज की सैनिटाइजेशन की. इस जहाज पर एक भारतीय क्रू सदस्य भी सवार था. जहाज पर भारत के लिए महत्वपूर्ण सामान लदा हुआ था.
जब पाइरेट्स ने जहाज पर हमला करने की कोशिश की, तो क्रू सदस्यों ने खुद को सेफ रूम में बंद कर लिया और डिस्ट्रेस सिग्नल भेजा. भारतीय नौसेना के युद्धपोत के पास आने की सूचना मिलते ही पाइरेट्स भाग निकले. मार्कोस कमांडोस ने जहाज पर पहुंचकर पूरी तलाशी ली और पुष्टि की कि कोई खतरा शेष नहीं है.
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यह घटना अदन की खाड़ी में हुई, जो विश्व व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. MV गोल्डन आर्सेनल पर सवार क्रू ने तुरंत भारतीय नौसेना से मदद मांगी. INS त्रिकंड ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जहाज की ओर बढ़ना शुरू कर दिया. पाइरेट्स को भारतीय युद्धपोत आता दिखाई देते ही वे भाग गए.
भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडो (Marine Commandos) ने जहाज पर बोर्डिंग की और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित घोषित किया. जहाज पर भारत के लिए जरूरी सामान होने के कारण इसकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण थी. इस पूरे ऑपरेशन में किसी भी क्रू सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.
इससे पहले भी INS त्रिकंड ने बचाया जहाज
कुछ दिन पहले 17 जून 2026 को INS त्रिकंड ने पश्चिमी हिंद महासागर में MV फरीदा 5 नामक जहाज से आए डिस्ट्रेस कॉल पर तुरंत प्रतिक्रिया दी थी. उस समय भी भारतीय नौसेना ने शीघ्रता से कार्रवाई कर पाइरेसी के खतरे को टाल दिया और व्यापारी जहाज की सुरक्षा सुनिश्चित की.
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ये दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि भारतीय नौसेना क्षेत्र में निरंतर गश्त कर रही है. समुद्री डकैती के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपना रही है.
भारतीय नौसेना इन दिनों हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है. अदन की खाड़ी और सोमालिया के आसपास पाइरेसी की घटनाएं होती रहती हैं. भारतीय नौसेना के युद्धपोत नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा में योगदान दे रहे हैं.
INS त्रिकंड एक आधुनिक युद्धपोत है जो तेज गति से कार्यवाही करने और विशेष अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है. मार्कोस कमांडो भारत की खास नौसेना इकाई है, जो समुद्री आतंकवाद और पाइरेसी से निपटने के लिए प्रशिक्षित है.
शिवानी शर्मा