स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सीजफायर के बाद भी खाड़ी में तैनात रहेगी भारतीय नौसेना

ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम के बावजूद भारतीय नौसेना खाड़ी में अपनी तैनाती बनाए रखेगी. ऑपरेशन संकल्प के तहत युद्धपोत, हेलिकॉप्टर और मार्कोस कमांडो समुद्री मार्गों की सुरक्षा और भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे.

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भारतीय नौसेना अरब सागर में लगातार तैनात रहेगी और तेल टैंकरों-जहाजों को सुरक्षा देगी. (Photo: Indian Navy) भारतीय नौसेना अरब सागर में लगातार तैनात रहेगी और तेल टैंकरों-जहाजों को सुरक्षा देगी. (Photo: Indian Navy)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:44 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष विराम होने के बावजूद भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी तैनाती कम नहीं करेगी. नौसेना अपने पूर्व संघर्ष स्तर पर ही युद्धपोतों, हेलिकॉप्टरों और मार्कोस कमांडो की तैनाती बनाए रखेगी. इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा, तेल और एलपीजी कैरियर्स का सुरक्षित परिवहन तथा समुद्री मार्गों की निगरानी करना है. 

ऑपरेशन संकल्प 2019 से लगातार चल रहा है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अरब सागर के उत्तरी हिस्से में सुरक्षा सुनिश्चित करता है. हाल के ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान नौसेना ने अपनी मौजूदगी और बढ़ा दी थी. अब संघर्ष विराम के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही, इसलिए नौसेना पूर्ण तैनाती बनाए रखेगी.

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ऑपरेशन संकल्प भारत की समुद्री सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके तहत भारतीय नौसेना खाड़ी ओमान और अदन की खाड़ी में नियमित गश्त करती है. युद्धपोत भारतीय ध्वज वाले मर्चेंट वेसल्स को जरूरत पड़ने पर एस्कॉर्ट करते हैं. हेलिकॉप्टर हवाई निगरानी करते हैं जबकि मार्कोस कमांडो अभियानों के लिए तैयार रहते हैं.


 
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. उसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है. इस खाड़ी में कोई भी अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित करती है. इसलिए नौसेना ने 2019 से स्थाई रूप से युद्धपोत तैनात रखे हैं, जो हाल के संकट में और उपयोगी साबित हुए.

लॉजिस्टिकल सपोर्ट और तैयारियां

भारतीय नौसेना को ओमान के दुक्म और सलालाह बंदरगाहों पर लॉजिस्टिकल सपोर्ट मिलता है. साथ ही समुद्र में फ्लीट टैंकर से ईंधन और सामग्री की आपूर्ति की जाती है. यह व्यवस्था लंबे समय तक तैनाती बनाए रखने में मदद करती है. 

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संघर्ष के दौरान नौसेना ने क्रूड ऑयल और एलपीजी कैरियर्स को विशेष एस्कॉर्ट प्रदान किया था. अब भी यही व्यवस्था जारी रहेगी. भारत सरकार और नौसेना का मानना है कि क्षेत्र में शांति स्थाई नहीं है, इसलिए सतर्कता बनाए रखना जरूरी है.

यह फैसला भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा को दर्शाता है. चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों और क्षेत्रीय तनावों के बीच भारतीय नौसेना अपनी क्षमता बढ़ा रही है. खाड़ी क्षेत्र भारत के व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां से 60 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात होता है. 

ईरान-अमेरिका संघर्ष विराम सकारात्मक कदम है, लेकिन क्षेत्र में ड्रोन हमले, समुद्री डकैती और राजनीतिक अस्थिरता के खतरे बने हुए हैं. इसलिए भारतीय नौसेना की निरंतर मौजूदगी न सिर्फ भारतीय जहाजों की सुरक्षा करती है बल्कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में भी योगदान देती है.

भारतीय नौसेना आगे भी अपनी तैनाती की समीक्षा करती रहेगी. अगर क्षेत्र पूरी तरह शांत होता है तो तैनाती को समायोजित किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल पूर्व स्तर बनाए रखा जाएगा. यह कदम भारत की समुद्री शक्ति और वैश्विक जिम्मेदारी दोनों को मजबूत करता है. 

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