किम जोंग ने दुनिया को 'चोए ह्योन' की धमकी दी, कहा- 5 साल में दो ऐसे और बनाएंगे

नॉर्थ कोरिया ने 5000 टन के नए डेस्ट्रॉयर 'चोए ह्योन' को कमीशन कर लिया है. किम जोंग उन इसे परमाणु हथियारों से लैस वॉरशिप बता रहे हैं. दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के लिए यह टेंशन है.

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ये है नॉर्थ कोरिया का नया युद्धपोत चोए ह्योन जो परमाणु मिसाइलों से लैस है. (Photo: KCNA/AP) ये है नॉर्थ कोरिया का नया युद्धपोत चोए ह्योन जो परमाणु मिसाइलों से लैस है. (Photo: KCNA/AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:29 AM IST

24 जून 2026 को नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन ने पश्चिमी बंदरगाह नाम्पो में 5000 टन वाले नए डिस्ट्रॉयर 'चोए ह्योन' को नौसेना में शामिल कर दिया. किम ने इस युद्धपोत को देश की बढ़ती नौसेना और परमाणु क्षमता का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि नॉर्थ कोरिया की नौसेना सिर्फ तट की रक्षा करने वाली ताकत नहीं रही, बल्कि रणनीतिक हथियारों से लैस एक कंपलीट मिलिट्री पावर बन रही है. 

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यह घटना ऐसे समय हुई है जब नॉर्थ कोरिया अपनी नौसेना को परमाणु हथियारों से मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. चोए ह्योन क्लास का यह पहला युद्धपोत अप्रैल 2025 में लॉन्च किया गया था. इसमें एंटी-एयरक्राफ्ट, एंटी-शिप हथियार, परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें लगी हैं. रूस की मदद से यह जहाज बनाया गया है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध गहरे हो गए हैं.

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चोए ह्योन डेस्ट्रॉयर: क्या है खासियत?

चोए ह्योन नॉर्थ कोरिया का अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत है. इसकी लंबाई करीब 145 मीटर है. इसमें 88 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल्स हैं, जो विभिन्न आकार के मिसाइलों को लॉन्च कर सकते हैं. इसमें 127 या 130 मिलीमीटर की नौसेना तोप, क्लोज-इन वेपन सिस्टम, टॉरपीडो लॉन्चर और एंटी-शिप मिसाइलें भी हैं. 

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किम जोंग उन ने कहा कि यह जहाज पश्चिमी तट की रक्षा करेगा और प्री-एम्पटिव हमले हमले की क्षमता बढ़ाएगा. मार्च 2026 में इस जहाज से परमाणु क्षमता वाले क्रूज मिसाइलों का परीक्षण भी किया गया था. किम ने दावा किया कि आधी सदी से चली आ रही समुद्री संप्रभुता की रक्षा अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच गई है. 

यह विकास नॉर्थ कोरिया की नौसेना रणनीति में बड़े बदलाव को दिखाता है. पहले बैलिस्टिक मिसाइलों पर फोकस था, अब नौसेना क्षमता पर जोर दिया जा रहा है. इसमें परमाणु पनडुब्बी का निर्माण भी शामिल है.

रूस-चीन सहयोग और तकनीकी चुनौतियां

दक्षिण कोरियाई अधिकारी और विशेषज्ञ मानते हैं कि चोए ह्योन रूसी सहायता से बना है. दोनों देशों के बीच गहरे सैन्य संबंधों के चलते तकनीक और सामग्री का आदान-प्रदान हुआ होगा. हालांकि कुछ विश्लेषक सवाल करते हैं कि क्या यह जहाज पूरी तरह एक्टिव सर्विस के लिए तैयार है. 

नॉर्थ कोरिया ने लॉन्चिंग के बाद कई परीक्षण किए, जिनमें मिसाइल लॉन्च भी शामिल थे. मई 2025 में इसी क्लास का दूसरा जहाज 'कांग कोन' लॉन्चिंग के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन बाद में इसे ठीक कर दोबारा लॉन्च किया गया. किम ने कहा कि यह भी जल्द सेवा में आएगा. देश 10 हजार टन वाले बड़े डेस्ट्रॉयर बनाने की भी योजना बना रहा है.

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किम जोंग उन ने कहा कि अब नौसेना रक्षा से आगे बढ़कर रणनीतिक हमले की क्षमता हासिल कर रही है. नॉर्थ कोरिया पश्चिमी समुद्र में नई समुद्री सीमा घोषित करने की तैयारी कर रहा है, जो साउथ कोरिया के नियंत्रण वाले पानी में घुस सकती है. 

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नॉर्थ कोरिया उत्तरी सीमा रेखा (Northern Limit Line) को मान्यता नहीं देता, जो 1950-53 के कोरियाई युद्ध के बाद तय की गई थी. इस सीमा पर पहले कई खूनी झड़पें हो चुकी हैं. बढ़ते तनाव के बीच यह नया युद्धपोत क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है.

किम की सैन्य रणनीति: परमाणु नौसेना का भविष्य

फरवरी 2026 के वर्कर्स पार्टी कांग्रेस में किम ने पांच साल के सैन्य लक्ष्यों में नौसेना पर जोर दिया था. इसमें पानी के अंदर से लॉन्च होने वाली ICBM मिसाइलें भी शामिल हैं. 2019 में अमेरिका के साथ परमाणु कूटनीति विफल होने के बाद किम ने परमाणु हथियारों का तेजी से विस्तार किया और रूस-चीन के साथ संबंध मजबूत किए.

वे दक्षिण कोरिया के प्रति सख्त रुख रखते हैं लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत का दरवाजा खुला रखा है. शर्त है कि अमेरिका पहले से न्यूक्लियर डिन्यूक्लियराइजेशन की मांग छोड़े. किम ने कहा कि अगले पांच साल में हर साल दो ऐसे युद्धपोत बनाए जाएंगे. यह महत्वाकांक्षी योजना है, जो नॉर्थ कोरिया की औद्योगिक क्षमता और संसाधनों पर निर्भर करेगी.

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चोए ह्योन जैसा युद्धपोत नॉर्थ कोरिया को समुद्र में ज्यादा दूर तक अपनी ताकत दिखाने की क्षमता देगा. इससे दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका की नौसेनाओं को चुनौती मिलेगी. परमाणु क्रूज मिसाइलों से लैस जहाज दुश्मन के बेड़े और तटवर्ती इलाकों पर हमला कर सकता है.

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दक्षिण कोरिया और अमेरिका इस विकास पर नजर रखे हुए हैं. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि नॉर्थ कोरिया की बढ़ती नौसेना क्षमता हथियारों की दौड़ को बढ़ावा देगी. हालांकि नॉर्थ कोरिया की अर्थव्यवस्था कमजोर होने के कारण बड़े पैमाने पर बेड़ा बनाने में चुनौतियां हैं.

यह कमीशनिंग नॉर्थ कोरिया की परमाणु महत्वाकांक्षा का हिस्सा है. अगर किम अपनी योजना सफल कर लेते हैं तो कोरियाई प्रायद्वीप पर सुरक्षा स्थिति और बिगड़ सकती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कूटनीति और प्रतिबंधों के जरिए इसे नियंत्रित करने की कोशिश करनी होगी. 

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