तीनों सेनाओं का अंडरग्राउंड सुपर कंट्रोल रूम इसी महीने होगा शुरू, ईरान जंग से लिया सबक!

मई 2026 तक शुरू होने वाला यह अंडरग्राउंड जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर तीनों सेनाओं को एक साथ लाएगा. थिएटर कमान की दिशा में यह बड़ा कदम युद्ध योजना और तालमेल को बेहतर बनाएगा, जिससे आधुनिक खतरों के खिलाफ भारत की रक्षा प्रणाली अभेद्य होगी.

Advertisement
कर्तव्य भवन के नीचे ही तीनों सेनाओं का अंडरग्राउंड जॉइंट सेंटर बनकर तैयार हो चुका है. (File Photo: PTI) कर्तव्य भवन के नीचे ही तीनों सेनाओं का अंडरग्राउंड जॉइंट सेंटर बनकर तैयार हो चुका है. (File Photo: PTI)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:09 PM IST

भारत अपनी सैन्य शक्ति को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने सोमवार को एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि देश का पहला 'त्रि-सेवा संयुक्त अभियान केंद्र' (Joint Operations Centre - JOC) मई 2026 के अंत तक काम करना शुरू कर देगा.

यह केंद्र नई दिल्ली में बन रहे नए कर्तव्य भवन के काफी नीचे, जमीन की गहराइयों में बनाया गया है. इसे बनाने की प्रेरणा हाल के ईरान युद्ध से मिली है, जहां भूमिगत केंद्रों ने सुरक्षा के लिहाज से बड़ी भूमिका निभाई थी. यह केंद्र न केवल आधुनिक तकनीकों से लैस होगा, बल्कि युद्ध की स्थिति में भारत की तीनों सेनाओं के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेगा.

Advertisement

यह भी पढ़ें: जमीन के अंदर से दो झटके लगे, तब तिब्बत में बने दुनिया के सबसे ऊंचे पठार

तीनों सेनाओं का एक 'दिमाग' और एकीकृत कमान

इस नए ऑपरेशन सेंटर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना अलग-अलग योजनाएं बनाने के बजाय एक साथ मिलकर काम करेंगी. दिल्ली स्थित इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य युद्ध के मैदान में सटीक योजना बनाना और उसे तुरंत लागू करना है. 

अभी तक तीनों सेनाओं के अपने अलग-अलग कमांड सेंटर होते थे, लेकिन अब एक ही छत के नीचे बैठकर तीनों सेनाओं के अफसर दुश्मन की हर चाल पर नजर रखेंगे. यह कदम भारत की सैन्य आधुनिकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे युद्ध के समय फैसलों में होने वाली देरी को खत्म किया जाएगा. 

Advertisement

ईरान युद्ध से लिया सबक: जमीन के नीचे सुरक्षा कवच

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस सेंटर को जमीन के काफी नीचे (Underground) बनाने का फैसला रणनीतिक है. ईरान और अन्य आधुनिक युद्धों में यह देखा गया है कि दुश्मन सबसे पहले संचार केंद्रों और कमांड सेंटरों पर हवाई हमले करते हैं. 

जमीन के नीचे होने के कारण यह सेंटर बड़े मिसाइल हमलों और बमबारी से पूरी तरह सुरक्षित रहेगा. वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इस सेंटर का प्रस्ताव रखा था, जिसे अब युद्ध स्तर पर लागू किया जा रहा है. यह सेंटर न केवल सुरक्षित है, बल्कि यहां से पूरे देश की सीमाओं की 24 घंटे निगरानी की जा सकेगी.

थिएटर कमान की ओर बढ़ता भारत का कदम

यह जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर वास्तव में भारत में थिएटर कमान लागू करने की दिशा में पहली बड़ी तैयारी है. थिएटर कमान का मतलब है कि पूरे देश की सीमाओं को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर वहां तीनों सेनाओं को एक ही कमांडर के अधीन कर देना.

यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार कैसे बदलेगी राष्ट्रीय सुरक्षा की तस्वीर? 

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बताया कि पिछले ढाई साल से इस एकीकरण पर गंभीरता से काम चल रहा है. योजना के अनुसार भारत में तीन मुख्य थिएटर कमान बनाई जाएंगी- पहली चीन सीमा पर नजर रखने के लिए उत्तरी कमान, दूसरी पाकिस्तान के लिए पश्चिमी कमान और तीसरी समुद्र की रक्षा के लिए मैरीटाइम कमान.

Advertisement

चीन की चुनौती और भारत की भविष्य की तैयारी

भारत का यह सुधार काफी हद तक वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए किया जा रहा है. हमारे पड़ोसी देश चीन ने 2015 में ही अपनी सेना को थिएटर कमान में बदल दिया था, जिससे उसकी निर्णय लेने की शक्ति काफी बढ़ गई थी. आजादी के बाद से भारत में यह सैन्य सुधार का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है. 

इस नए सेंटर के शुरू होने से न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि हथियारों, रसद और बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल भी अधिक समझदारी और कम खर्च में हो सकेगा. मई के अंत तक इस सेंटर के शुरू होते ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास युद्ध के लिए इतना आधुनिक और एकीकृत सिस्टम मौजूद है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement