भारतीय वायुसेना ने हिंडन एयरबेस पर वायुसेना दिवस की तैयारी का पूर्वाभ्यास किया. इसमें ब्रह्मोस मिसाइल, राफेल और आकाश मिसाइल नजर आए. 8 अक्टूबर को परेड होगी. इस साल का नारा है- भारतीय वायुसेना: अजेय, बिना गलती और सटीक. इस कार्यक्रम में वायुसेना ने अपनी ताकत दिखाई और बताया कि भारत में बनी चीजें कितनी अच्छी हैं.
पूर्वाभ्यास में कई लड़ाकू विमान खड़े दिखाए गए. राफेल, सु-30, तेजस और जगुआर विमान थे. राफेल फ्रांस का विमान है जो हवा और जमीन दोनों पर हमला कर सकता है. सु-30 रूस के साथ मिलकर बना भारी विमान है जो दूर तक उड़ सकता है. तेजस पूरा भारत में बना हल्का विमान है.
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जगुआर पुराना लेकिन अब भी काम का विमान है. साथ में एएलएच हेलीकॉप्टर भी थे जो लोगों को बचाने, सामान ले जाने और खास कामों में इस्तेमाल होते हैं. इनसे साफ पता चला कि वायुसेना के पास कई तरह के विमान हैं – कुछ बाहर के और कुछ अपने देश के.
मिसाइल और ड्रोन जैसे हथियार
आकाश मिसाइल और छोटे लॉइटरिंग म्यूनिशन भी दिखाए गए. आकाश भारत में बनी मिसाइल है जो दुश्मन के विमान और ड्रोन को गिरा सकती है. लॉइटरिंग म्यूनिशन बिना पायलट के लक्ष्य के ऊपर घूमकर वार करते हैं. ब्रह्मोस मिसाइल भी प्रमुख थी. यह बहुत तेज मिसाइल है जो जमीन और समुद्र दोनों पर मार करती है. इससे पता चलता है कि वायुसेना अब सिर्फ विमानों पर नहीं, बल्कि मिसाइल और बिना चालक वाले हथियारों पर भी जोर दे रही है. ज्यादातर चीजें भारत में ही बन रही हैं.
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महिलाओं की बटालियन और ड्रमर टीम
टीम शक्ति नाम की महिलाओं की टुकड़ी ने बंदूक के साथ ड्रिल दिखाई. इससे साफ हुआ कि महिलाएं भी सेना में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. 33 जवानों की ड्रमर टीम ने ड्रम बजाकर और कदम मिलाकर प्रदर्शन किया. पुराने टाइगर मोथ विमान भी उड़े जो पुराने जमाने की याद दिलाते हैं. नई और पुरानी दोनों चीजें एक साथ दिखीं.
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वायुसेना दिवस क्यों खास है
8 अक्टूबर को हिंडन में मुख्य परेड होगी. इस साल का विषय है कि वायुसेना दुश्मन के सामने नहीं हारती, कोई गलती नहीं करती और हर काम सही करती है. इस पूर्वाभ्यास से आम लोगों को भी पता चला कि हमारी वायुसेना कितनी तैयार है. सबसे अच्छी बात यह रही कि ज्यादातर चीजें भारत में बनी हैं.
तेजस विमान, आकाश मिसाइल और ब्रह्मोस – सब मेक इन इंडिया के तहत हैं. आजकल सिर्फ विमान काफी नहीं. हवा की रक्षा, सही निशाना लगाने वाले हथियार और ड्रोन भी जरूरी हैं. ये हथियार दुश्मन पर वार करते हैं और अपने जवानों का खतरा कम रखते हैं. वायुसेना देश की सीमा बचाने, आतंक रोकने और इलाके में शांति रखने में बड़ी भूमिका निभाती है.
पुराने विमान से लेकर नए राफेल और ब्रह्मोस तक का सफर वायुसेना की तरक्की दिखाता है. महिलाओं की भागीदारी अच्छी बात है. ड्रिल और ड्रम से अनुशासन और टीम भावना झलकती है.
कुल मिलाकर हिंडन का यह पूर्वाभ्यास वायुसेना की ताकत, अपने देश में बनी चीजों और भविष्य की तैयारी का अच्छा उदाहरण है. 8 अक्टूबर की परेड और भव्य होगी. यह सिर्फ उत्सव नहीं, देश की सुरक्षा का प्रदर्शन भी है. इससे हर भारतीय को गर्व होता है.
शिवानी शर्मा