गुरुग्राम पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए रोहित गोदारा और लिपिन नेहरा गैंग से कथित तौर पर जुड़े 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी गुरुग्राम समेत हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली-NCR में गंभीर वारदातों को अंजाम देने की तैयारी में थे. आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं. पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई कर रंगदारी और हत्या की संभावित वारदातों को टाल दिया गया.
गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच सोहना ने यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ अभियान के तहत की है. इस मामले में 18 अगस्त को भोंडसी थाने में BNS की धारा 111(3), 111(4) और 111(6) के तहत केस दर्ज किया गया था. पुलिस के अनुसार, गैंग के सक्रिय सदस्य अपने संपर्क में बने हुए थे और गंभीर आपराधिक गतिविधियों की साजिश रच रहे थे. इनमें रंगदारी वसूलने और हत्या जैसी वारदातों को अंजाम देने की कथित योजना भी शामिल थी.
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर पुराने विवाद और गैंगवार की रंजिश के चलते दूसरे गैंग से जुड़े दो लोगों की हत्या करने की तैयारी में थे. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए अवैध हथियारों का इंतजाम किया था. क्राइम ब्रांच की कार्रवाई से पहले ही पुलिस ने आरोपियों को दबोच लिया. अधिकारियों का कहना है कि इससे एक संभावित गंभीर आपराधिक वारदात को समय रहते रोका जा सका.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सलिम निवासी हरियाहेड़ा, सोहना गुरुग्राम, मोहित निवासी मंडक, टप्पल अलीगढ़, उत्तर प्रदेश, नरेंद्र उर्फ सोनू निवासी अलीपुर, सोहना गुरुग्राम, ललित निवासी रानीवास, कोटकासिम, अलवर राजस्थान, दयाराम निवासी भुडका, बिलासपुर गुरुग्राम और आर्यन उर्फ रितेश निवासी जटवाड़ा, सालावास, झज्जर के रूप में हुई है. पुलिस इन सभी आरोपियों से पूछताछ कर गैंग के दूसरे सदस्यों और उनके नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है.
पुलिस के मुताबिक, 19 अगस्त को क्राइम ब्रांच की टीम ने अलीपुर मोड़, भोंडसी इलाके से सलिम, मोहित, नरेंद्र उर्फ सोनू और ललित को गिरफ्तार किया था. पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर दयाराम को भी 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया. वहीं, इस मामले में आर्यन उर्फ रितेश की गिरफ्तारी 24 अगस्त 2026 को हरियाहेड़ा मोड़, भोंडसी से की गई.
आरोपियों के कब्जे से कुल 7 पिस्टल और एक राइफल बरामद होने की जानकारी पुलिस ने दी है. इनमें 4 विदेशी निर्मित पिस्टल शामिल हैं, जिनमें एक Zigana और तीन PX30 पिस्टल हैं. इसके अलावा 2 देसी पिस्टल, एक राइफल, 33 जिंदा कारतूस और 9 मैगजीन बरामद की गई हैं. पुलिस ने एक Scorpio गाड़ी भी जब्त की है और बरामद सामान की कुल अनुमानित कीमत करीब 40 लाख रुपये बताई गई है.
पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि गैंग के सदस्य विदेश में मौजूद अपने सहयोगियों और भारत में सक्रिय सदस्यों के संपर्क में रहते थे. इसके लिए सोशल मीडिया और दूसरे कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म का कथित तौर पर इस्तेमाल किया जाता था. पुलिस के अनुसार, गैंग में नए और पुराने अपराधियों को जोड़ा जाता था और उनके जरिए रंगदारी वसूली, हथियारों की खरीद और आपराधिक वारदातों को अंजाम देने की योजनाएं बनाई जाती थीं.
जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह भी पता चला कि रंगदारी से हासिल रकम का इस्तेमाल हथियार और कारतूस खरीदने के साथ-साथ गैंग के सदस्यों को पुलिस से बचाने और फरार रहने में मदद देने के लिए किया जाता था. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान हथियार सप्लायर और संभावित शूटर्स तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में नरेंद्र उर्फ सोनू के खिलाफ 21 मामले दर्ज हैं. सलिम के खिलाफ 10, मोहित के खिलाफ 2, आर्यन उर्फ रितेश के खिलाफ 4 और दयाराम के खिलाफ 5 मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है. इन मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी, लूट-डकैती, आपराधिक साजिश, धमकी और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं. आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की पुलिस अब विस्तार से जांच कर रही है.
गुरुग्राम पुलिस के मुताबिक, मामले में कार्रवाई अभी जारी है. क्राइम ब्रांच की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं, ताकि गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया जा सके. इसके साथ ही अवैध हथियार उपलब्ध कराने वाले सप्लायर, संभावित शूटर्स और रंगदारी नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है. पुलिस का कहना है कि संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.
अंशुल सिंह