Baramati Husband Buried Alive: हाल के वक्त में कई पति अपनी पत्नियों के हाथों मारे गए. लेकिन हम आपको जिस पति की कहानी आज आपको बताने जा रहे हैं, वो ऐसा इंजीनियर पति है, जो अपनी पत्नी के हाथों मारे जाने और कब्र तक पहुंचने के बावजूद जिंदा बचकर वापस आ गया. सुनने में ये बात थोड़ी अजीब लग सकती है, मगर ये सच है. महाराष्ट्र के बारामती की ये वो कहानी है, जिस पर कोई यकीन नहीं कर पा रहा है. एक पत्नी ने अपने पति का कत्ल किया और उसकी लाश को घर में दफनाने के लिए कब्र खोद डाली. लेकिन पति की सांसें थमने से पहले एक चमत्कार हुआ.
श्मशान और कब्रिस्तान. हर ज़िंदगी की आख़िरी मंजिल यही होती है. इंसानों के बनाए दस्तूर के मुताबिक मरने के बाद इन्हीं दो जगहों पर इंसानी सफर खत्म हो जाता है. आमतौर पर श्मशान या कब्रिस्तान इंसानी बस्तियों से कुछ दूर होते हैं. पर ज़रा सोचें अगर यही श्मशान या कब्रिस्तान हमारे आपके घरों में उतर आए तो क्या हो? ज़ाहिर है ना दस्तूर इसकी इजाज़त देता है ना धर्म या मज़हब.
मगर हमारे और आपके बीच ऐसे कुछ इंसान भी बसते हैं, जो श्मशान और कब्रिस्तान को उठाकर सीधे अपने घरों में ले आए. ये चंद तस्वीरें उसी की बानगी है. किसी के घर के बाथरूम से कोई कब्र बाहर निकली तो किसी के ड्राइंग रूम से. किसी कारखाने से कोई कब्र बाहर आई तो किसी बेडरूम से. यहां तक की ड्राइंग रूम तक में हमारे और आपके जैसे इंसानों ने अपने ही जैसे इंसान का अंतिम संस्कार कर डाला. घर के अंदर ही ज़िंदा जलाकर.
पता नहीं वो खुशी के आंसू थे या ग़म के. पर जो भी है वो एक पति के आंसू थे. एक ऐसे खुशनसीब पति के आंसू, जिसकी सांसें बस कुछ मिनटों की मेहमान थीं. जो लगभग कब्र में समा चुका था. पर ऐन मरने से पहले वो ज़िंदा बच गया. हाल के वक्त का शायद ये पहला ऐसा पति है, जिसने मौत के साथ-साथ अपनी पत्नी को भी चकमा दे दिया. ये बच गया इसलिए फिलहाल इसकी पत्नी को कातिल पत्नी नहीं कह सकते. अलबत्ता अधूरी कातिल ज़रूर कह सकते हैं. यानि हाफ मर्डरर. चलिए सिलसिलेवार पूरी कहानी बताते हैं.
महाराष्ट्र के बारामती शहर में इंद्रप्रस्थ सोसायटी है. उस सोसायटी की तीसरी मंजिल पर 9 नंबर का फ्लैट प्रवीण प्रकाश जगताप का है. उस फ्लैट में 41 साल का प्रवीण 38 साल की अपनी पत्नी शर्मिला जगताप, अपने दो बच्चों, मां-बाप और छोटे भाई के साथ रहता है. यानि वहां एक पूरा परिवार बसता है. यानि वहां इंसानों का घर है. अब चलिए आपको घर के अंदर की बात बताते हैं. घर में ड्राइंग रूम है. कमरे में सोफे पड़े हैं. कुर्सी है. टेबल है. और उसी ड्राइंग रूम के बाहर ये एक बालकनी है.
उस बालकनी की सबसे ख़ास चीज़ ये है कि पहली नज़र में उसे देखकर यही लगता है, जैसे बालकनी के किनारे दो-ढाई फ़ीट ऊंची दीवार खड़ी कर इस जगह का इस्तेमाल शायद पौधे उगाने के लिए या फिर घर के किसी और काम के लिए होना है. इस कच्ची दीवार के साथ ज़मीन पर ये मार्बल का एक बड़ा सा स्लैब पड़ा हुआ है. उस स्लैब को देखकर ऐसा लगता है, जैसे उस गड्ढे के ऊपर इसे रखा जाना था.
बस यही हम और आप गलत निकले. दरअसल, घर के अंदर मौजूद वो जगह कुछ और नहीं बल्कि एक अधूरी कब्र थी. एक ऐसी कब्र जिसमें एक अधूरे मुर्दे को लिटाया जा चुका था. उसके ऊपर चादर, तकिया सब रखे जा चुके थे. स्लैब भी लगभग रखा जा चुका था. वो तो ऐन वक्त पर हवा चली और अधूरी लाश के पैरों तले ज़रा सी चादर खिसक गई और इस तरह आंसुओं से रो रहा वो पति बस मरते-मरते बच गया.
मामला कुछ यूं था कि उस फ्लैट का मालिक प्रवीण प्रकाश जगताप पेशे से एक इंजीनियर है. पत्नी शर्मिला ने बी फार्मा की पढ़ाई की है. यानि शर्मिला दवाओं की जानकार है. बात 1 अगस्त की है. दोपहर का वक्त था. एक मुखबिर इलाके के पुलिस इंस्पेक्टर श्रीशैल चिवड शेट्टी को फ़ोन करता है. फोन पर बताता है कि इंद्रप्रस्थ सोसायटी के फ़्लैट नंबर 9 में जो तीसरी मंज़िल पर है, वहां एक शख्स ज़िंदा समाधि लेने की कोशिश कर रहा है. खबर मिलती ही पुलिस फौरन मौके पर पहुंच जाती है.
जब पुलिस फ़्लैट के अंदर दाख़िल होने की कोशिश कर रही थी, तब घर में मौजूद शर्मिला उन्हें देखकर अचानक घबरा जाती है. पुलिस ने शर्मिला से पूछा कि क्या यहां कोई ज़िंदा समाधि लेने की कोशिश कर रहा है. शर्मिला ने घबराते हुआ कहा कि ऐसा कुछ नहीं है. सब झूठ है. शर्मिला पुलिस को दरवाजे से ही लौटाना चाहती थी. पुलिस जब घर के अंदर दाखिल हुई तो पहले तो सब कुछ नॉर्मल दिखा. लेकिन जैसे ही पुलिस बालकनी में गई, हैरान रह गई. वहां दो ढाई फीट ऊंची बॉक्स जैसी जगह के अंदर तकिए और चादर पड़े हुए थे.
हांलाकि शर्मिला पुलिस को उलझाने की कोशिश कर रही थी लेकिन इंस्पेक्टर शेट्टी को जिस मुखबिर ने फ़ोन किया था, असल में उस मुखबिर को एक मजदूर ने फोन कर ये जानकारी दी थी कि घर में एक शख्स शायद जिंदा समाधि ले रहा है. हुआ ये था कि उसी मजदूर ने स्लैब रखते वक्त चादर हिलने की वजह से प्रवीण के पैर देख लिए थे. फिर 112 नंबर पर फ़ोन भी किया. तब पुलिस आई भी थी लेकिन शर्मिला ने उन्हें दरवाज़े से ही टरका दिया.
अभी पुलिस घर के अंदर अधूरी कब्र की पड़ताल कर ही रही थी कि तभी घर के एक कोने में उसे एक शख्स नज़र आया, जो ज़मीन पर गिरा हुआ था. शायद नींद बेहोशी की हालत में था. कपड़े फटे हुए थे. सिर से खून रिस रहा था. पुलिस ने जब शर्मिला से पूछा कि ये कौन है तब पता चला ये शर्मिला का पति प्रवीण प्रकाश जगताप है. जब प्रवीण के जख़्मी होने के बारे में पुलिस ने पूछा तो शर्मिला ने कहा कि मैंने ही इसे बैट से मारा है.
अब पुलिस घायल और नींद बेहोश प्रवीण को फ़ौरन पास के ही सिल्वर जुबली हॉस्पिटल ले जाती है. जहां धीरे-धीरे उसकी हालत सुधरती है. पर मामला कुछ ऐसा अनोखा था कि पुलिस अब भी शर्मिला को गिरफ्तार नहीं करती. वो घर पर ही थी. इस दौरान पुलिस मामले की जांच करती है. फिर प्रवीण के ठीक होने पर उसका बयान लेती है. और फिर 4 अगस्त को आख़िरकार शर्मिला को गिरफ्तार कर लेती है. इसके बाद प्रवीण और शर्मिला जो कहानी सुनाते हैं वो कहानी कुछ यूं है
जुलाई के आखिरी हफ्ते में शर्मिला अपने घर की इस बालकनी के कोने में दो से ढाई फीट ऊंची एक दीवार खड़ी करती है. गहराई और लंबाई इतनी थी कि एक आदमी इसमें आसानी से समा जाए. फिर 31 जुलाई की रात शर्मिला अपने पति के खाने में बेहोशी की दवा मिला देती है. साथ ही वही दवा सास को भी दे देती है. चुकी शर्मिला ने बी फार्मा किया हुआ था इसीलिए उसे दवाओं की पूरी जानकारी थी.
1 अगस्त की सुबह जब बच्चे और उसका देवर घर पर नहीं थे और जब प्रवीण बेहोशी के आलम में था तब उसने उसे घर में रखे बैट से सर पर कई बार मारा. शर्मिला को लगा कि प्रवीण मर चुका है. इसके बाद वो उसे घसीट कर इसी अधूरी कब्र में ले आई. प्रवीण को तकिए और चादर से ढक दिया. इरादा ये था कि इसके बाद इसके ऊपर मार्बल का ये स्लैब रखकर इसे हमेशा के लिए बंद कर देगी और इस तरह घर के अंदर ही प्रवीण की कब्र तैयार हो गई.
पर मसला तब आया जब शर्मिला से भारी स्लैब अकेले उठ नहीं पाया. तब उसने मजदूरों को बुलाने का फैसला किया. प्रवीण को मुर्दा समझ कर उसके ऊपर और ज्यादा चादर और तकिए रख दिए. दोपहर दो मजदूर घर में आते हैं. स्लैब को उठाकर अभी वो ऊपर रख ही रहे थी कि तभी हवा की वजह से चादर का एक सिरा सरक जाता है और मजदूर को एक इंसानी पैर दिखाई दे जाता है. ये देखते ही घबरा कर दोनों मजदूर बदहवास घर से भाग निकलते है. फिर उन्हीं में से एक 112 नंबर पर पुलिस को कॉल करता है.
ठीक होने के बाद प्रवीण ने आजतक को उस रात और उस अधूरी कब्र की कहानी सुनाई. प्रवीण ने बताया कि उसकी मां को भी बेहोशी की दवा दी गई थी. लेकिन शायद मेरे चीखने पर मेरी मां को कुछ होश आया. प्रवीण ने एक और अजीब बात बताई. उसने कहा कि उसके घर पर एक कैलेंडर टंगा है. जिस पर 13 और 14 जुलाई की तारीख़ के ख़ाने में नो रिज़ल्ट लिखा है. उसका कहना है कि इन्हीं तारीखों में अमावस्या भी थी. उसे लगता है कि ये किसी साजिश का हिस्सा है. उसका ये भी कहना है कि घर के अंदर एक बिल्कुल नई कुल्हाड़ी भी रखी थी.
हालांकि बारामती पुलिस के मुताबिक कैलेंडर की इन तारीखों या इसके पीछे की कुछ और वजहों का इससे कोई लेना देना नहीं है. पुलिस का ये भी कहना है कि प्रवीण को मारने के लिए कुल्हाड़ी का इस्तेमाल नहीं किया गया. प्रवीण का ये भी कहना है कि उसे बेहोश करने के लिए नींद की गोलियां दी गई थी. प्रवीण अपने दोनों बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परेशान है. उसने कहा कि उसके दोनों बच्चे इस वक्त शर्मिला के घर पर हैं.
फिलहाल, शुरुआती तफ्तीश के बाद पुलिस का कहना है कि शर्मिला ने अपने पति को इसलिए मारने की कोशिश की क्योंकि वो उसे नौकरी नहीं करने दे रहा था. साथ ही उसके साथ मारपीट भी किया करता था. पुलिस का ये भी कहना है कि शर्मिला डिप्रेशन में भी थी. उसे ये भी पता नहीं था कि पति को मारने के बाद क्या करें.
खैर शर्मिला इस वक्त बारामती पुलिस की कस्टडी में है. फिलहाल, एफआईआर में जो उसपर धारा लगाई गई है वो हत्या की कोशिश की है. यानि अधूरे क़त्ल या यूं कहें कि हाफ मर्डर की. पर इस कहानी का सबसे अजीब पहलू ये है कि बारामती में जैसे ही लोगों को घर के अंदर बनी इस अधूरी कब्र के बारे में पता चला लोग इस सोसायटी को देखने चले आए. इसी वजह से फिलहाल घर के लोग इस फ्लैट को बंद कर कहीं और चले गए हैं. अब वहां सिर्फ ताला लगा है. प्रवीण के आंसुओं का पता नहीं पत्नी के हाथों मिले जख्म के थे या फिर उसी पत्नी के हाथों मरते-मरते बच जाने के. सही बात ये है कि प्रवीण खुशनसीब पति था जो बच गया.
(बारामती से वसंत मोरे का इनपुट)
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