संगरूर में गुलजार सिंह की मौत पर बेटे का यू-टर्न... हरपाल चीमा पर FIR नहीं, SIT कर रही जांच, ये है पूरी कहानी

संगरूर सुसाइड केस में नया मोड़ आया है. गुलजार सिंह के बेटे लखविंदर सिंह ने सरकार की जांच पर संतोष जताया और किसी दबाव से इनकार किया. मामले में पांच लोगों पर FIR और चार सदस्यीय SIT जांच कर रही है. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में SIT की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG) इस मामले में SIT की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

कमलजीत संधू / कुलवीर सिंह

  • चंडीगढ़/संगरूर,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

संगरूर में 47 वर्षीय गुलजार सिंह की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है. जहरीला पदार्थ खाने के बाद जान गंवाने वाले गुलजार सिंह के बेटे लखविंदर सिंह ने अब सरकार की ओर से की जा रही जांच पर संतोष जताया है। उन्होंने साफ कहा है कि उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है और वह जांच से संतुष्ट हैं। इससे पहले परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम सामने आने के बाद यह मामला काफी गरमा गया था।

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गुलजार सिंह संगरूर जिले के दिड़बा विधानसभा क्षेत्र के तूर बंजारा गांव के रहने वाले थे. वह दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार चलाते थे और दलित समुदाय से ताल्लुक रखते थे. उनके तीन बेटे हैं, जिनमें से एक के 'चिट्टा' यानी सिंथेटिक ड्रग्स-हेरोइन की लत से जूझने की बात सामने आई थी. आरोप है कि गांव में एक विकास कार्यक्रम के दौरान गुलजार सिंह ने खुलेआम बिक रहे चिट्टे और अपने बेटे की नशे की समस्या का मुद्दा उठाया था.

पहले लगाए थे गंभीर आरोप, अब कहा- कार्रवाई हुई

गुलजार सिंह के जहरीला पदार्थ खाने के बाद उनके बेटे लखविंदर सिंह ने पहले हरपाल सिंह चीमा समेत कुछ लोगों पर सवाल उठाए थे. परिवार की तरफ से आरोप लगाया गया था कि नशे की बिक्री का मुद्दा उठाने के बाद गुलजार सिंह को कथित तौर पर परेशान किया गया और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं. परिवार का दावा था कि उन पर पंचायत के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का दबाव बनाया गया, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गए थे.

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हालांकि अब लखविंदर सिंह के बयान में बदलाव आया है. उन्होंने कहा है कि सरकार की जांच से वह संतुष्ट हैं और उन पर किसी तरह का दबाव नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात सामने आई थी, उन्हें गिरफ्तार किया गया है और जरूरी कानूनी कार्रवाई की गई है. परिवार और प्रशासन के बीच समझौता होने की बात भी सामने आई है, जिसमें एक भाई को सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव शामिल बताया जा रहा है.

क्या है पूरा मामला?

गुलजार सिंह 6 सितंबर को तूर बंजारा गांव में आयोजित विकास कार्यक्रम में पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में पंजाब के वित्त मंत्री और स्थानीय विधायक हरपाल सिंह चीमा भी मौजूद थे. आरोप है कि गुलजार सिंह ने मंत्री के सामने गांव में खुले तौर पर चिट्टा बिकने और अपने बेटे के नशे की लत का मुद्दा उठाया था. इसके बाद कथित तौर पर उन्हें वहां से हटाया गया या मामले को लेकर तत्काल प्रतिक्रिया हुई.

परिवार और समर्थकों का आरोप है कि इसके बाद पंचायत से जुड़े कुछ लोगों ने गुलजार सिंह पर दबाव बनाया. उनके साथ कथित तौर पर जातिसूचक गाली-गलौज की गई और पंचायत के सामने सार्वजनिक माफी मांगने के लिए बुलाया गया. परिवार का कहना है कि इस कथित अपमान और दबाव से गुलजार सिंह काफी आहत हुए और उन्होंने 7 सितंबर को जहरीला पदार्थ खा लिया.

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कई अस्पतालों में इलाज के बाद मौत

जहरीला पदार्थ खाने के बाद गुलजार सिंह को सबसे पहले संगरूर के सिविल अस्पताल ले जाया गया. वहां से उन्हें पटियाला के राजिंदरा अस्पताल रेफर किया गया. रिपोर्टों के मुताबिक ICU और वेंटिलेटर बेड की उपलब्धता को लेकर उन्हें आगे दूसरे अस्पताल में ले जाया गया. इसके बाद उन्हें संगरूर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और आखिर में लुधियाना के दयानंद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल यानी DMC/DMCH ले जाया गया.

गुलजार सिंह की हालत गंभीर बनी हुई थी और डॉक्टरों ने उनका इलाज किया. रिपोर्टों के मुताबिक 7 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. उनके जहरीला पदार्थ खाने के बाद सामने आए वीडियो और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों ने मामले को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी तूल दे दिया.

FIR में पांच नाम, चार गिरफ्तार

गुलजार सिंह की मौत के बाद 8 सितंबर को परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया. FIR में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है. इसके अलावा अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी SC/ST एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं. मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें गांव का सरपंच भी शामिल है.

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रिपोर्टों में आरोपियों के नाम बलजीत सिंह उर्फ बलजीत उर्फ राजू, सुखदेव सिंह उर्फ सुखा, विक्की सिंह, गोना सिंह और सरपंच बलजिंदर कौर/सिंह बताए गए हैं. अलग-अलग रिपोर्टों में कुछ नामों के उल्लेख में अंतर देखने को मिला है. शुरुआती अपडेट के मुताबिक चार आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है. हालांकि जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई SIT की जांच तथा उपलब्ध सबूतों के आधार पर होगी.

परिवार की मांग पर SIT का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब पुलिस ने चार सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT का गठन किया है. यह टीम पंजाब के ADGP स्तर के अधिकारी नौनिहाल सिंह की निगरानी में काम कर रही है. SIT के गठन की मांग गुलजार सिंह के परिवार की ओर से की गई थी. परिवार चाहता था कि मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच हो.

पुलिस की ओर से पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के दौरान भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. 8 सितंबर को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गुलजार सिंह का अंतिम संस्कार कराया गया. इस दौरान गांव में तनाव की स्थिति बनी रही और कुछ ग्रामीणों तथा रिश्तेदारों की ओर से विरोध की बात भी सामने आई.

वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद

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इस मामले ने उस समय और ज्यादा तूल पकड़ लिया जब गुलजार सिंह के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए. वीडियो में वह अपने साथ हुई कथित घटना, दबाव और धमकियों का जिक्र करते नजर आते हैं. उन्होंने कुछ लोगों को इसके लिए जिम्मेदार बताया था. एक वीडियो में उन्होंने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम लिया, जबकि दूसरे वीडियो में उनका नाम नहीं लिया गया.

वीडियो में अंतर को लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि दोनों वीडियो के अलग-अलग दावों की जांच जरूरी है. दूसरी तरफ परिवार और उसके समर्थक इन वीडियो को गुलजार सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों के तौर पर देख रहे हैं. SIT अब पूरे घटनाक्रम, बयानों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कर रही है.

FIR में नहीं हरपाल सिंह चीमा का नाम

इस मामले में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम FIR में आरोपी के तौर पर नहीं है. चीमा का कहना है कि उन्होंने गुलजार सिंह की शिकायत सुनी थी और नशे की बिक्री से जुड़े लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए थे. वहीं गांव के सरपंच पक्ष ने भी गुलजार सिंह को परेशान करने के आरोपों से इनकार किया है.

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सरपंच पक्ष का कहना है कि मंत्री और पंचायत ने गुलजार सिंह की बात धैर्यपूर्वक सुनी थी. उनकी नशे से जुड़ी शिकायत पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया था और उनके बेटे के इलाज में मदद की पेशकश भी की गई थी. इस तरह मामले में परिवार और आरोपी पक्ष के दावे एक-दूसरे से अलग हैं, जिनकी जांच अब SIT और पुलिस कर रही है.

NHRC और SC आयोग ने लिया संज्ञान

गुलजार सिंह की मौत का मामला अब मानवाधिकार और राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है. दोनों संस्थाओं की ओर से मामले को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है.

विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर पंजाब सरकार पर हमला तेज कर दिया है. BJP, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने मंत्री और मुख्यमंत्री से जुड़े सवाल उठाते हुए व्यापक जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है. वहीं आम आदमी पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अवसरवाद बताया है और कहा है कि सरकार नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है.

CM भगवंत मान का विपक्ष पर पलटवार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामले को लेकर विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि सरकार ने मामले में कार्रवाई की है और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार लगातार पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चला रही है और इस मुद्दे पर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी.

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AAP प्रवक्ता नील गर्ग ने भी पार्टी का पक्ष सामने रखा. उन्होंने कहा कि गुलजार सिंह ने मंत्री हरपाल चीमा की मौजूदगी में नशे का मुद्दा उठाया था और मंत्री ने तुरंत संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे. उनका कहना है कि बाद में जिन लोगों के खिलाफ शिकायत की गई थी, उन्हीं के दबाव में आत्महत्या किए जाने की बात सामने आई, लेकिन विपक्ष इस मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है.

राहुल गांधी ने उठाया नशे का मुद्दा

इस मामले को लेकर विपक्ष ने आम आदमी पार्टी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पंजाब में नशे के मुद्दे पर AAP सरकार से सवाल किए और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को हटाने की मांग की. कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में नशे की समस्या गंभीर है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए.

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने भी पंजाब के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए. BJP कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया और मामले की व्यापक जांच की मांग की. शिरोमणि अकाली दल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है.

6 से 9 सितंबर तक ऐसे बदला पूरा घटनाक्रम

6 सितंबर 2026 को हरपाल सिंह चीमा विकास कार्यक्रम के सिलसिले में तूर बंजारा गांव पहुंचे. इसी दौरान गुलजार सिंह ने कथित तौर पर उनके सामने खुले में चिट्टा बिकने और अपने बेटे की नशे की समस्या का मुद्दा उठाया. इसके बाद परिवार के अनुसार पंचायत से जुड़े लोगों की ओर से दबाव और कथित जातिसूचक दुर्व्यवहार का सिलसिला शुरू हुआ.

7 सितंबर को गुलजार सिंह ने जहरीला पदार्थ खा लिया. उन्हें कई अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया गया और आखिर में लुधियाना के DMC अस्पताल में भर्ती कराया गया. उसी रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. 8 सितंबर को पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की. गुलजार सिंह के शव का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार भारी सुरक्षा बढ़ाई और परिवार की मांग पर चार सदस्यीय SIT गठित की गई.

9 सितंबर तक मामले में जांच जारी है. चार आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है, जबकि आगे की गिरफ्तारी और कार्रवाई को लेकर SIT की जांच का इंतजार है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अलग-अलग बयानों और वायरल वीडियो की जांच भी मामले में अहम मानी जा रही है. फिलहाल, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को लेकर किसी अतिरिक्त चार्ज या नई FIR में नाम शामिल किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है.

अब SIT की जांच पर टिकी नजर

संगरूर का यह मामला अब कई स्तरों पर जांच के दायरे में है. एक तरफ पुलिस FIR में नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, वहीं SIT पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. दूसरी तरफ NHRC और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के संज्ञान के कारण मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है.

सबसे अहम बात यह है कि गुलजार सिंह के बेटे लखविंदर सिंह ने अब सरकार की जांच पर भरोसा जताते हुए किसी दबाव से इनकार किया है. हालांकि शुरुआती आरोप, वायरल वीडियो, FIR और अलग-अलग पक्षों के बयान रिकॉर्ड का हिस्सा हैं. ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सभी संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

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