युवराज की मौत, 3000 करोड़ बकाया और बिल्डर–प्राधिकरण की लापरवाही... नोएडा हादसे के पीछे की पूरी कहानी

नोएडा सेक्टर-150 में 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. जिसके मुताबिक, FIR में नामजद बिल्डर पर 3000 करोड़ का बकाया है. लगातार शिकायतों के बावजूद नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही भी सामने आई है. अब इस मामले की जांच में CBI-ED की एंट्री भी हो गई है.

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इस हादसे ने नोएडा प्रशासन की पोल खोलकर रख दी (फोटो-ITG) इस हादसे ने नोएडा प्रशासन की पोल खोलकर रख दी (फोटो-ITG)

अरविंद ओझा

  • नोएडा,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:18 PM IST

नोएडा के सेक्टर-150 में रहने वाले 27 साल के होनहार इंजीनियर युवराज की मौत का मामला नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर कंपनियों की गंभीर लापरवाही की मिसाल बन चुका है. FIR में नामजद दोनों बिल्डर कंपनियों पर नोएडा प्राधिकरण का करीब 3000 करोड़ रुपये का बकाया बताया जा रहा है. सवाल यह है कि जब प्राधिकरण अपना बकाया तक नहीं वसूल पाया, तो इलाके की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करता? इसी लापरवाही का खामियाजा एक निर्दोष युवक को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा.

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प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल
जानकारी के मुताबिक, जिन बिल्डर कंपनियों के प्लॉट के पास हादसा हुआ, उन पर नोएडा प्राधिकरण का भारी बकाया है. इसके बावजूद न तो बकाया वसूला गया और न ही साइट पर न्यूनतम सुरक्षा इंतजाम कराए गए. खुले नाले, पानी से भरे प्लॉट और बिना बैरिकेडिंग के सड़कें मौत का जाल बनी रहीं. प्राधिकरण की यह चूक सीधे तौर पर सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है.

अलॉटमेंट और स्पोर्ट्स सिटी का खेल
7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर को स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर जमीन अलॉट की गई थी. आरोप है कि जिस जमीन का इस्तेमाल खेलों के बुनियादी ढांचे के लिए होना था, उसे बिल्डर कंपनी ने अलग-अलग लोगों को बेच दिया. यह मामला सिर्फ नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी का भी संकेत देता है. इसी वजह से अब इस प्रकरण में CBI और ED भी जांच कर रही हैं.

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सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी
नोएडा प्राधिकरण अपने पैसे की वसूली नहीं कर पाया और न ही मौके पर सुरक्षा उपकरण लगवा सका. न बैरिकेड्स, न रिफ्लेक्टर और न ही चेतावनी बोर्ड. अंधेरे और कोहरे में यह इलाका पूरी तरह असुरक्षित था. इसी लापरवाही के कारण युवराज की जान चली गई. यह हादसा बताता है कि सिस्टम की उदासीनता कैसे जानलेवा साबित हो सकती है.

ACEO सतीश पाल का दावा
नोएडा प्राधिकरण के ACEO सतीश पाल ने कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है. उन्होंने बताया कि एक जूनियर इंजीनियर को हटा दिया गया है. उनका कहना है कि कहां और कैसे चूक हुई, यह जांच के बाद ही साफ होगा. साथ ही यह भी कहा गया कि बिल्डर का बकाया वसूली से जुड़ा मामला पहले से चल रहा है. हालांकि, यह बयान लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए काफी नहीं दिख रहा.

निवासियों की अनसुनी
सेक्टर-150 के निवासियों ने समय-समय पर प्राधिकरण को लिखित शिकायतें दी थीं. इन शिकायतों में स्पीड ब्रेकर बनवाने, रिफ्लेक्टर लगवाने, खुले नाले बंद कराने, पानी से भरे प्लॉट साफ कराने, सफाई और स्ट्रीट लाइट की मांग की गई थी. लोगों ने चेताया था कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो बड़ा हादसा हो सकता है. लेकिन इन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया.

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विधायक और सांसद के पत्र भी बेअसर
स्थानीय लोगों की मांग पर दादरी विधायक तेजपाल नागर और सांसद महेश शर्मा ने भी नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखा था. इन पत्रों में सेक्टर-150 की खराब ट्रैफिक व्यवस्था और सुरक्षा खामियों का जिक्र था. इसके बावजूद प्राधिकरण की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. यह दर्शाता है कि जनप्रतिनिधियों की सिफारिशें भी सिस्टम को जगाने में नाकाम रहीं.

IGRS पोर्टल पर शिकायत
मामले को लेकर IGRS पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी. पोर्टल की शिकायत पर वर्ग सर्किल-10 ने नोएडा प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल को जिम्मेदार बताकर पल्ला झाड़ लिया. इस आपसी जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति ने हालात और बिगाड़ दिए. नतीजा यह हुआ कि शिकायतें फाइलों में दबी रहीं और जमीन पर कुछ नहीं बदला.

ट्रैफिक सेल और अफसरों पर सवाल
अब नोएडा प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल और संबंधित अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है. लगातार शिकायतें मिलने के बावजूद कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? क्या यह लापरवाही थी या जानबूझकर की गई अनदेखी? इन्हीं सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियां तलाश रही हैं. CBI और ED की एंट्री से मामला और गंभीर हो गया है.

लिखित सबूत और सिस्टम की जवाबदेही
आज तक/इंडिया टुडे के पास सेक्टर-150 से जुड़ी लिखित शिकायतों की कॉपी मौजूद है. ये दस्तावेज साबित करते हैं कि हादसे से पहले ही खतरे की आशंका जताई जा चुकी थी. इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब युवराज की मौत ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है. सवाल यही है कि क्या इस बार सिर्फ बयानबाजी होगी या सच में जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होगी?

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