प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 336 करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है. इस मामले में एक डच नागरिक से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है. जांच एजेंसी ने बेंगलुरु समेत कई ठिकानों पर छापेमारी कर अहम सबूत जुटाए हैं. ED का दावा है कि इस घोटाले का मास्टरमाइंड बेंगलुरु का रहने वाला रविंद्र के. है और उसने विदेशी निवेशकों को भी इसी तरह निशाना बनाया.
ED के मुताबिक यह मामला दक्षिण अंडमान के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर सामने आया. एफआईआर एक डच नागरिक की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें बड़े पैमाने पर क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था. इसी एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की. जांच के दौरान एजेंसी ने पूरे लेनदेन और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की.
ED ने बताया कि आरोपी निवेशकों से करोड़ों डॉलर का निवेश लेने के बाद उन्हें तय समय पर डिजिटल टोकन उपलब्ध नहीं कराए. आरोप है कि जैसे ही बाजार में इन टोकनों की कीमत बढ़ी, आरोपियों ने निवेशकों को टोकन देना बंद कर दिया और वादा पूरा नहीं किया. जांच एजेंसी के अनुसार इस कथित घोटाले की कुल रकम करीब 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 336 करोड़ रुपये है. यह रकम पुलिस एफआईआर में बताए गए 10 मिलियन डॉलर से कहीं अधिक है.
जांच में सामने आया कि यह कथित धोखाधड़ी ओवर-द-काउंटर (OTC) क्रिप्टो ट्रेडिंग के जरिए की गई. जिन डिजिटल टोकन में निवेश कराया गया, उनमें MultiverseX, Kava, BEAM, GRASS, SUI, VANA और AGLD समेत कई अन्य क्रिप्टो एसेट शामिल थे. ED की बेंगलुरु इकाई ने 18 और 19 जुलाई को इस मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की. जांच के दौरान निवेश और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन से जुड़े कई अहम डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले गए.
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि शुरुआती जांच में निवेश की रकम बेंगलुरु के रहने वाले रविंद्र के. तक पहुंचने के सबूत मिले हैं. एजेंसी ने उसे इस कथित फ्रॉड का मास्टरमाइंड बताया है. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने सिर्फ डच नागरिक ही नहीं, बल्कि कई अन्य विदेशी निवेशकों को भी इसी तरह ठगी का शिकार बनाया. हालांकि उन विदेशी निवेशकों ने अभी तक भारत में कोई आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है.
ED की छापेमारी के दौरान एजेंसी ने करीब 87,000 USDT (टेदर) क्रिप्टोकरेंसी भी जब्त की है. जांच एजेंसी अब जब्त किए गए डिजिटल एसेट, बैंक खातों और क्रिप्टो वॉलेट्स की फॉरेंसिक जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और अन्य पीड़ित विदेशी निवेशकों की जानकारी भी सामने आ सकती है.
aajtak.in