दिल्ली पुलिस ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस के मुताबिक यह गैंग लाखों रुपये लेकर अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा पास कराने का दावा करता था. इस मामले में पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.
इस मामले की शुरुआत 26 मई को हुई थी, जब केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की भर्ती परीक्षा के दौरान दो अभ्यर्थियों को नकल करते हुए पकड़ा गया. यह परीक्षा एलडीसी (LDC) के 6 पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 200 उम्मीदवार शामिल हुए थे. परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई. इसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे हाईटेक नकल नेटवर्क का खुलासा हो गया.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस गैंग का मास्टरमाइंड सोनू कुमार है, जो खुद चंडीगढ़ के एक सरकारी विभाग में वर्ष 2022 से फायरमैन के पद पर कार्यरत है. पुलिस के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यही रही कि सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति ही दूसरे लोगों को गैरकानूनी तरीके से सरकारी नौकरी दिलाने के नेटवर्क का संचालन कर रहा था. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि उसने अब तक कितनी परीक्षाओं में सेंध लगाई और कितने लोगों को इस तरीके से फायदा पहुंचाया.
पुलिस ने इस मामले में हेमंत शर्मा, रमेश कुमार, रिंकू शर्मा, वेदप्रकाश, अक्षय, सनी, दीपक और मास्टरमाइंड सोनू कुमार को गिरफ्तार किया है. जांच में पता चला कि इस नेटवर्क में कुछ आरोपी खुद प्रतियोगी परीक्षाओं के उम्मीदवार थे, जबकि अन्य लोग एजेंट के रूप में काम करते थे. ये एजेंट नौकरी पाने के इच्छुक अभ्यर्थियों से संपर्क करते और उन्हें परीक्षा पास कराने का भरोसा देकर गिरोह से जोड़ते थे.
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह सरकारी विभागों और विभिन्न संस्थानों में निकलने वाली भर्तियों पर लगातार नजर रखता था. भर्ती की जानकारी मिलते ही गैंग नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों तक पहुंच जाता था. इसके बाद परीक्षा पास कराने के बदले प्रति उम्मीदवार 8 से 12 लाख रुपये तक की डील होती थी. पुलिस के अनुसार गिरोह खासतौर पर उन भर्तियों को निशाना बनाता था, जिनमें लिखित परीक्षा के बाद स्किल टेस्ट भी आयोजित होता था.
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बेहद आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करता था. उम्मीदवारों की शर्ट के बटन के पास बेहद छोटा और छिपा हुआ कैमरा लगाया जाता था, जो बाहर से आसानी से दिखाई नहीं देता था. परीक्षा के दौरान यही कैमरा प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर बैठे गैंग के सदस्यों तक भेज देता था. इसके बाद सवालों के जवाब तकनीकी माध्यम से उम्मीदवार के कान में लगे नैनो ईयरबड तक पहुंचाए जाते थे, जिससे वह बिना पकड़े उत्तर लिख सके.
पुलिस के मुताबिक गिरोह के पास ऐसे मोबाइल फोन और विशेष एंड्रॉयड एप्लिकेशन थे, जिनकी मदद से मोबाइल की स्क्रीन बंद रहने पर भी कैमरे को नियंत्रित किया जा सकता था. गैंग GSM डिवाइस, छिपे हुए कैमरे और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए पूरी प्रक्रिया संचालित करता था. इस तकनीक का उद्देश्य परीक्षा केंद्र के भीतर किसी भी तरह का संदेह पैदा किए बिना प्रश्नपत्र बाहर भेजना और जवाब वापस उम्मीदवार तक पहुंचाना था.
दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 4 GSM डिवाइस, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, एक टैबलेट और एक टाटा नेक्सॉन कार बरामद की है. सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस को उम्मीद है कि इन डिवाइसों से गैंग के अन्य सदस्यों, उम्मीदवारों और पुराने मामलों से जुड़े अहम डिजिटल सबूत मिल सकते हैं.
प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि अब तक 10 से 12 उम्मीदवार इस गिरोह की मदद से परीक्षाओं में फायदा लेने की कोशिश कर चुके हैं. हालांकि जांच अधिकारियों का मानना है कि यह संख्या आगे बढ़ सकती है. पुलिस सभी अभ्यर्थियों की पहचान करने और यह पता लगाने में जुटी है कि किन-किन सरकारी भर्तियों में इस नेटवर्क ने सेंध लगाई थी.
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के संपर्क अन्य राज्यों तक भी फैले होने की आशंका है. पुलिस की एक विशेष टीम दूसरे राज्यों में मौजूद आरोपियों के सहयोगियों और संपर्क सूत्रों की तलाश कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. पुलिस अब जब्त मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल डेटा की गहन जांच कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की कोशिश कर रही है.
अंशुल सिंह