बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2022 में कोर्ट परिसर के अंदर अपनी अलग रह रही पत्नी की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी पूर्व सैनिक दीपक पांडुरंग धवले को जमानत दे दी है. जस्टिस मिलिंद जाधव की बेंच ने आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह पिछले 4 साल 4 महीने से जेल में बंद है और मुकदमे की सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है.
कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि साल 2024 से मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इन परिस्थितियों और मुकदमे में लगने वाले संभावित समय को देखते हुए अदालत ने उसे जमानत देने का फैसला किया.
अदालत ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर कहा कि घटना के दौरान आरोपी का गुस्सा और नाराजगी मुख्य रूप से अपनी पत्नी के प्रति थी. कोर्ट परिसर में उस समय महिला के परिवार के सदस्य और उसकी दोनों बेटियां भी मौजूद थीं. कोर्ट ने गौर किया कि पत्नी पर गोली चलाने के बाद आरोपी ने अपने ससुराल वालों और बेटियों पर गोली नहीं चलाई, बल्कि बीच-बचाव करने वालों को धक्का दिया.
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी के भाई ने उसे दोनों बेटियों को मारने के लिए कहा था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और बेटियां अपनी जान बचाने के लिए कोर्ट की इमारत के अंदर भाग सकीं.
दीपक धवले और मंजुला की शादी साल 2005 में हुई थी. दोनों ठाणे जिले के अंबरनाथ इलाके में रहते थे, लेकिन शादी के करीब एक साल बाद ही उनके बीच विवाद शुरू हो गए थे. परिवार के सदस्यों के हस्तक्षेप से शुरुआती झगड़े सुलझा लिए गए थे. साल 2020 में दीपक ने सेना की नौकरी छोड़ दी और रायगढ़ जिले की एक निजी कंपनी में काम करने लगा.
इसी दौरान मंजुला ने उसके खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत की और घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू की.
यह घटना 7 जून 2022 की है, जब मंजुला घरेलू हिंसा मामले की सुनवाई के सिलसिले में अपने वकीलों से मिलने कोर्ट पहुंची थी. वह अपने परिवार के साथ कोर्ट परिसर में एक पेड़ की छाया में इंतजार कर रही थी. सुबह करीब 11:45 बजे दीपक अपने भाई के साथ वहां पहुंचा और मंजुला पर तीन राउंड गोली चलाई.
बीच-बचाव करने आए अपने ससुर को उसने लात मारी और सास के सिर पर पिस्तौल के बट से वार किया. घटना के बाद दीपक और उसका भाई मौके से भाग गए. मंजुला और उसकी मां को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन मंजुला की इलाज शुरू होने से पहले ही मौत हो गई.
दीपक की ओर से पेश वकील सत्यव्रत जोशी ने जमानत के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि आरोपी लंबे समय से जेल में बंद है और मुकदमे में कोई खास प्रगति नहीं हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि 2024 से मामले में आगे की कार्रवाई नहीं हुई और दीपक देश की सेवा करने के बाद सेना से रिटायर हुआ है.
हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता को भी ध्यान में रखा. बेंच ने कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं होने के कारण इसे पूरा होने में अभी लंबा समय लग सकता है. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने दीपक धवले की जमानत याचिका मंजूर कर ली.
विद्या