माफिया डॉन और पूर्व सांसद अतीक अहमद के परिवार का नाम एक बार फिर चर्चाओं में है. वजह है अतीक के बेटे आबान की सड़क दुर्घटना में मौत. जल्द ही उसे सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा. मगर इससे पहले भी अतीक का एक बेटा मारा गया था. उसकी मौत झांसी में ही एक पुलिस एनकाउंटर के दौरान हुई थी. हम बात कर रहे हैं अतीक अहमद के तीसरे बेटे असद अहमद की. आइए जानते हैं, कैसे हुआ था असद और उसके साथी का एनकाउंटर?
13 अप्रैल 2023 का दिन उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए बेहद अहम था. करीब डेढ़ महीने तक लगातार पीछा करने के बाद उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने झांसी में माफिया से नेता बने अतीक अहमद के तीसरे बेटे असद अहमद और उसके करीबी साथी गुलाम को मुठभेड़ में मार गिराया था. दोनों प्रयागराज के चर्चित उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में शामिल थे और लंबे समय से फरार चल रहे थे. दोनों पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था.
ऐसे शुरू हुई थी तलाश
24 फरवरी 2023 को प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में दिनदहाड़े अधिवक्ता उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनर संदीप निषाद, राघवेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उमेश पाल वर्ष 2005 के बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह थे. घटना के सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद असद अहमद की पहचान कथित शूटरों में हुई. इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या, साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया. और गिरफ्तारी के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया.
ऐसे बचता रहा असद
उमेश पाल हत्याकांड के बाद असद लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा. पुलिस के मुताबिक वह और उसका साथी गुलाम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में लगातार घूम रहे थे ताकि पुलिस उन्हें पकड़ न सके. यूपी एसटीएफ को कई बार उनके बारे में इनपुट मिले, लेकिन हर बार दोनों पुलिस के पहुंचने से पहले निकल जाते थे. एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने बाद में बताया था कि टीम करीब डेढ़ महीने से दोनों का लगातार पीछा कर रही थी और कई बार वे गिरफ्तारी से बाल-बाल बच निकले थे.
ऐसे शुरू हुआ था 'ऑपरेशन झांसी'
13 अप्रैल 2023 को एसटीएफ को पुख्ता सूचना मिली कि असद और गुलाम झांसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र में परीछा बांध के आसपास मौजूद हैं. पहले से जुटाई गई खुफिया जानकारी और स्थानीय इनपुट को मिलाकर एसटीएफ ने इलाके की घेराबंदी की. रिपोर्टों के अनुसार यह कोई अचानक हुई कार्रवाई नहीं थी, बल्कि कई दिनों की निगरानी और रणनीति के बाद चलाया गया ऑपरेशन था. पुलिस को पहले से अंदेशा था कि इलाके में अतीक गैंग के कुछ लोगों के ठिकाने मौजूद हैं, इसलिए टीम पहले से अलर्ट थी.
बचाव में फायरिंग
यूपी पुलिस के अनुसार दोपहर के समय एसटीएफ टीम ने बाइक पर जा रहे असद और गुलाम को रोकने की कोशिश की. पुलिस का कहना है कि दोनों ने सरेंडर करने के बजाय भागने का प्रयास किया और विदेशी हथियारों से पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद एसटीएफ ने जवाबी कार्रवाई की. पुलिस के मुताबिक दोनों ओर से कुछ समय तक गोलीबारी चली और आखिरकार असद अहमद अपने साथी गुलाम के साथ मुठभेड़ में मारा गया. इस कार्रवाई का नेतृत्व डिप्टी एसपी नवेंदु और डिप्टी एसपी विमल की टीम ने किया था.
मौके से क्या-क्या मिला?
एसटीएफ ने दावा किया कि मौका-ए-वारदात से विदेशी अत्याधुनिक पिस्टल, बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस, खोखे और वह मोटरसाइकिल बरामद की गई, जिसका इस्तेमाल दोनों कर रहे थे. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बरामद हथियार अत्याधुनिक थे और जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को सौंपे गए. बरामदगी को केस की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया.
उमेश पाल हत्याकांड का मुख्य आरोपी था गुलाम
असद के साथ मारा गया गुलाम भी उमेश पाल हत्याकांड का प्रमुख आरोपी था. पुलिस के अनुसार वह घटना के बाद से लगातार फरार था और उस पर भी पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था. जांच एजेंसियों का कहना था कि असद और गुलाम दोनों ने वारदात के बाद कई राज्यों में अपने ठिकाने बदले और पुलिस से बचने की कोशिश की. दोनों की मौत के बाद पुलिस ने इसे उमेश पाल हत्याकांड की जांच में बड़ी सफलता बताया.
कोर्ट में अतीक की पेशी
इत्तेफाक से 13 अप्रैल 2023 को ही अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को प्रयागराज की अदालत में पेश किया गया था. अदालत ने दोनों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया था. इसी दौरान झांसी एनकाउंटर की खबर अदालत और फिर अतीक तक पहुंची. बाद में मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि बेटे की मौत की सूचना मिलने पर अतीक भावुक हो गया था. एनकाउंटर की घटना के सिर्फ दो दिन बाद, 15 अप्रैल 2023 की रात प्रयागराज में पुलिस अभिरक्षा के दौरान अतीक अहमद और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
एनकाउंटर पर राजनीतिक बहस
असद और गुलाम के एनकाउंटर के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसटीएफ टीम की सराहना की थी. दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी. इस तरह झांसी एनकाउंटर सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी बहस का बड़ा मुद्दा बन गया था.
जांच में नया मोड़
जांच एजेंसियों के अनुसार असद और गुलाम की मौत के बाद उमेश पाल हत्याकांड की जांच का फोकस अन्य फरार आरोपियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक नेटवर्क पर चला गया. इसके बाद भी कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जबकि कुछ आरोपी लंबे समय तक फरार रहे. पुलिस का कहना था कि असद और गुलाम के एनकाउंटर ने अतीक गैंग की सक्रियता पर बड़ा असर डाला और मामले की जांच को निर्णायक दिशा मिली.
परवेज़ सागर