सोशल मीडिया से एडमिशन के नाम पर ठगी, पुणे में दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 10 इंजीनियर गिरफ्तार

पवई पुलिस ने सोशल मीडिया पर एडमिशन का विज्ञापन देकर छात्रों और अभिभावकों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुणे के दो फर्जी कॉल सेंटर से 10 इंजीनियर गिरफ्तार किए गए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG) इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:11 PM IST

मुंबई की पवई पुलिस ने देश के नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने पुणे के वडगांव शेरी-लोहगांव और खराड़ी इलाके में चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. 

हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार सभी आरोपी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं और इनमें पांच B.Tech इंजीनियर हैं. पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है. यह गिरोह इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एडमिशन से जुड़े विज्ञापन देकर छात्रों और अभिभावकों को अपने जाल में फंसाता था.

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पुलिस के मुताबिक आरोपी सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन की तलाश कर रहे छात्रों और उनके माता-पिता के मोबाइल नंबर और दूसरी जानकारी जुटाते थे. इसके बाद फर्जी नाम और पहचान के जरिए संपर्क कर उन्हें प्रतिष्ठित कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का भरोसा दिया जाता था. 

आरोपी खास तौर पर मैनेजमेंट कोटा और एनआरआई कोटा में सीट दिलाने का दावा करते थे और PICT, NSUT, DTU, IIIT Hyderabad समेत कई नामी संस्थानों का नाम इस्तेमाल करते थे. ठगी का तरीका भी बेहद शातिर था। पहले प्रोसेसिंग फीस ली जाती और फिर एडमिशन के अलग-अलग चरण बताकर लगातार रकम वसूली जाती. कुछ मामलों में पीड़ितों को कॉलेज कैंपस तक ले जाकर भरोसा दिलाया जाता था और आरोपी खुद अधिकारियों से मीटिंग के बहाने अंदर चले जाते थे.

पवई इलाके की एक महिला से उसके बेटे को IIIT Hyderabad में एडमिशन दिलाने के नाम पर करीब 16.50 लाख रुपये ठगे गए. पुलिस के अनुसार यह रकम एक बार में नहीं, बल्कि एडमिशन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में ली गई और आखिरी भुगतान जुलाई के अंत में कराया गया. शुरुआती जांच में पुलिस को शक है कि मार्च के पहले सप्ताह से जुलाई के अंत तक करीब 30 से 35 छात्र और अभिभावक इस गिरोह के शिकार हुए. 

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पुलिस को संभावित पीड़ितों के मोबाइल नंबरों की एक सूची भी मिली है और अब इन नंबरों तथा आरोपियों के बैंक खातों का विश्लेषण किया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि गिरोह कम से कम 2024 से सक्रिय था और मुंबई, नागपुर, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में दर्ज छह मामलों से इसका कनेक्शन सामने आया है.

पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह हर एडमिशन सीजन में अलग जगह फर्जी कॉल सेंटर खोलता था और नए मोबाइल नंबर व SIM कार्ड इस्तेमाल करता था. एडमिशन प्रक्रिया खत्म होने या कॉलेजों की अंतिम सूची जारी होने से पहले आरोपी मोबाइल और सिम बंद कर फरार हो जाते थे और अगले सीजन में नया सेटअप शुरू कर देते थे. 

करीब एक महीने की तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के बाद पुलिस ने नकली कस्टमर बनकर आरोपियों से संपर्क किया और फिर 14 अगस्त को पुणे में कार्रवाई की. Neon Homes और City Vista स्थित दोनों कॉल सेंटर से 22 मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, JioBook, डेबिट कार्ड, 23 SIM कार्ड और कॉलेजों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए. BMW, Jaguar और Ciaz समेत वाहन भी जब्त किए गए हैं. 

पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम नकद, ATM और POS मशीनों के जरिए निकाली जाती थी और Cryptocurrency में निवेश किए जाने की बात भी सामने आई है. गिरफ्तार 10 आरोपियों को 15 अगस्त को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 20 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. 

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अब पुलिस फर्जी SIM और बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों, सोशल मीडिया विज्ञापन चलाने वालों और संभावित कॉलेज कनेक्शन की जांच कर रही है. कुछ और ठिकानों की जानकारी भी पुलिस को मिली है, जहां आने वाले दिनों में छापेमारी हो सकती है.

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