गुजरात की अमरेली पुलिस ने डिजिटल निवेश के नाम पर चलाए जा रहे 1211 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है. आरोप है कि ठगों ने 'SD Pay' नाम से एक डिजिटल वॉलेट ऐप बनाकर देशभर में लोगों को अपने जाल में फंसाया. इस ऐप के जरिए मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) का नेटवर्क तैयार किया गया और हर महीने 9 फीसदी कैशबैक देने का लालच दिया गया. पुलिस की करीब दो महीने तक चली जांच में सामने आया है कि गुजरात समेत देशभर के 6.52 लाख से ज्यादा लोग इस कथित धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं. अब तक इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
अमरेली पुलिस ने शुरुआत में इस घोटाले का आकार करीब 635 करोड़ रुपये और पीड़ितों की संख्या लगभग 3.15 लाख आंकी थी. हालांकि, जांच के दौरान आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सिस्टम का पासवर्ड तोड़कर पुलिस को महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा मिला. इसके विश्लेषण के बाद घोटाले का दायरा पहले के अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा निकला. पुलिस के मुताबिक, अब तक 6.52 लाख से अधिक लोगों के इस नेटवर्क से जुड़ने और करीब 1211 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी सामने आई है.
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि SD Pay ऐप को करीब 15 लाख बार डाउनलोड किया गया था. इनमें से 6.52 लाख से ज्यादा लोगों ने इस प्लेटफॉर्म पर निवेश किया था. अमरेली के एसपी के मुताबिक, अब तक करीब 900 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. मामले से जुड़ी शिकायतों का आंकड़ा 800 से ज्यादा बताया गया है, जबकि 1930 पर शिकायतें दर्ज होने का भी जिक्र सामने आया है. इस पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है, जो आरोपियों, निवेशकों और पैसों के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है.
पुलिस के मुताबिक, SD Pay घोटाले को एक डिजिटल वॉलेट ऐप के रूप में पेश किया गया था, जबकि इसके पीछे कथित तौर पर मल्टी-लेवल मार्केटिंग की योजना काम कर रही थी. लोगों को बताया जाता था कि उनके डिजिटल वॉलेट में जमा रकम पर हर महीने 9 फीसदी कैशबैक मिलेगा. इस आकर्षक रिटर्न के लालच में बड़ी संख्या में लोग ऐप से जुड़ते चले गए. इसके लिए 15 स्तरों वाला रेफरल नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसमें पहले से जुड़े निवेशक नए लोगों को जोड़ते थे.
इस नेटवर्क में नए निवेशकों से आने वाली रकम के जरिए पुराने निवेशकों को भुगतान किए जाने का आरोप है. शुरुआत में लोगों को रिटर्न और रेफरल कैशबैक मिलता रहा, जिससे ऐप पर उनका भरोसा बढ़ता गया. लेकिन जब बड़ी संख्या में लोग इस नेटवर्क से जुड़ गए, तो आरोपियों ने कथित तौर पर पैसे निकालने की सुविधा बंद कर दी. पुलिस को शक है कि निवेशकों की रकम शेल कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई. अब जांच एजेंसियां इन खातों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही हैं.
शुरुआत में पुलिस को लगा था कि SD Pay का नेटवर्क मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र तक सीमित है. लेकिन जांच आगे बढ़ने पर इसके तार कर्नाटक, बिहार और उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों से भी जुड़ते दिखाई दिए. पुलिस अब 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैले इस नेटवर्क के कामकाज की जांच कर रही है. इसमें निवेशकों की पहचान, रेफरल के जरिए लोगों को जोड़ने वाले सदस्यों और रकम के ट्रांसफर की जानकारी जुटाई जा रही है.
अमरेली पुलिस की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी धवल पटेल और नरेंद्र सोलंकी ने अपना कारोबार महाराष्ट्र में शिफ्ट कर दिया था. वहां कथित तौर पर 'अपना पे' (Apna Pay) नाम से कामकाज शुरू किया गया. इस नेटवर्क की जिम्मेदारी नरेंद्र कांग्रे को सौंपे जाने की बात सामने आई है. पुलिस ने उसे भी आरोपी बनाया है, लेकिन वह अभी फरार बताया जा रहा है. उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है और उसे नो-फ्लाई लिस्ट में भी डाला गया है.
इस कथित घोटाले में पुलिस अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें मुख्य आरोपी धवल पटेल और नरेंद्र सोलंकी के अलावा संतोष पाठक भी शामिल हैं. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क को किस तरह संचालित किया गया और निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां-कहां भेजी गई. जांच में नरेंद्र सोलंकी के पुराने कामकाज की जानकारी भी सामने आई है. बताया गया है कि वह पहले एक UPI आधारित कंपनी में कर्मचारी के तौर पर काम कर चुका है.
पुलिस अब इस मामले में डिजिटल सबूतों, बैंक खातों, शेल कंपनियों और रेफरल नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. अधिकारियों का मकसद इस पूरे नेटवर्क के पीछे काम कर रहे लोगों और कथित तौर पर ठगी गई रकम का पता लगाना है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अलग-अलग राज्यों में कितने लोगों ने इस ऐप के जरिए पैसा लगाया था.
इस पूरे मामले में वडोदरा की एक महिला शिक्षिका की कहानी भी सामने आई है. वह अकेले अपने कॉलेज में पढ़ने वाले बेटे की परवरिश कर रही हैं. साल 2025 में उन्होंने अपना एक BHK फ्लैट बेच दिया और उससे मिले 9.5 लाख रुपये SD Pay ऐप में निवेश कर दिए. शुरुआत में उन्हें निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलने लगा. इससे उनका भरोसा बढ़ा और उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर इस ऐप से होने वाली कमाई की जानकारी भी दी.
महिला की पोस्ट देखने के बाद उनके परिचित और परिवार के दूसरे सदस्य भी SD Pay से जुड़ने लगे. उनके माध्यम से परिवार के 11 सदस्यों और 20 सहयोगियों समेत कुल 31 लोगों ने इस ऐप में निवेश किया. इनमें उनकी विधवा बहन, 70 साल से ज्यादा उम्र की मां और भाई भी शामिल थे. महिला के मुताबिक, उनके संपर्क और रेफरल नेटवर्क के जरिए करीब 800 लोग इस योजना से जुड़ गए थे. इस तरह एक महिला के भरोसे के आधार पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी बचत इस ऐप में लगा दी.
महिला के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें ब्याज और रेफरल कैशबैक के रूप में हर दिन 25 हजार रुपये तक मिलते थे. इससे उन्हें लगने लगा कि उनका निवेश सुरक्षित है और ऐप के जरिए अच्छी कमाई की जा सकती है. साल 2026 के मध्य तक उनके डिजिटल वॉलेट में 50 लाख रुपये का बैलेंस दिखाई देने लगा था. हालांकि, यह रकम केवल ऐप की स्क्रीन पर ही नजर आ रही थी. ऐप बंद होने के बाद वह अपने पैसे निकालने में असमर्थ हो गईं.
महिला ने पुलिस को बताया कि शुरुआत में उन्होंने इस योजना में पैसा लगाने से इनकार कर दिया था. लेकिन ऐप से जुड़े लोगों ने उन्हें भरोसा दिलाने के लिए एस्क्रो वॉलेट और कुछ दस्तावेज दिखाए थे. इतना ही नहीं, एक व्यक्ति ने उन्हें हस्ताक्षर किया हुआ खाली चेक भी दिया था. उससे कहा गया था कि अगर उन्हें निवेश पर भरोसा नहीं है, तो वह कभी भी अपनी रकम वापस निकाल सकती हैं. इन बातों से आश्वस्त होकर उन्होंने फ्लैट बेचकर मिले पैसे निवेश कर दिए.
महिला के मुताबिक, उनके जरिए जुड़े परिचितों ने कुल मिलाकर करीब 42 लाख रुपये का निवेश किया था. इसमें परिवार के सदस्य भी शामिल थे. जब ऐप पर कमाई और कैशबैक लगातार दिखाई देता रहा, तो नेटवर्क से और लोग जुड़ते गए. लेकिन बाद में निकासी बंद होने से महिला और उनके जरिए निवेश करने वाले दूसरे लोग भी अपनी रकम वापस नहीं निकाल पाए.
पुलिस के मुताबिक, मार्च 2026 तक इस योजना में नए निवेश के रूप में आने वाली रकम कम होने लगी थी. नए निवेशकों की संख्या घटने से पुराने निवेशकों को ब्याज और कैशबैक का भुगतान करना मुश्किल हो गया. इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर निवेशकों को पैसे लौटाने के बजाय कंपनी के शेयर देने शुरू कर दिए. निवेशकों को बताया गया कि कंपनी जल्द ही अपना IPO लाने वाली है. साथ ही दावा किया गया कि स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग होने के बाद इन शेयरों की कीमत बढ़ जाएगी.
इस तरह निवेशकों को उनकी रकम वापस मिलने के बजाय कंपनी के शेयरों के जरिए भविष्य में मुनाफे का भरोसा दिया गया. हालांकि, ऐप में दिखाई देने वाले बैलेंस और वास्तविक निकासी के बीच अंतर सामने आने के बाद लोगों की परेशानी बढ़ गई. अब अमरेली पुलिस इस पूरे कथित नेटवर्क, निवेशकों से जुटाई गई रकम और आरोपियों के वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है.
ब्रिजेश दोशी