पाकिस्तानी आतंकियों में ये खौफ अच्छा है... वो आतंकी, जिनका खात्मा करते गए 'अज्ञात हत्यारे'

पाकिस्तान में 2020 से 2026 के बीच कई मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की रहस्यमयी तरीके से हत्या हुई. हाल में LeT के एक नेता ने 30 से अधिक आतंकियों के मारे जाने का दावा किया है. जानिए कौन थे ये आतंकी? किन संगठनों से जुड़े थे? पढ़ें पूरी कहानी.

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अंजान कातिल का डर पाकिस्तानी आतंकियों में भर गया है (फोटो-ITG) अंजान कातिल का डर पाकिस्तानी आतंकियों में भर गया है (फोटो-ITG)

परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 04 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

पाकिस्तान में पिछले कुछ वर्षों से एक ऐसा सिलसिला देखने को मिल रहा है, जिसने वहां की सुरक्षा एजेंसियों, आतंकवादी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), हिजबुल मुजाहिदीन और अल-बद्र जैसे भारत विरोधी आतंकी संगठनों से जुड़े कई प्रमुख चेहरे अलग-अलग शहरों में अज्ञात हमलावरों की गोलियों का निशाना बन गए. अधिकांश मामलों में हमलावर मौके से फरार हो गए और इनमें से कई हत्याओं की जांच आज भी अधूरी है.

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हाल ही में सरहद पार पलने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ सदस्य रिजवान हनीफ ने दावा किया कि साल 2020 से अब तक संगठन के 30 से अधिक सदस्य पाकिस्तान में मारे जा चुके हैं. यह दावा इसलिए अहम है क्योंकि पहली बार किसी आतंकी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी ने इतनी बड़ी संख्या सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है. हालांकि, इन 30 से अधिक लोगों की पूरी और आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है. इसलिए सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध और विश्वसनीय स्रोतों से पुष्ट मामलों के आधार पर ही इन घटनाओं को समझना उचित है.

कैसे शुरू हुआ हत्याओं का सिलसिला?
साल 2020 के बाद पाकिस्तान के पंजाब, कराची, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों से जुड़े लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. अधिकांश घटनाओं में हमलावर मोटरसाइकिल पर आए, बेहद करीब से फायरिंग की और कुछ ही सेकेंड में फरार हो गए. कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज सामने आई, लेकिन जांच एजेंसियां हमलावरों तक नहीं पहुंच सकीं.

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पाकिस्तानी मीडिया और कुछ अधिकारियों ने समय-समय पर इन घटनाओं के पीछे विदेशी एजेंसियों का हाथ होने का आरोप लगाया. वहीं कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इन हत्याओं को लेकर विभिन्न दावों और विश्लेषणों को प्रकाशित किया. दूसरी ओर भारत सरकार ने ऐसे आरोपों पर कोई आधिकारिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है और कई मौकों पर ऐसे आरोपों को खारिज किया है.

प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन

साल 2020: कोविड-19 महामारी के दौरान भी कुछ आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों पर हमलों की खबरें आईं, लेकिन अधिकांश मामलों में पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.

साल 2021: पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों पर हमलों की घटनाएं बढ़ने लगीं. कई मामलों में पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज किए.

साल 2022: कराची, लाहौर और रावलपिंडी में कई हाई प्रोफाइल शूटिंग की घटनाएं हुईं. सुरक्षा एजेंसियों ने इन्हें टारगेट किलिंग की श्रेणी में रखा गया.

साल 2023: यह वर्ष सबसे अधिक चर्चित रहा. क्योंकि भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों में शामिल कई नाम एक-एक कर मारे गए. इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इन घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित और प्रसारित की.

साल 2024: लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े कुछ और प्रमुख लोगों की हत्या के मामले सामने आए. इस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज रहा.

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साल 2025-2026: इस बीच छिटपुट घटनाएं जारी रहीं. हाल में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के वरिष्ठ सदस्य के 30 वाले बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया.

अज्ञात हमलावरों के हमले में मारे गए प्रमुख आतंकी-

1. अबू क़ताल सिंधी
अबू क़ताल सिंधी लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय ऑपरेशनल कमांडर माना जाता था. भारतीय एजेंसियों के अनुसार वह जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों की साजिश रचने और सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ कराने में शामिल था. मार्च 2025 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हमलावरों की पहचान सार्वजनिक रूप से नहीं हो सकी.

2. मौलाना शाहिद लतीफ
जैश-ए-मोहम्मद का यह कमांडर भारत के 2016 पठानकोट एयरबेस हमले के आरोपियों में शामिल था. अक्टूबर 2023 में पंजाब प्रांत के सियालकोट क्षेत्र में मस्जिद से बाहर निकलते समय उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पाकिस्तान पुलिस ने इस सिलसिले में मामला दर्ज किया था, लेकिन हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी.

3. ज़ाहूर मिस्त्री
साल 1999 के आईसी-814 विमान अपहरण मामले के आरोपी ज़ाहूर मिस्त्री की मार्च 2024 में कराची में अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी. भारत लंबे समय से उसे वांछित मानता था. वो भारत की वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था.

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4. आमिर हमज़ा
लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में गिने जाने वाला आमिर हमज़ा कट्टरपंथी प्रचारक और संगठन के वैचारिक चेहरों में शामिल था. साल 2025 में उसकी मौत की खबरें सामने आईं. हालांकि उसकी मौत के कारण को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें हैं और सभी सोर्स इसे टारगेट किलिंग नहीं बताते. इसलिए इस मामले को सावधानी से देखा जाना चाहिए.

5. बशीर अहमद पीर
हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े बशीर अहमद पीर पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नजर रखे हुए थीं. फरवरी 2023 में रावलपिंडी में अज्ञात हमलावरों ने उसे गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया था.

6. खालिद रज़ा
अल-बद्र से जुड़े खालिद रज़ा पर भारत विरोधी गतिविधियों के आरोप लगते रहे. फरवरी 2023 में कराची में उसकी हत्या कर दी गई थी.

7. सलीम रहमानी
सलीम रहमानी का नाम भारत की वांछित आतंकियों की सूची में शामिल रहा है. साल 2024 में पाकिस्तान में उस पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उसकी मौत हो गई थी.

मारे गए आतंकियों की भूमिका?
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इन संगठनों के कई सदस्य सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ, हथियारों की सप्लाई, प्रशिक्षण शिविरों के संचालन, वित्तीय नेटवर्क और भर्ती अभियान से जुड़े थे. इनमें कुछ लोगों पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों की साजिश रचने या उन्हें लॉजिस्टिक सहायता देने के आरोप भी रहे. इन आरोपों का आधार भारतीय जांच एजेंसियों की चार्जशीट, वांछित सूची और सार्वजनिक बयान रहे हैं.

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क्या कहता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान में इन घटनाओं के बाद कई बार यह आरोप लगाया गया कि विदेशी एजेंसियां देश के भीतर लक्षित हत्याएं करा रही हैं. कुछ पाकिस्तानी अधिकारियों और मीडिया संस्थानों ने भारत की खुफिया एजेंसी पर आरोप लगाए हैं. हालांकि इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से निर्णायक न्यायिक या अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया का नजरिया
अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इन घटनाओं को मिस्ट्री किलिंग्स या टारगेटेड किलिंग्स के रूप में रिपोर्ट किया है. कई रिपोर्टों में पाकिस्तान के भीतर सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क और सुरक्षा चुनौतियों का उल्लेख किया गया है. कुछ रिपोर्टों में विदेशी एजेंसियों की संभावित भूमिका पर दावे किए गए, लेकिन स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं हुई.

भारत का रुख
भारत सरकार ने पाकिस्तान में हुई इन हत्याओं की जिम्मेदारी कभी नहीं ली. नई दिल्ली का लगातार यही कहना रहा है कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर सक्रिय आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. भारत यह भी दोहराता रहा है कि सीमा पार आतंकवाद उसकी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती है और पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए.

यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल है. LeT के वरिष्ठ सदस्य ने 30 से अधिक लोगों के मारे जाने का दावा जरूर किया है, लेकिन आज तक उनकी पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की गई. सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी के आधार पर कुछ प्रमुख नामों की ही स्वतंत्र पुष्टि हो पाती है. इसलिए 30 से अधिक का आंकड़ा फिलहाल एक संगठनात्मक दावा है, न कि सार्वजनिक रूप से सत्यापित सूची.

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हत्याओं का पैटर्न
अधिकतर हत्याएं गोली मारकर की गईं. हमलावर अक्सर मोटरसाइकिल पर आए और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए. कई मारे गए आतंकी भारत की वांछित सूची में शामिल थे या भारत विरोधी आतंकी संगठनों से जुड़े बताए जाते थे.

अब आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक वरिष्ठ सदस्य ने पाकिस्तान में 30 से अधिक आतंकियों के मारे जाने का दावा किया है, लेकिन इसकी पूरी सार्वजनिक सूची उपलब्ध नहीं है. भारत सरकार ने ऐसी किसी कार्रवाई की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है. मार गए आतंकियों में सबसे चर्चित नाम अबू क़ताल सिंधी, मौलाना शाहिद लतीफ, ज़ाहूर मिस्त्री, बशीर अहमद पीर, खालिद रज़ा और सलीम रहमानी के हैं. अधिकांश मामलों में हमलावरों की पहचान सार्वजनिक रूप से नहीं हो सकी और कई जांच अब भी अधूरी हैं.

पाकिस्तान में पिछले छह वर्षों के दौरान सामने आई रहस्यमयी हत्याओं ने आतंकवादी संगठनों के भीतर डर की भावना पैदा की है. फिलहाल इतना साफ है कि भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई प्रमुख चेहरे पाकिस्तान में मारे गए हैं, लेकिन उनके पीछे कौन था? इस सवाल का जवाब अभी तक सामने नहीं आया है.

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