UPI Volume Growth Slow: UPI पर MDR लगाने से पहले आई ऐसी खबर, लग गया तगड़ा झटका!

MDR को लेकर चल रही बहस के बीच UPI के वाल्यूम में गिरावट ने लोगों का ध्यान खींचा है. लोकसभा ने 6 अगस्त 2026 को Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित किया है.

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MDR लागू करने से पहले UPI बिजनेस में दबाव की खबर. (Photo: ITG) MDR लागू करने से पहले UPI बिजनेस में दबाव की खबर. (Photo: ITG)

आदित्य के. राणा

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:18 AM IST

यूपीआई पर MDR लगाने की खूब चर्चा हो रही है. इस बीच UPI को एक तगड़ा झटका लगा है. दरअसल, 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में UPI की वॉल्यूम ग्रोथ रेट में 10 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि इसी दौरान ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ करीब 20 फीसदी पर स्थिर बनी रही. MDR को लेकर चल रही बहस के बीच इस बदलाव ने डिजिटल पेमेंट सेक्टर का ध्यान खींचा है.

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देश में डिजिटल पेमेंट की सबसे बड़ी व्यवस्था UPI की ग्रोथ रफ्तार में कुछ नरमी देखने को मिली है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक FY-27 के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान UPI की वॉल्यूम ग्रोथ रेट पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10 प्रतिशत अंक कम रही. यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर बहस तेज है.

कितनी रही ग्रोथ?

अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान UPI पर 92 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज हुए, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि (अप्रैल-जुलाई 2025) में यह आंकड़ा 74.5 अरब था. इस तरह ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में सालाना 23.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. हालांकि पिछले साल इसी अवधि में ग्रोथ रेट 33.5 फीसदी थी. FY26 (2025-26) में UPI की वॉल्यूम ग्रोथ करीब 30 फीसदी रही थी, जबकि FY 2025 (2024-25) में यह 41 फीसदी दर्ज की गई थी. इससे पता चलता है कि पिछले दो साल में ग्रोथ रेट में लगातार नरमी आई है.

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MDR पर क्यों हो रही है बहस?

साल 2020 से UPI पर जीरो MDR लागू है. इसका मतलब है कि व्यापारियों को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर बैंकों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता. फिनटेक और पेमेंट कंपनियों का तर्क है कि रेवेन्यू मॉडल नहीं होने की वजह से बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए विस्तार पर निवेश करना चुनौतीपूर्ण हो गया है. उनका कहना है कि MDR मिलने पर कैशबैक, नए ग्राहकों को जोड़ने और मर्चेंट नेटवर्क बढ़ाने में ज्यादा निवेश किया जा सकता है. हालांकि दूसरी तरफ कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि UPI एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है और जीरो MDR मॉडल ने इसकी पहुंच को तेजी से बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.

अभी भी बड़ी ग्रोथ की गुंजाइश

बैंकिंग सेक्टर से जुड़े कुछ अधिकारियों का मानना है कि देश में UPI की पहुंच अभी भी करीब 40 फीसदी आबादी तक ही है. ऐसे में नए यूजर्स और नए कारोबारियों के जुड़ने की पर्याप्त संभावना बनी हुई है. दिलचस्प बात है कि ट्रांजैक्शन वॉल्यूम की ग्रोथ रेट भले धीमी हुई हो, लेकिन ट्रांजैक्शन वैल्यू ग्रोथ मजबूत बनी हुई है. FY6 में जहां यह 18.5 फीसदी थी, वहीं FY27 के पहले चार महीनों में यह करीब 20 फीसदी रही.

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क्या बदल सकते हैं नियम?

लोकसभा ने 6 अगस्त 2026 को Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित किया है. इसके बाद बड़े मर्चेंट्स के हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की संभावना को लेकर चर्चा बढ़ी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार 0.25 फीसदी से 0.30 फीसदी तक MDR लगाने पर विचार कर सकती है.

कितना बड़ा हो चुका है UPI?

देश में होने वाले कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन में UPI की हिस्सेदारी करीब 88 फीसदी है. हर महीने UPI पर 23 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन होते हैं, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 30 लाख करोड़ रुपये रहती है. ऐसे में MDR को लेकर होने वाला कोई भी बदलाव देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम, बैंकों, फिनटेक कंपनियों और करोड़ों ग्राहकों पर असर डाल सकता है.

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