सरकार ने नए यूपीआई लेनदेन पर नए नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ्रेमवर्क की 'A to Z' डिटेल पेश कर दी है. इसमें 2000 रुपये से कम के लेनदेन पर एमडीआर जीरो रखा गया है, तो वहीं इस राशि से ज्यादा के UPI Payment पर पर्सन टू मर्चेंट 0.4% एमडीआर लागू होगा. लेकिन नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा मंगलवार को जारी किए गए सर्कुलर पर नजर डालें, तो सभी पर एक समान एमडीआर लागू नहीं होगा, बल्कि सरकार ने इसे तमाम कैटेगरी में बांटा है और उसी हिसाब से राहत भी दी है. इनमें पांच यूपीआई पेमेंट कैटेगरी को फ्लैट-रेट- मॉडल (UPI MDR Flat Rate Model) के तहत रखा गया है यानी पेमेंट कितना भी हो एक समान चार्ज लागू होगा.
2001 या इससे अधिक पर सिर्फ 5 रुपये
यूपीआई पेमेंट एमडीआर फ्लैट रेट मॉडल की बात करें, तो सरकारी सर्कुलर में साफ किया गया है कि अगले महीने की 15 तारीख से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट फ्रेमवर्क के तहत कुछ निश्चित कैटेगरी में व्यापारियों को राहत देते हुए सरकार ने प्रति लेनदेन 5 रुपये की रियायती दर सेट की है. इसका सीधा मतलब है कि UPI Payment भले ही 2000 रुपये से ज्यादा या फिर 10,000 रुपये या इससे अधिक का क्यों न हो, MDR 5 रुपये ही रहेगा.
सरकार का यह फैसला उन सेक्टर्स के लिए खासतौर पर महत्वपूर्ण है, जहां UPI Transactions का मूल्य अधिक हो सकता है, लेकिन लाभ मार्जिन अपेक्षाकृत कम हो सकता है. इसे एक उदाहरण के तौर पर समझें, तो मान लीजिए 10,000 रुपये के UPI भुगतान को प्राप्त करने वाले व्यापारी को नियम के मुताबिक 0.4% एमडीआर के तहत 40 रुपये का भुगतान करना होगा, लेकिन इतनी राशि के पेमेंट पर फ्लैट-रेट मॉडल में शामिल व्यापारियों को सिर्फ 5 रुपये का भुगतान ही करना होगा.
इस कैटेगरी में शामिल ये 5 ट्रांजैक्शन
अब बताते हैं कि यूपीआई पेमेंट एमडीआर में फ्लैट-रेट-मॉडल में कौन-कौन से और कहां-कहां होने वाले लेनदेन को शामिल किया गया है. तो इसमें पहला पेट्रोल पंप है. यहां पर यूपीआई पेमेंट रियायती फ्लैट-रेट संरचना के अंतर्गत आते हैं.
पहला: Petrol Pumps पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान के लिए एमडीआर 0.4% की दर से नहीं, बल्कि फ्लैट 5 रुपये लिया जाएगा. पेट्रोल-डीजल बिक्री से मिले पेमेंट पर कम एमडीआर का उद्देश्य रिटेल विक्रेताओं के लिए Digital Payment को किफायती बनाए रखना है.
दूसरा: रेलवे ट्रांजैक्शंस को भी इस कैटेगरी में शामिल किया गया है. यानी ट्रेन टिकट के लिए किए गए 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर भी फ्लैट 5 रुपये एमडीआर लागू होगा. यहां साफ कर दें कि ये यात्री पर नहीं लगेगा. इसका मतलब है कि यात्री को अपना टिकट बुक करने के लिए कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा, बल्कि ये पेमेंट सर्विस मुहैया कराने वाला इंडियन रेलवे देगा.
तीसरा: Insurance Premium का यूपीआई के जरिए पेमेंट करने पर भी फ्लैट 5 रुपये का एमडीआर लागू होगा. सरकार ने इस सेक्टर को फ्लैट रेट मॉडल वाली कैटेगरी में शामिल किया है. यानी बीमा का प्रीमियम चाहे कितना भी भरा गया हो इस पर बीमा कंपनी से प्रति ट्रांजैक्शन सिर्फ पांच रुपये वसूला जाएगा.
चौथा: NPCI की ओर से सर्कुलर में फ्लैट रेट मॉडल के तहत राहत पाने वाली कैटेगरी में जिन अन्य सेक्टर्स के यूपीआई लेनदेन को शामिल किया गया है, उनमें अगली कैटेगरी में टेलीकॉम सर्विस आती है. यहां भी 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर एमडीआर 5 रुपये लागू होगा. यानी मोबाइल रिचार्ज या इस सेक्टर की अन्य कोई सर्विस कितनी भी महंगी क्यों न हो प्रति यूपीआई ट्रांजैक्शन पर टेलीकॉम कंपनी को फिक्स्ड एमडीआर देना होगा.
पांचवां: अगला यूपीआई पेमेंट बिजली और पानी के बिलों से जुड़ा हुआ है. इनके बिलों का भुगतान भी इसी फिक्स्ड एमडीआर वाली कैटेगरी में आएगा. बिजली, नगरपालिका जल और पाइप नेचुरल गैस यानी PNG जैसी सर्विसों के बिल भले ही 2,000 रुपये से अधिक के हों, इनका यूपीआई से पेमेंट प्राप्त होने पर 5 रुपये का MDR लागू होगा.
दीपक चतुर्वेदी