Rice Price Hike: चीनी... प्याज पर राहत, तो अब चावल हुआ महंगा, एक्सपर्ट ने बताईं दो वजह

Basmati Rice Price Hike: चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चीनी, प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब Rice Price बढ़ने से आम आदमी को झटका लगा है.

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बासमती और गैर-बासमती चावल की कीमत में तेज बढ़ोतरी. (Photo: ITG) बासमती और गैर-बासमती चावल की कीमत में तेज बढ़ोतरी. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

चावल महंगा (Rice Price Hike) हो गया है और हालिया महीनों में बासमती से लेकर गैर-बासमती चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बासमती चावल की कीमतों में इससे पिछले फाइनेंशियल ईयर तुलना में करीब 15-20% का इजाफा देखने को मिला है. उस समय लगभग 85 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर मिल रहा बासमती चावल अब करीब 100 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है. 

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बीते दिनों जहां चीनी की कीमत में तेज इजाफे ने त्योहारों पर मिठाई की मिठास कम करने के काम किया था, तो वही प्याज ने भी महंगाई का झटका देकर आंसू निकाले थे. हालांकि, अब Sugar-Onion Price जहां कम होते नजर आए हैं, तो वहीं चावल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की टेंशन बढ़ा दी है. 

बासमती-गैर बासमती चावल इतना महंगा
FY27 में अब तक बीते साल के मुकाबले जहां बासमती चावल की कीमतों में 15-20% की बढ़ोतरी हुई है, तो वहीं गैर-बासमती चावल की किस्मों की कीमतों में और भी ज्यादा करीब 20-25% की वृद्धि हुई है. अब सबसे बड़ी बात ये कि आखिर चावल महंगा क्यों हो रहा है और क्या फेस्टिव सीजन के दौरान भी ये कीमतें ऊपर बनी रहेंगी. 

KRBL के थोक निर्यात प्रमुख अक्षय गुप्ता ने इस बारे में आजतक के सहयोगी चैनल बिजनेस टुडे टीवी से बात की और चावल की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे दो बड़े कारणों का जिक्र किया. 

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चावल आखिर महंगा क्यों हो रहा?
कमोडिटी एक्सपर्ट अक्षय गुप्ता का कहना है कि बासमती चावल की कीमतों में ये बढ़ोचरी का सिलसिला इस साल जनवरी महीने की शुरुआत से ही स्टार्ट हो गया था. पंजाब और हरियाणा में शुरुआती बाढ़ के चलते फसल का कुछ हिस्सा खराब हुआ और इससे अक्टूबर-दिसंबर 2025 की फसल उम्मीद से कम हुई. चावल की कुल मात्रा वास्तव में जरूरत से कम होने के कारण Rice Price Hike देखने को मिला है. 

एक्सपर्ट ने चावल महंगा होने के पीछे दूसरा कारण वेस्ट एशिया युद्ध को बताया. अक्षय गुप्ता का कहना है कि खाद्य सुरक्षा कारणों से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की डिमांड अचानक बहुत तेज हो गई और मांग बढ़ने के साथ-साख चावल की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला. खासतौर पर खाड़ी देशों के खरीदार, खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारतीय चावल खरीदने में आगे रहे और सऊदी अरब भारत का सबसे बड़ा चावल खरीदार बना हुआ है.

154 देशों मं पहुंचा भारत का बासमती
भारत ने वित्त वर्ष 2026 में 154 देशों को रिकॉर्ड 65 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया. हालांकि, मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते काफी कुछ बदला है. ग्लोबली मजबूत डिमांड के कारण भारतीय चावल के विदेशी बाजारों में चेंज देखने को मिला और होर्मुज स्ट्रेट में व्यावधान ने जॉर्डन और तुर्की जैसे देशों को होने वाले Rice Export में काफी बढ़ोतरी की. जॉर्डन को निर्यात में 8 गुना बढ़ा है. 

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क्या और बढ़ेगी चावल की कीमत?
कमोडिटी एक्सपर्ट ने कहा है कि बासमती की नई फसल आनी शुरू हो गई है, लेकिन शुरुआती कीमतें पहले ही पिछले साल के शुरुआती स्तरों से अधिक हैं. 1509 की धान की फसल के लिए आवक मूल्य कम से कम 20% अधिक है, जो कि अभी शुरू हुई है. बीते साल भारत ने बासमती चावल के निर्यात में अब तक का सबसे हाई लेवल छुआ था. उन्होंने कहा कि डिमांड अभी भी तेज है और इसमें कमी आने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा है. 

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