शेयर बाजार में गिरावट थम नहीं रही है. शानदार जीडीपी के बाद जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े भी बाजार में जोश भरने में नाकाम रहा. कारोबारी हफ्ते के पहले दिन तेज बिकवाली का दबाव देखने को मिला, बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 383 अंक टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक गिरकर 23,779 के स्तर पर बंद हुआ. इस गिरावट से निवेशकों के करीब 3 लाख करोड़ रुपये डूब गए.
आईटी और टेक सेक्टर पर दबाव
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती और आईटी दिग्गज कंपनियों के कमजोर आउटलुक के कारण आईटी शेयरों में चौतरफा बिकवाली हुई. इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसे बड़े नामों में आई गिरावट ने सूचकांकों को नीचे खींचने का काम किया.
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में अनिश्चितता की वजह से कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में लगातार मजबूती देखी जा रही है. कच्चे तेल की महंगाई भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर डालती है.
बाजार में तेज बिकवाली के बावजूद कुछ लार्जकैप शेयरों ने गिरावट का डटकर मुकाबला किया और हरे निशान में बंद हुए. लार्सन एंड टुब्रो (L&T), भारती एयरटेल और मारुति सुजुकी ने हरे निशान में बंद हुए. जबकि इंफोसिस, टेक महिंद्रा और टाटा स्टील जैसे मेटल और आईटी दिग्गज शेयरों में बिकवाली सबसे ज्यादा हावी रही. स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में भी मुनाफावसूली हावी रही, जिससे रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो पर असर पड़ा.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी फिर से 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर मजबूती से टिक नहीं जाता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. क्योंकि सोमवार को बाजार 23,800 के नीचे बंद हुआ, जो बिकवाली का संकेत देता है. वहीं आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बयानों, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय चाल और FII के आंकड़ों पर बनी रहेगी.
शेयर बाजार में गिरावट के 4 मुख्य कारण हैं:
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (WTI/Brent) के दामों में तेजी दर्ज की गई. क्रूड की कीमत 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे देश के व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति (Inflation) पर असर पड़ता है.
अमेरिका में ब्याज दरों के बढ़ने की आशंका
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशकों में डर बना रहा कि अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं.
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव गहराया
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की भावना बढ़ी और अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ.
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में मजबूती के चलते विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार पूंजी निकाली गई, जिससे घरेलू सूचकांकों पर भारी दबाव बना.
आजतक बिजनेस डेस्क