अचानक ऐसा क्या हुआ, संजय मल्होत्रा बोले- अब RBI का कैलिब्रेटेड टाइटनिंग रुख... क्या है इसका मतलब?

RBI Hikes Repo Rate: रेपो रेट बढ़ने और टाइटनिंग के रुख से अब होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ेंगी. अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है, तो आपकी मासिक किस्त बढ़ जाएगी या फिर आपके लोन की अवधि लंबी हो जाएगी. 

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रेपो रेट में बढ़ोतरी का ऐलान. (Photo: AP) रेपो रेट में बढ़ोतरी का ऐलान. (Photo: AP)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मौद्रिक नीति में रुख को 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) करने के फैसले से कुछ लोग कंफ्यूज हैं. RBI का 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख क्या है और इसका क्या मतलब है?

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) जब अपनी बैठक में ब्याज दरों से जुड़ा फैसला लेती है, तो वह अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखकर अपना एक रुख तय करती है. 

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हाल ही में RBI ने अपना रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है और रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया है.

'न्यूट्रल' और 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में क्या अंतर है?
न्यूट्रल का मतलब होता है कि रिजर्व बैंक स्थिति को तटस्थ होकर देख रहा है. वह जरूरत पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ा भी सकता है, घटा भी सकता है या स्थिर रख सकता है.

वहीं 'कैलिब्रेटेड' का मतलब है नपी-तुली या सोच-समझकर की गई और 'टाइटनिंग' का मतलब है सख्ती. इस रुख का सीधा संदेश यह है कि आने वाले समय में ब्याज दरें घटेंगी नहीं, और बढ़ने की पूरी संभावना है. रिजर्व बैंक जरूरत पड़ने पर धीरे-धीरे और नाप-तोलकर ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी कर सकता है. 

यानी 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' RBI का एक ऐसा संकेत है, जो दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक का मुख्य ध्यान फिलहाल महंगाई को नियंत्रित करने पर है. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में सस्ते लोन का दौर फिलहाल खत्म हो चुका है और दरों में किसी भी बड़े बदलाव की जगह सोच-समझकर सख्ती जारी रखी जाएगी.

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RBI ने यह फैसला क्यों लिया?

महंगाई पर लगाम: सब्जियों, खाद्य पदार्थों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण महंगाई दर आरबीआई के 4% के आदर्श लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है. महंगाई को काबू में करने के लिए बाजार में पैसे के प्रवाह को नियंत्रित करना जरूरी होता है. 

मजबूत आर्थिक वृद्धि: भारतीय अर्थव्यवस्था में अच्छी ग्रोथ देखी जा रही है. जब आर्थिक गतिविधियां मजबूत होती हैं, तो RBI बिना ग्रोथ को नुकसान पहुंचाए महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ा सकता है. 

आम आदमी और आपके बजट पर क्या असर पड़ेगा?

रेपो रेट बढ़ने और टाइटनिंग के रुख से अब होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ेंगी. अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है, तो आपकी मासिक किस्त बढ़ जाएगी या फिर आपके लोन की अवधि लंबी हो जाएगी. 

रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी करते हैं. इससे वरिष्ठ नागरिकों और सुरक्षित निवेश चाहने वालों को फायदा होगा.

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