जब भी कुछ पैसे सुरक्षित जगह पर रखने की बात आती है, तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले बैंक FD का नाम आता है. खासकर उसी बैंक की FD, जहां पहले से सेविंग अकाउंट है और रोजमर्रा के लेनदेन होते हैं. लेकिन क्या सिर्फ सुविधा के लिए उसी बैंक में FD कराना हमेशा फायदे का सौदा होता है?
दरअसल, अगर आपका पैसा सिर्फ 1 साल के लिए रखना है, तो पोस्ट ऑफिस का टाइम डिपॉजिट (Time Deposit) एक बार देखने लायक विकल्प है. वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक दूसरी सरकारी स्कीम इससे भी ज्यादा ब्याज दे रही है. हालांकि ज्यादा ब्याज के साथ उसकी अपनी कुछ शर्तें भी हैं.
1 साल की FD में कहां ज्यादा ब्याज?
मौजूदा ब्याज दरों की तुलना करें तो पोस्ट ऑफिस का 1 साल का टाइम डिपॉजिट सामान्य ग्राहकों के लिए SBI की 1 साल की FD से ज्यादा ब्याज दे रहा है. 30 सितंबर 2026 को खत्म होने वाली तिमाही के लिए पोस्ट ऑफिस के 1 साल के टाइम डिपॉजिट पर 6.90% सालाना ब्याज मिल रहा है. वहीं SBI सामान्य ग्राहकों को 1 साल से 2 साल से कम अवधि की FD पर 6.25% सालाना ब्याज दे रहा है. यानी 1 साल की अवधि में दोनों के बीच 0.65 प्रतिशत अंक का अंतर है. आसान भाषा में कहें तो समान रकम और समान अवधि पर पोस्ट ऑफिस की दर फिलहाल SBI से ज्यादा है.
वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग तस्वीर
अगर निवेशक वरिष्ठ नागरिक है, तो तस्वीर थोड़ी बदल जाती है. SBI वरिष्ठ नागरिकों को इसी अवधि की FD पर 6.75% सालाना ब्याज दे रहा है. इस हिसाब से वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोस्ट ऑफिस के 6.90% और SBI के 6.75% के बीच अंतर सिर्फ 0.15 प्रतिशत अंक रह जाता है. यानी सामान्य ग्राहकों के लिए पोस्ट ऑफिस की बढ़त ज्यादा है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के मामले में दोनों के बीच ब्याज का अंतर काफी कम हो जाता है.
SCSS में 8.2% ब्याज, लेकिन पेंच है
अब बात आती है वरिष्ठ नागरिकों के लिए खास सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) की. इसकी मौजूदा ब्याज दर 8.2% सालाना है, जो पोस्ट ऑफिस के 1 साल के टाइम डिपॉजिट और SBI की FD, दोनों से काफी ज्यादा है. यही वजह है कि सिर्फ ब्याज दर देखने पर SCSS काफी आकर्षक नजर आती है. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है- SCSS को 1 साल के निवेश की तरह नहीं देखा जा सकता. इस स्कीम की आधिकारिक अवधि 5 साल है. यानी अगर आपको अपना पैसा सिर्फ 1 साल बाद वापस चाहिए, तो केवल 8.2% ब्याज देखकर SCSS चुनना सही फैसला नहीं होगा.
ज्यादा ब्याज का मतलब हमेशा बेहतर नहीं
निवेश करते समय सिर्फ यह देखना आसान है कि कौन-सी स्कीम कितना ब्याज दे रही है. लेकिन असली सवाल यह है कि आपको पैसे की जरूरत कब पड़ेगी? मान लीजिए आपके पास कुछ रकम है और आपको पूरा भरोसा है कि अगले 5 साल तक इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी. ऐसे में ज्यादा ब्याज वाली स्कीम पर विचार किया जा सकता है. लेकिन अगर अगले 6 महीने या 1 साल में घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल जरूरत या कोई बड़ा भुगतान करना पड़ सकता है, तो पैसा लंबे समय के लिए लॉक करना परेशानी पैदा कर सकता है. इसलिए निवेश का फैसला रिटर्न के साथ-साथ अवधि और पैसे की जरूरत को देखकर करना चाहिए.
MBA चाय वाला ने क्यों उठाया यह मुद्दा?
उद्यमी और MBA चाय वाला ग्रुप के सीईओ प्रफुल्ल बिल्लोरे ने X पर पोस्ट के जरिए पोस्ट ऑफिस के 1 साल के टाइम डिपॉजिट, SBI की FD और SCSS के रिटर्न की तुलना की. उनका सवाल मूल रूप से यही था कि जब कुछ छोटी बचत योजनाएं बेहतर ब्याज दे रही हैं, तो लोग सिर्फ आदत या सुविधा के कारण बैंक FD को ही क्यों चुनें? दरअसल, बैंक FD का सबसे बड़ा फायदा उसकी आसान पहुंच है. बैंक अकाउंट पहले से होने की वजह से पैसा जमा करना, FD बनाना और जरूरत पड़ने पर उससे जुड़े काम करना कई लोगों के लिए आसान होता है.
पैसा लगाने से पहले 3 सवाल जरूर पूछें
किसी भी FD या छोटी बचत योजना में पैसा लगाने से पहले तीन बातें साफ कर लें- पैसा कितने समय के लिए रखना है, बीच में इसकी जरूरत पड़ सकती है या नहीं और समय से पहले निकालने पर क्या नियम हैं. याद रखें, सबसे ज्यादा ब्याज वाली स्कीम हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छी नहीं होती. अगर पैसा सिर्फ 1 साल के लिए रखना है, तो अवधि के हिसाब से विकल्प चुनना ज्यादा जरूरी है. वहीं लंबे समय के लिए पैसा अलग रख सकते हैं, तो ज्यादा ब्याज वाली योजनाओं पर विचार किया जा सकता है. इसलिए FD कराने से पहले सिर्फ अपने बैंक की दर देखना ही काफी नहीं है. पोस्ट ऑफिस की योजनाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध विकल्पों से तुलना करने पर बेहतर फैसला लिया जा सकता है.
आजतक बिजनेस डेस्क