कुछ घंटे बचे हैं, अगर आप एनएसई (NSE) आईपीओ में निवेश के बारे में सोच रहे हैं, तो जल्द फैसला लेना होगा. 17 सितंबर से यह आईपीओ खुला था, और आज सब्सक्रिप्शन विंडो बंद हो रहा है. NSE के आईपीओ का कुल साइज 22,561.57 करोड़ रुपये का है, और यह मेगा इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है.
आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर है, रिटेल निवेशक को एक लॉट के लिए कम से कम 14,280 रुपये लगाना होगा. आठ शेयरों का एक लॉट है. यह इश्यू पूरी तरह से OFS होने की वजह से आईपीओ के पैसे शेयरधारकों के पास जाएंगे, कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा. कंपनी ने एंकर निवेशकों से 6,746.18 करोड़ रुपये जुटाए हैं.
बता दें, NSE भारत का सबसे बड़ा और वैश्विक स्तर पर प्रमुख मल्टी-एसेट एक्सचेंज है. कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 99.79% और इक्विटी ऑप्शंस में लगभग 99.48% है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल आय 18,713.37 करोड़ रुपये और टैक्स बाद लाभ (PAT) 10,302.06 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में कंपनी ने 3,120.08 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट अर्जित किया है.
आखिरी दिन सब्सक्रिप्शन
आखिरी दिन दोपहर 2 बजे से NSE का आईपीओ करीब 4.17 गुना सब्सक्राइब हो चुका था. जिसमें QIB कोटा 8 गुना, NII कोटा 5.56 गुना और सबसे कम रिटेल कैटेगरी 1.18 गुना भरा. रिटेल निवेशकों को इस आईपीओ को लेकर काफी उत्साह नहीं है. हालांकि तमाम बड़े ब्रोकरेज ने लंबी अवधि के लिए इस आईपीओ में निवेश की सलाह दी है.
दरअसल, एक्सपर्ट्स की मानें तो बहुत सारे निवेश केवल OFS होने की वजह से अप्लाई नहीं कर रहे हैं, इसके अलावा ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) भी बहुत कम है. सोमवार को दोपहर 2 बजे जीएमपी 5 फीसदी से कम है. ऐसे में बढ़िया लिस्टिंग गेन की संभावना कम है.
आखिरी दिन निवेशकों को क्या करना चाहिए?
कंपनी अच्छी है, और मार्केट लीडर भी है. एक्सपर्ट्स की मानें भारत की आर्थिक वृद्धि और वित्तीय बाजारों में बढ़ते रिटेल पार्टिसिपेशन का सबसे बड़ा फायदा NSE को होगा. लंबी अवधि के पोर्टफोलियो में यह एक कोर होल्डिंग स्टॉक बनने का दम रखता है.
बड़े निवेशकों का कंपनी पर भरोसा
आमतौर पर बड़े OFS आईपीओ में शुरुआती या बड़े निवेशक भारी मुनाफा कमाकर बाहर निकलते हैं, लेकिन NSE IPO में स्थिति बिल्कुल अलग है. एनएसई की सबसे बड़ी संस्थागत शेयरधारक LIC (10.72% हिस्सेदारी) ने इस आईपीओ में अपनी एक भी शेयर की बिक्री नहीं की है. प्रमुख शेयरधारकों जैसे अरंडा इन्वेस्टमेंट्स, स्टेट बैंक कैपिटल्स और क्रिसकैपिटल (ChrysCapital) ने औसतन अपनी हिस्सेदारी का केवल 7% हिस्सा ही बेचने का फैसला लिया है.
(नोट: निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें)
आजतक बिजनेस डेस्क