रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों का क्या होगा? अगर UPI से पेमेंट 1 लाख रुपये पार हुआ तो.... जानिए हर जानकारी

UPI New Rule Impact: अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या एक लाख रुपये से ज्यादा का बिक्री करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं?

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छोटे दुकानदारों के लिए UPI के नए नियम में क्या-क्या? (Photo: ITG) छोटे दुकानदारों के लिए UPI के नए नियम में क्या-क्या? (Photo: ITG)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:52 PM IST

UPI के नए नियम को लेकर खूब चर्चा हो रही है, देश में 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है. सरकार का कहना है कि ग्राहक के लिए पहले की तरह UPI फ्री है. लेकिन 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर बड़े मर्चेंट को 0.40% एमडीआर देना होगा. 

नोटिफिकेशन में दावा किया गया है कि छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को नए नियम में बड़ी राहत दी गई है. दरअसल, आज की तारीख में हर छोटे-बड़े शहरों में चाय की दुकान, सब्जी की दुकान, स्ट्रीट फूड और छोटे ग्रोसरी दुकानदारों को अधिकतर पेमेंट UPI के जरिये ही मिलते हैं. 

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लेकिन अब 1 लाख रुपये से अधिक के मंथली लेन-देन और बड़े ट्रांजेक्शन को लेकर नियम बदल गए हैं. सवाल ये है कि क्या सरकार के इस कदम से अनौपचारिक व्यापार को टैक्स और बैंकिंग नेटवर्क के दायरे में लाया जा रहा है? साथ ही ये भी सवाल है कि क्या एक लाख रुपये से ज्यादा का बिक्री करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं?

छोटे दुकानदारों के लिए एक लाख तक का भुगतान फ्री 

दरअसल, नए नियम में जिन छोटे दुकानदार और वेंडर्स की UPI QR कोड के जरिए महीने की कुल डिजिटल भुगतान 1 लाख रुपये तक है, उन्हें P2PM श्रेणी में रखा गया है. इन दुकानदारों के लिए सभी ट्रांजेक्शन पर MDR पूरी तरह शून्य रहेगा, चाहे ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये से ऊपर का ही क्यों न हो. छोटे व्यापारियो को P2PM (Person-to-Person-Merchant) श्रेणी में रखा जाता है. अगर किसी छोटे दुकानदार को QR कोड के जरिए एक महीने में कुल 1 लाख रुपये तक के पेमेंट मिलते हैं, तो उनसे कोई भी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लिया जाएगा.

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तर्क ये है कि स्ट्रीट फूड और रेहड़ी-पटरी पर अमूमन ग्राहक ₹20, ₹50, ₹100 या ₹500 तक का ही भुगतान करते हैं. नए नियमों के अनुसार ₹2,000 या उससे छोटे हर UPI भुगतान पर 0% MDR है, भले ही दुकानदार की कुल मंथली बिक्री 1 लाख रुपये से ज्यादा ही क्यों न हो.

बता दें, 0.4% का मर्चेंट शुल्क केवल तभी लागू होता है जब दुकान की मंथली बिक्री ₹1 लाख से ऊपर हो और कोई ग्राहक एक बार में ही ₹2,000 से बड़ा पेमेंट करे. उदाहरण के लिए 3,000 रुपये का सामान खरीदने पर 12 रुपये का शुल्क देना पड़ेगा. जबकि स्ट्रीट फूड और रेहड़ी-पटरी पर ऐसे बड़े सिंगल पेमेंट लगभग न के बराबर होते हैं. 

₹1 लाख से अधिक की मंथली सेल पर क्या होगा?
जब किसी दुकानदार का मंथली UPI कलेक्शन 1 लाख रुपये को पार कर जाता है, तो बैंक और UPI ऐप उस अकाउंट को P2M (व्यावसायिक मर्चेंट) में अपडेट कर देते हैं.  इसके बाद अगर कोई ग्राहक 2,000 से ज्यादा का सिंगल ट्रांजेक्शन करता है, तो उस ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट को 0.4% MDR देना होगा. हालांकि अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन निर्धारित किया गया है.


वेंडर्स को नुकसान क्यों नहीं होगा?
कहा जा रहा है कि अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को ट्रैक करना सरकार का मुख्य उद्देश्य है. लेकिन सरकार की मानें तो छोटे कारोबारियों के लिए UPI का नया नियम कोई संकट नहीं है. बिना औपचारिक पंजीकरण वाले वेंडर्स जो सालाना 20 लाख या 40 लाख रुपये से अधिक का कारोबार UPI के माध्यम से कर रहे हैं, वे ऑटोमैटिक रूप से वित्तीय निगरानी डेटाबेस में आ जाते हैं, उनका बैंक डेटा अपने आप आयकर विभाग के सिस्टम में दर्ज हो जाता है.

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कैश के जमाने में बिक्री का हिसाब नहीं रहता था. लेकिन अब पूरी कमाई का डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है. ऐसे में UPI के जरिये के निगरानी की बात निराधार है. सरकार का इरादा किसी का व्यवसाय बंद करना नहीं है, बल्कि असंगठित क्षेत्र को औपचारिक बैंकिंग, क्रेडिट/लोन नेटवर्क और टैक्स फ्रेमवर्क से जोड़ना है. 

सरकार का कहना है कि अधिकांश चाय दुकानों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स के बिल 2,000 रुपये से कम ही होते हैं, इसलिए 96% से अधिक छोटे दुकानदारों के दैनिक व्यापार पर इस शुल्क का सीधा वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा. 

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