28 में से 16 स्टील ब्रिज लॉन्च, 455 KM पियर तैयार... फुल स्पीड में भाग रहा बुलेट ट्रेन का काम

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में अब महाराष्ट्र की तरफ भी निर्माण की रफ्तार तेज होती दिख रही है. ठाणे के भिवंडी में इस परियोजना का महाराष्ट्र का पहला स्टील ब्रिज स्थापित कर दिया गया है. 100 मीटर लंबे और 1,405 मीट्रिक टन वजनी इस ब्रिज को नेशनल हाईवे-3 के ऊपर लगाया गया है.

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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम गुजरात और महाराष्ट्र दोनों सेक्शन में तेजी से आगे बढ़ रहा है. (Photo: X/@nhsrcl) मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम गुजरात और महाराष्ट्र दोनों सेक्शन में तेजी से आगे बढ़ रहा है. (Photo: X/@nhsrcl)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • ठाणे,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:51 PM IST

गुजरात में बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो महाराष्ट्र में भी इसकी रफ्तार अब साफ दिखाई देने लगी है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र में पहला स्टील ब्रिज तैयार कर अपनी जगह पर स्थापित कर दिया गया है. ठाणे के भिवंडी इलाके में लगाए गए इस 100 मीटर लंबे ब्रिज का वजन करीब 1,405 मीट्रिक टन है. इसे नेशनल हाईवे-3 के ऊपर बनाया गया है.

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देश की पहली हाई स्पीड रेल परियोजना के तहत मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबी रेल लाइन तैयार की जा रही है. इस पूरे रास्ते में कई बड़े पुल और दूसरे ढांचे बनाए जा रहे हैं. अब महाराष्ट्र में पहले स्टील ब्रिज की स्थापना को इस परियोजना के इस हिस्से में निर्माण की एक अहम प्रगति माना जा रहा है.

ठाणे में कहां लगाया गया ब्रिज?

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के मुताबिक, यह स्टील ब्रिज सोमवार को भिवंडी के डाइव-अंजुर गांव में स्थापित किया गया. इसे नेशनल हाईवे-3 के ऊपर लगाया गया है. ब्रिज की लंबाई 100 मीटर, ऊंचाई 14 मीटर और चौड़ाई भी 14 मीटर है. इसके निर्माण में करीब 1,405 मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है.

इस ब्रिज की खास बात यह है कि इसे महाराष्ट्र में नहीं, बल्कि तमिलनाडु के त्रिची स्थित एक स्पेशल वर्कशॉप में तैयार किया गया. तैयार होने के बाद इसे करीब 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करके ट्रेलर के जरिए ठाणे लाया गया. मौके पर पहुंचने के बाद इसके अलग-अलग हिस्सों को जोड़ा गया और फिर पूरे ढांचे को निर्धारित जगह पर स्थापित किया गया. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यह काम देश में ही उपलब्ध तकनीक और निर्माण क्षमता के इस्तेमाल को भी दिखाता है.

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रात में हाईवे के ऊपर बड़ा ऑपरेशन

ब्रिज को लॉन्च करने का काम रात में तय ट्रैफिक ब्लॉक के दौरान किया गया, ताकि हाईवे पर चलने वाले वाहनों की आवाजाही पर कम से कम असर पड़े. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के मुताबिक, इस स्टील ब्रिज को लॉन्च करने के लिए ऑटोमैटिक लॉन्चर का इस्तेमाल किया गया. इस सिस्टम की मदद से तैयार स्टील स्ट्रक्चर को धीरे-धीरे उसकी निर्धारित जगह तक पहुंचाया गया. पूरे काम के दौरान स्ट्रक्चर की सुरक्षा और हाईवे से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखा गया.

ब्रिज की मजबूती के लिए खास इंतजाम

इस स्टील ब्रिज में सुरक्षा के लिए स्पेशल पेंटिंग की गई है. इसके अलावा इसमें इलास्टोमेरिक बेयरिंग लगाए गए हैं. ये बेयरिंग ब्रिज के स्ट्रक्चर पर पड़ने वाले वाइब्रेशन और दूसरे दबाव को संभालने में मदद करते हैं और ब्रिज की उम्र बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

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28 में से 16 स्टील ब्रिज का काम पूरा

महाराष्ट्र में पहले स्टील ब्रिज की लॉन्चिंग के साथ ही पूरे मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर अब तक 28 में से 16 स्टील ब्रिज तैयार हो चुके हैं. इनमें से 15 ब्रिज बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के गुजरात सेक्शन में बनाए गए हैं. यानी परियोजना में स्टील ब्रिज से जुड़े आधे से ज्यादा काम पूरे हो चुके हैं. बाकी के बचे 12 स्टील ब्रिज का निर्माण और लॉन्चिंग का काम आगे जारी रहेगा.

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का बड़ा हिस्सा गुजरात में है, लेकिन महाराष्ट्र में भी अब निर्माण की गतिविधियां तेज हो रही हैं. 508 किलोमीटर लंबा यह हाई स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है. इसका मकसद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम करना है. जैसे-जैसे पुल, ट्रैक और दूसरे जरूरी स्ट्रक्चर तैयार होंगे, परियोजना का काम जमीन पर और ज्यादा दिखाई देगा.

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का 62.16% काम पूरा

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का कुल निर्माण कार्य जुलाई 2026 के अंत तक 62.16% पूरा हो चुका था. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के वर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट से संबंधित एक आरटीआई के जवाब में बताया कि 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के लिए 1,389.49 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा हो चुका है. इसमें गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली की 959.04 हेक्टेयर और महाराष्ट्र की 430.45 हेक्टेयर जमीन शामिल है. 

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अब तक 366 किलोमीटर वायाडक्ट पर गर्डर लगाए जा चुके हैं, जबकि करीब 380 किलोमीटर के लिए गर्डर ढाले जा चुके हैं. इसके अलावा 459.90 किलोमीटर में नींव और 455.10 किलोमीटर में पियर का काम पूरा हो चुका है. गुजरात के सभी स्टेशनों पर नींव और ऊपरी ढांचे का काम पूरा है, जबकि महाराष्ट्र में स्टेशनों का निर्माण जारी है. परियोजना में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग भी शामिल है, जिसमें करीब 7 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के नीचे होगा. सुरंग निर्माण का काम टनल बोरिंग मशीन और न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से चल रहा है और अब तक 4.88 किलोमीटर सुरंग पूरी हो चुकी है. 

आठ पहाड़ी सुरंगों में से चार की खुदाई आर-पार पूरी हो गई है. वहीं साबरमती डिपो का 32.28% और ठाणे डिपो का 17.23% काम पूरा हुआ था. 27 अगस्त 2026 तक 97 रूट किलोमीटर में ट्रैक स्लैब बिछाए जा चुके थे. ट्रेनसेट की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है और BEML को दो हाई-स्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन, निर्माण और कमीशनिंग का ऑर्डर मिला है, जिसमें पहले ट्रेनसेट का निर्माण शुरू हो चुका है. 

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