अगर आपके पास एक से ज्यादा बैंक खाते हैं, तो सिर्फ यह सोचकर उन्हें बनाए रखना सही नहीं है कि ज्यादा खाते मतलब ज्यादा सुविधा. कई बार जरूरत से ज्यादा खाते आपकी बैंकिंग व्यवस्था को आसान बनाने के बजाय उलझा देते हैं. अलग-अलग खातों में पैसे होने से खर्च, बचत और दूसरे वित्तीय लक्ष्यों को संभालना आसान जरूर हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर एक व्यक्ति के पास कितने बैंक खाते होने चाहिए और हर खाते का क्या काम होना चाहिए?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर लोगों के लिए एक मुख्य बैंक खाता और एक दूसरा बचत या बैकअप खाता पर्याप्त हो सकता है. जरूरत और वित्तीय जिम्मेदारियों के हिसाब से तीसरा खाता भी रखा जा सकता है, लेकिन बिना किसी स्पष्ट वजह के कई खाते खोलने का कोई खास फायदा नहीं है.
एक से ज्यादा खाते रखने का फायदा क्या?
एक से ज्यादा खाते रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपने पैसे को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से बांट सकते हैं. अगर, एक खाते को सैलरी, घर के खर्च और रोजमर्रा के लेनदेन के लिए रखा जा सकता है. दूसरे खाते में बचत या किसी खास वित्तीय लक्ष्य के लिए पैसा रखा जा सकता है. इससे खर्च और बचत का पैसा अलग रहता है और हर महीने यह समझना आसान होता है कि कितना पैसा खर्च हो रहा है और कितना बच रहा है. दूसरा खाता बैकअप के तौर पर भी काम आ सकता है. अगर मुख्य खाते में तकनीकी दिक्कत आ जाए, कार्ड काम न करे या किसी वजह से कुछ समय के लिए खाते तक पहुंच न बन पाए, तो दूसरे खाते से जरूरी भुगतान किए जा सकते हैं.
ज्यादातर लोगों के लिए 2 बैंक खाते काफी
ज्यादातर लोगों के लिए दो बैंक खाते पर्याप्त हो सकते हैं. एक खाते का इस्तेमाल नियमित आय, घरेलू खर्च और रोजमर्रा के लेनदेन के लिए किया जा सकता है, जबकि दूसरे खाते को बचत या किसी खास वित्तीय लक्ष्य के लिए रखा जा सकता है. इस व्यवस्था का एक फायदा यह भी है कि बचत का पैसा रोजमर्रा के खर्च वाले खाते से अलग रहता है. इससे अनजाने में बचत की रकम खर्च होने की संभावना कम हो सकती है.
तीसरा बैंक खाता कब जरूरी हो सकता है?
हर व्यक्ति की जरूरत एक जैसी नहीं होती. अगर किसी की आय के कई स्रोत हैं, अलग-अलग शहरों में बैंकिंग जरूरत है या किसी खास बैंक की सुविधा का इस्तेमाल करना है, तो तीसरा खाता रखा जा सकता है. अगर कोई व्यक्ति एक खाते को नियमित खर्च, दूसरे को लंबी अवधि की बचत और तीसरे को किसी खास लक्ष्य के लिए इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन यहां जरूरी बात यह है कि हर खाते का एक साफ उद्देश्य होना चाहिए. सिर्फ ऑफर, कैशबैक या किसी छोटी सुविधा के लिए बार-बार नया खाता खोलते जाना समझदारी नहीं है.
ज्यादा बैंक खाते खड़ी कर सकते हैं परेशानी
ज्यादा बैंक खाते होने का मतलब यह भी है कि आपको हर खाते पर नजर रखनी होगी. अलग-अलग खातों के न्यूनतम बैलेंस, शुल्क, बैंक अलर्ट और दूसरे नियम हो सकते हैं. अगर किसी खाते का लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो उसके बारे में समय-समय पर समीक्षा करना जरूरी है. कई खाते होने पर यह पता रखना भी मुश्किल हो सकता है कि किस खाते में कितना पैसा है और कौन सा खाता किस काम के लिए है. इसलिए बैंक खातों की संख्या बढ़ाने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था को सरल रखना ज्यादा बेहतर है.
नया बैंक खाता खोलने से पहले ये सवाल पूछें
अगर इन सवालों का जवाब आपके पक्ष में है और खाते की कोई स्पष्ट जरूरत है, तभी नया खाता खोलना बेहतर है.
पुराने खाते भी चेक करते रहें
बैंक खाते खोलने के बाद उन्हें भूल जाना भी सही नहीं है. समय-समय पर देखें कि कौन सा खाता वास्तव में इस्तेमाल हो रहा है और किसका कोई खास काम नहीं रह गया है. अगर कोई खाता लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा और उसका कोई स्पष्ट उद्देश्य भी नहीं है, तो अपनी बैंकिंग व्यवस्था को सरल बनाने के लिए उसे बंद करने पर विचार किया जा सकता है. साथ ही, सभी सक्रिय खातों के बैंक अलर्ट चालू रखें और नियमित रूप से लेनदेन की जांच करते रहें.
आजतक बिजनेस डेस्क