दिल्ली-मुंबई नहीं, छोटे शहरों के लोग 2035 तक करेंगे ये कमाल, 10 करोड़ नए यूजर्स जुड़ेंगे!

डिजिटल पहुंच बढ़ने के बावजूद निवेश का दायरा अभी भी काफी बड़ा होने की गुंजाइश रखता है. देश में 50 से 55 करोड़ एक्टिव UPI यूजर्स हैं. निवेश की दुनिया में अभी भी बड़ी संख्या में लोगों की एंट्री बाकी है.

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युवाओं की बढ़ती भागीदारी बदल रही तस्वीर. (Photo: ITG) युवाओं की बढ़ती भागीदारी बदल रही तस्वीर. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:46 PM IST

देश में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. चाय की दुकान से लेकर सब्जी मंडी तक UPI के जरिए कुछ सेकेंड में भुगतान हो जाता है. लेकिन निवेश की दुनिया में अभी भी बड़ी आबादी की भागीदारी सीमित है. हालांकि आने वाले बरसों में ये तस्वीर बदल सकती है. EY इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 2035 तक भारत में 10 करोड़ से ज्यादा नए लंबी अवधि के निवेशक जुड़ सकते हैं. रिपोर्ट का मानना है कि निवेशकों की अगली बड़ी लहर मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों से आएगी.

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रिपोर्ट के मुताबिक निवेश का दायरा अब बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों की ओर बढ़ रहा है. कारोबारी साल 2024-25 में टॉप-110 शहरों से बाहर के इलाकों की म्यूचुअल फंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 12 फीसदी हिस्सेदारी रही. वहीं NSE के निवेशकों में टॉप-10 जिलों से बाहर के इलाकों का हिस्सा करीब 70 फीसदी रहा. ये आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों की नई फौज अब छोटे शहरों और कस्बों से तैयार हो रही है.

युवाओं की बढ़ती भागीदारी बदल रही तस्वीर

निवेश की दुनिया में युवाओं की मौजूदगी तेजी से बढ़ी है. जून 2026 तक 30 साल से कम उम्र के निवेशकों की हिस्सेदारी 38 फीसदी पहुंच गई. 2018-19 में ये आंकड़ा 23 फीसदी था यानी हर तीन निवेशकों में से एक से ज्यादा निवेशक अब 30 साल से कम उम्र के हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म और आसान निवेश विकल्पों ने युवाओं की बाजार तक पहुंच बढ़ाई है. 

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महिला निवेशकों की हिस्सेदारी भी बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक महिला निवेशकों की भागीदारी में भी लगातार सुधार हो रहा है. B30 शहरों में महिला निवेशकों की हिस्सेदारी 20 फीसदी से बढ़कर 25 फीसदी हो गई है. इससे संकेत मिलता है कि निवेश का दायरा अब पहले के मुकाबले ज्यादा बड़ा और डायवर्सिफाई हो रहा है.

UPI यूजर्स करोड़ों, निवेशक अभी भी कम

डिजिटल पहुंच बढ़ने के बावजूद निवेश का दायरा अभी भी काफी बड़ा होने की गुंजाइश रखता है. देश में 50 से 55 करोड़ एक्टिव UPI यूजर्स हैं. इसके मुकाबले करीब 6.2 करोड़ म्यूचुअल फंड निवेशक और लगभग 5 करोड़ एक्टिव इक्विटी निवेशक हैं. यानी करोड़ों लोग डिजिटल भुगतान तो कर रहे हैं, लेकिन निवेश की दुनिया में अभी भी बड़ी संख्या में लोगों की एंट्री बाकी है.

SIP और डीमैट अकाउंट ने बढ़ाई पहुंच

कोरोना के बाद निवेश से जुड़े कई संकेतकों में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मार्च 2026 तक भारतीय परिवारों की इक्विटी होल्डिंग करीब 800 अरब डॉलर तक पहुंच गई. मार्च 2020 के बाद इसमें सालाना करीब 30 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हुई है. इसी दौरान डीमैट अकाउंट की संख्या बढ़कर 23 करोड़ से ज्यादा हो गई, जबकि NSE पर यूनिक निवेशकों की संख्या 13 करोड़ के पार पहुंच चुकी है. SIP के जरिए भी बड़ी संख्या में नए निवेशक बाजार से जुड़े हैं.

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निवेश की राह में सबसे बड़ी चुनौती क्या?

रिपोर्ट के मुताबिक देश में निवेश योग्य संपत्ति करीब 5.2 ट्रिलियन डॉलर है. इसके बावजूद परिवारों की कुल संपत्ति में फाइनेंशियल एसेट्स की हिस्सेदारी 34 फीसदी और इक्विटी बाजार में आम निवेशकों की हिस्सेदारी 18.7 फीसदी है. EY का कहना है कि अब सबसे बड़ी चुनौती लोगों की फाइनेंशियल समझ और निवेश संबंधी जागरूकता बढ़ाने की है. पहली बार निवेश करने वालों को जोखिम, समय और बाजार की समझ देना जरूरी होगा. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि आने वाले बरसों में भारत की निवेश कहानी को आगे बढ़ाने में छोटे शहर, युवा निवेशक, महिलाएं और डिजिटल परिवार सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. यही वर्ग देश में निवेशकों की अगली बड़ी लहर का आधार बनने जा रहा है.

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