Rule Change: ₹25000 सैलरी वालों को भी मिलेगी पेंशन, आ रहा EPFO का नया नियम!

ईपीएफओ का नया नियम आने जा रहा है. सरकार पीएफ की अनि‍वार्य अधिकतम सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है, लेकिन अभी तक अधि‍कारिक ऐलान नहीं किया गया है.

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ईपीएफओ का नया नियम. (Photo: File/ITG) ईपीएफओ का नया नियम. (Photo: File/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:44 AM IST

कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) के तहत एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. यह बदलाव सैलरी और पेंशन को लेकर होने वाला है. खबर है कि संगठित क्षेत्र में काम करने वाले उन लाखों कर्मचारियों को भी पेंशन का लाभ मिल सकता है, जिनका बेसिक वेतन 25,000 रुपये है. क्‍योंकि ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है. 

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सूत्रों के अनुसार, यह सीमा सितंबर 2014 में अंतिम बार संशोधित होने के बाद से अपरिवर्तित रही है यानी लगभग 12 वर्ष पहले बदलाव हुआ था. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आगे कहा कि नई सीमा का उद्देश्य कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPF) के PF और पेंशन कवरेज को अधिक वेतनभोगी कर्मचारियों तक फैलाना है. 

मनीकंट्रोल के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्‍य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन येाजना (EPS) के तहत अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को 15000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है. अब इसे केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. यह नियम 20 या उससे अधिक कर्मचारी वाले सभी रजिस्‍टर्ड कंपनियों पर लागू होगा. आखिरी बार इसमें सितंबर, 2014 में बदलाव किया गया था . 

क्‍या होता है अनिवार्य वेतन सीमा? 
अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) वह अधिकतम बेसिक सैलरी (Basic Salary + DA) है, जिसपर प्रोविडेंट फंड (PF) और पेंशन (EPS) में कंट्रीब्‍यूशन देना अनिवार्य होता है. अभी ये लिमिट 15,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये हर महीने करने का विचार है. हालांकि, अगर इससे ज्‍यादा सैलरी है तो उनको इससे बाहर होने का विकल्‍प था और कंपनी 15000 रुपये तक ही अनिवार्य योगदान देती है. 

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30,000 रुपये करने का था प्रस्‍ताव 
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ ने पहले इस लिमिट को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का प्रस्‍ताव रखा था. हालांकि, वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा के बाद 25,000 रुपये प्रति माह पर फैसला लिया गया. 

बढ़ेगा वित्तीय बोझ 
सरकार के इस नियम से कंपनियों और सरकार दोनों पर फाइनेंशियल वेटेज बढ़ेगा. वेतन सीमा बढ़ने से कंपनियों को अब ज्‍यादा कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन में 12 फीसदी का योगदान देना हेागा, जिससे उनकी पेरोल कॉस्‍ट बढ़ जाएगी. वहीं पेंशन फंड में भी सरकार का योगदान बढ़ जाएगा, क्‍योंकि सरकार भी पेंशन को लेकर कर्मचारियों को लाभ देती है. इसके साथ ही पीए पर ब्‍याज का कंट्रीब्‍यूशन भी बढ़ सकता है.

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