अगर आप केंद्र सरकार के रिटायर कर्मचारी हैं और आपकी पेंशन उसी पद से रिटायर हुए किसी दूसरे कर्मचारी से कम है, तो 8वें वेतन आयोग से जुड़ी यह मांग आपके लिए अहम हो सकती है. कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने मांग की है कि केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन में भी सेना की तरह 'वन रैंक, वन पेंशन' (OROP) जैसी व्यवस्था पर विचार किया जाए.
सीधी भाषा में समझें तो मांग यह है कि एक ही पोस्ट, एक ही लेवल और करीब-करीब समान सर्विस वाले कर्मचारियों के रिटायर होने का समय अलग होने की वजह से पेंशन में बहुत बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए. हालांकि, अभी यह सिर्फ कर्मचारी संगठनों की मांग है. 8वें वेतन आयोग या केंद्र सरकार ने इसे मंजूर नहीं किया है.
क्यों उठी पेंशन बराबरी की मांग?
मान लीजिए दो कर्मचारी एक ही पद से रिटायर हुए. दोनों ने लगभग समान समय तक नौकरी की. लेकिन एक कर्मचारी कुछ साल पहले रिटायर हुआ और दूसरा बाद में. इस दौरान वेतन और पेंशन के नियम बदल गए. नतीजा यह हुआ कि दोनों की पेंशन अलग हो सकती है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सिर्फ रिटायर होने की तारीख अलग होने से समान पद और समान सेवा वाले लोगों की पेंशन में इतना अंतर नहीं होना चाहिए. इसी अंतर को कम करने के लिए 8वें वेतन आयोग के सामने OROP जैसी व्यवस्था की मांग रखी गई है.
OROP जैसी व्यवस्था में क्या होगा?
'वन रैंक, वन पेंशन' का मतलब आसान भाषा में यह है कि समान पद और समान सेवा अवधि वाले रिटायर लोगों की पेंशन को ज्यादा बराबर रखने की कोशिश की जाए. अभी OROP की व्यवस्था सशस्त्र बलों के लिए लागू है. कर्मचारी संगठनों की मांग है कि इसी तरह की व्यवस्था केंद्रीय सरकार के सिविल कर्मचारियों के लिए भी बनाई जाए. मांग लेवल 1 से लेवल 18 तक के केंद्रीय सिविल कर्मचारियों को लेकर है.
पेंशन तय करने में क्या देखा जाए?
संगठनों का कहना है कि पेंशन तय करते समय सिर्फ यह नहीं देखा जाना चाहिए कि कर्मचारी किस तारीख को रिटायर हुआ था. इसके बजाय कर्मचारी के पद, सेवा के दौरान मिले इंक्रीमेंट, प्रमोशन और करियर में हुई बढ़ोतरी को भी ध्यान में रखा जाए. अगर रिटायरमेंट के बाद उस पद को अपग्रेड किया गया या उसका लेवल बदला गया, तो उसका असर भी पेंशन की गणना में शामिल करने की मांग है. आसान भाषा में कहें तो कर्मचारी जिस पद और सेवा के आधार पर रिटायर हुआ, उसके बाद उसी पद पर काम करने वाले कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी का असर भी पेंशन में किसी तरह जोड़ा जाए.
पेंशन कितनी तय करने की मांग?
प्रस्ताव में पेंशन को पेंशन योग्य वेतन के 50% के आधार पर तय करने की बात कही गई है. हालांकि यह भी मौजूदा नियमों और दूसरे कानूनी प्रावधानों के अधीन होगा. इसका मकसद यह है कि समान स्थिति वाले रिटायर कर्मचारियों की पेंशन के बीच बहुत बड़ा अंतर न रहे.
8वें वेतन आयोग की बैठक कब होगी?
इस मांग पर चर्चा ऐसे समय हो रही है जब 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की राज्यों में बैठकें चल रही हैं. आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर को बैठक होगी. इसके बाद मुंबई में 22 और 23 अक्टूबर को कर्मचारी संगठनों, पेंशनर संगठनों और दूसरे पक्षों से 8वें वेतन आयोग की बातचीत होगी. इन बैठकों में वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़े मुद्दे भी सामने रखे जा रहे हैं.
OROP जैसी व्यवस्था की मांग अभी कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की तरफ से रखी गई है. इसका मतलब यह नहीं है कि पेंशन बढ़ाने का फैसला हो चुका है. 8वें वेतन आयोग को कर्मचारियों और पेंशनरों से सुझाव और मांगें मिली हैं. आयोग इन मुद्दों पर विचार करके अपनी सिफारिशें देगा. इसके बाद केंद्र सरकार को अंतिम फैसला लेना होगा. आयोग की सिफारिशें 18 महीने के भीतर देने की बात उसके आधिकारिक टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में कही गई है.
पुराने पेंशनरों के लिए क्यों अहम है?
इस मांग का सबसे बड़ा असर उन रिटायर कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने से पहले रिटायर हो चुके हैं. कर्मचारी संगठनों ने पहले भी मांग उठाई है कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन के मुद्दे को 8वें वेतन आयोग के दायरे में शामिल किया जाए. अगस्त 2026 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने ऐसे कुछ संगठनों की मांगों को आगे कार्रवाई के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग को भेजे थे.
आजतक बिजनेस डेस्क