मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ने और रुपये को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं, जिस कारण आज रुपया डॉलर की तुलना में 95 से चढ़कर 94.33 पर आ गया है. इसी कदम में से एक फैसला सोने को लेकर है. अपने आयात बिल को कम करने के लिए सरकार ने गोल्ड पर इम्पोर्ट ड्यूटी को बढ़ा दिया था, जिस कारण गोल्ड का आयात तेजी से घटा है और एक तिहाई रह गया है.
गोल्ड का आयात घटने से भारत के ट्रेड डेफिसिट में भी कमी आई है, जो भारत के लिए काफी अच्छा है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सोने पर आयात शुल्क यानी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद भारत का मासिक सोना आयात काफी घट गया है. पहले जहां देश में हर महीने 75-100 टन गोल्ड का आयात किया जाता था, वहीं अब यह घटकर 25-30 टन प्रति माह रह गया है.
बैंकों को भी इम्पोर्ट करने की परमिशन नहीं
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 1 अप्रैल 2026 से कस्टम विभाग ने बैंकों को गोल्ड के डेजिनेटेड इंपोर्टर के तौर पर नोटिफाई नहीं किया है, जिसका मतलब है कि बैंकों को अब गोल्ड आयात करने की अनुमति नहीं है. अब देश में एमएमटीसी समेत सिर्फ तीन एजेंसियों को ही देश में सोना आयात करने की परमिशन दी गई है.
इतना गोल्ड पर इम्पोर्ट ड्यूटी
इम्पोर्ट ड्यूटी की बात करें तो सरकार ने गोल्ड पर प्रभावी आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया है. यह फैसला फॉरेक्स रिजर्व पर दबाव को कम करने, रुपये को मजबूत करने और ट्रेड डेफिसिट को कंट्रोल करने के लिए लिया गया है.
बढ़ सकते हैं गोल्ड के दाम
गोल्ड के आयात बढ़ाने का असर भी दिखा है. इसका मंथली इम्पोर्ट तेजी से नीचे आया है. ऐसे में अब घरेलू उपलब्धता पर असर दिख सकता है. हालांकि, अगर घरेलू स्तर पर इसकी मांग बढ़ती है तो इसके भाव इंटरनेशनल मार्केट की तुलना में ज्यादा हो सकते हैं.
ट्रेड डेफिसिट कम होगा
भारत में अभी तक ज्यादा गोल्ड आयात किया जाता रहा है, जिस कारण आयात बिल बढ़ता है. लेकिन अब गोल्ड पर इम्पोर्ट ड्यूटी ज्यादा होने से भारत का ट्रेड डेफिसिट कम होगा. इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से सोना सस्ता होने का कोई कनेक्शन नहीं है.