NEET के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कर्मचारियों की जांच किसने की, RTI में खुलासा

NEET UG परीक्षा में सुरक्षा का दावा खोखला साबित हुआ है, जिस बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को फर्जी अभ्यर्थियों और धांधली को रोकने का आखिरी हथियार बताया जा रहा था, वही सबसे बड़ी कमजोरी निकलकर सामने आया है.

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NEET के बायोमेट्रिक वेरिफ़ायर की जांच किसने की NEET के बायोमेट्रिक वेरिफ़ायर की जांच किसने की

अशोक उपाध्याय

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

NEET-UG परीक्षा में अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करने के लिए तैनात कर्मचारी ही खुद 'डमी कैंडिडेट' गिरोह के मददगार निकले. इस पूरे मामले में एक बड़ा खुलासा तब हुआ, जब एक RTI के जवाब में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने खुद यह बात स्वीकार की कि उसने बायोमेट्रिक सत्यापन करने वाले इस स्टाफ की कभी सीधे तौर पर कोई जांच ही नहीं की थी. NTA ने परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों के सत्यापन का यह जिम्मा केंद्र सरकार की कंपनी EdCIL को सौंपा हुआ था.

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बिहार पुलिस द्वारा इस गिरोह के पर्दाफाश के बाद अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच में सामने आया है कि बायोमेट्रिक स्टाफ ने जालसाजों की मदद की, जिससे 'डमी कैंडिडेट' पहचान की सुरक्षा जांच को आसानी से चकमा देकर परीक्षा केंद्रों में दाखिल हो गए. RTI के जवाब में NTA ने माना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन में हुई इन गंभीर कमियों और धांधली की विभागीय जांच पहले से ही जारी है.

इस साल NEET-UG री-टेस्ट के लिए परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने वाले हर उम्मीदवार से एक ही बात कही गई. स्कैनर पर अपनी उंगली रखिए और सिस्टम पहचान लेगा कि आप वास्तव में वही व्यक्ति हैं या नहीं.

'इंडिया टुडे' यह जानना चाहता था कि उस स्कैनर के पीछे वास्तव में कौन खड़ा था और क्या किसी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपने से पहले उनके क्रेडेंशियल्स की जांच की थी. इसलिए हमने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पास एक RTI दायर की. हमें जो जवाब मिला, उससे यह समझने में मदद मिलती है कि कैसे बिहार के तीन परीक्षा केंद्रों पर सिस्टम की सुरक्षा की आखिरी पंक्ति ही कथित तौर पर सबसे आसान चोर दरवाजा बन गई.

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बिहार पुलिस द्वारा पर्दाफाश किया गया गिरोह

24 जून की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पेपर लीक विवाद के कारण 3 मई की मूल परीक्षा रद्द होने के बाद आयोजित NEET-UG री-टेस्ट को एक पारदर्शी परीक्षा होना था. इसके बजाय, बिहार पुलिस ने कहा कि उन्होंने लखीसराय जिले के तीन केंद्रों—केआरके कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय और हसनपुर हाई स्कूल से संचालित होने वाले 'डमी कैंडिडेट' गिरोह का पर्दाफाश किया है.

इस मामले में अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस के मुताबिक, इनमें से नौ आरोपी 'डमी कैंडिडेट' हैं, जो पहले से ही MBBS और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं और असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठे थे. एक वास्तविक उम्मीदवार पर अपने स्थान पर दूसरे को बैठाने का आरोप है, दो अन्य सहयोगी हैं और सबसे बड़ा समूह (18 लोग) बायोमेट्रिक सत्यापन कर्मचारियों का है, जिनका काम ठीक इसी तरह की गड़बड़ी को रोकना था.

रिपोर्ट के अनुसार, लखीसराय की SP प्रेरणा कुमार ने दो चौथे वर्ष के MBBS छात्रों को इस नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार बताया. मुजफ्फरपुर के अर्पित सिंह (जो कथित तौर पर अंतर-राज्यीय 'सॉल्वर गैंग' और पैसे देने वाले उम्मीदवारों के बीच की कड़ी था) और वैशाली के मयंक कश्यप जो चौथे वर्ष का MBBS छात्र है और बायोमेट्रिक टीम के साथ काम कर रहा था. जांच से बचने के लिए, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और जाली पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया था.

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RTI में क्या मिला?

इन गिरफ्तारियों ने एक स्पष्ट सवाल खड़ा कर दिया- इन बायोमेट्रिक कर्मचारियों को सबसे पहले किसने काम पर रखा था और उन पर क्या जांच की गई थी?

'इंडिया टुडे' ने यह सवाल सीधे NTA के सामने रखा. जवाब से आउटसोर्सिंग की एक ऐसी कड़ी का खुलासा हुआ जो परीक्षा हॉल से काफी दूर खत्म हो जाती है. NTA खुद बायोमेट्रिक कर्मचारियों को काम पर नहीं रखता और न ही उनकी जांच करता है. इसका केंद्र सरकार की एक कंपनी EdCIL (इंडिया) लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) है, जो जमीन पर वास्तविक वेंडरों को जोड़ने और उनकी जांच करने के लिए जिम्मेदार है.

जब NTA से पूछा गया कि इन एजेंसियों को शामिल करने से पहले उसने क्या सावधानी बरती, तो उसका जवाब बेहद सीधा था- चूंकि MoU, NTA और EdCIL के बीच है, इसलिए NTA "किसी भी तीसरे पक्ष के वेंडर से सीधे तौर पर डील नहीं करता है." नतीजतन, भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की उन लोगों के प्रति कोई सीधी जवाबदेही नहीं है, जो शारीरिक रूप से हर उम्मीदवार की पहचान सत्यापित कर रहे हैं.

RTI के जवाब में इस बात की भी पुष्टि हुई जिसे बिहार की गिरफ्तारियों के बाद नजरअंदाज करना मुश्किल है. NTA के स्तर पर इस साल की बायोमेट्रिक-संबंधित अनियमितताओं, कदाचार, प्रतिरूपण या उम्मीदवार सत्यापन के मुद्दों की जांच पहले से ही चल रही है. NTA ने कहा कि अनुबंध दिए जाने के समय NEET 2026 के लिए किसी भी बायोमेट्रिक एजेंसी को ब्लैकलिस्ट या जांच के दायरे में नहीं रखा गया था और तब से किसी भी एजेंसी को दंडित या समाप्त नहीं किया गया है.

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