'अरबों के घर बिक रहे, फिर भी चूहों से बदतर जिंदगी...' डूबते गुरुग्राम पर भड़के सुहेल सेठ

गुरुग्राम वो शहर है जहां 20, 40 या 50 करोड़ नहीं बल्कि 100 करोड़, 200 करोड़ के घर बिकते हैं. अल्ट्रा रिच लोगों की पहली पसंद बनता ये शहर बारिश में बदहाली के लिए भी चर्चा में रहता है. सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा इस बात का गवाह है कि लोग किस हद तक परेशान हैं.

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सुहेल सेठ ने छेड़ा नागरिक आंदोलन (Photo-ITG) सुहेल सेठ ने छेड़ा नागरिक आंदोलन (Photo-ITG)

सुशीम मुकुल

  • नई दिल्ली ,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

"मैं भारत के शहरों में हमारी दयनीय ज़िंदगी को लेकर नाराज और बेहद गुस्से में हूं, हम चूहों की तरह रहते हैं. बल्कि उससे भी बदतर." मार्केटिंग एक्सपर्ट और लेखक सुहेल सेठ ने 2.17 मिनट के अपने एक वीडियो क्लिप में यह बात कहते हुए भारत के चरमराते बुनियादी ढांचे के खिलाफ एक 'नागरिक आंदोलन' की शुरुआत कर दी है.  

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सुहेल सेठ के एक्स हैंडल पर 8 अगस्त की सुबह पोस्ट किया गया यह वीडियो, शुक्रवार को हुई भारी बारिश के कुछ ही घंटों बाद आया, जिसने गुरुग्राम सहित पूरे दिल्ली-एनसीआर को पानी में डुबो दिया था. सुहेल सेठ खुद गुरुग्राम में रहते हैं.

नागरिक सुविधाओं की विफलताओं की तस्वीरें और वीडियो भेजने की अपील करते हुए सुहेल सेठ ने वादा किया कि जब तक प्रशासन की जवाबदेही तय नहीं होती, वे इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाते रहेंगे. उनकी इस अपील को देश भर की प्रमुख हस्तियों और आम लोगों का भारी समर्थन मिला है, जिनमें बायोकॉन की संस्थापिका किरण मजूमदार-शॉ, वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और एंजेल इन्वेस्टर लॉयड मथियास शामिल हैं.

सोशल मीडिया पर बहस

भारतीय सेना के रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील सिंह शेरोन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मैं न तो कम्युनिस्ट हूं और न ही कट्टर समाजवादी, लेकिन गुरुग्राम जैसे शहर में, जहां तीसरे दर्जे की नागरिक सुविधाएं हैं, 271 करोड़ रुपये में एक अपार्टमेंट बिक रहा है, भारत में कुछ न कुछ बहुत गड़बड़ है."

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लेफ्टिनेंट कर्नल शेरोन बिजनेसमैन मानव सरदाना द्वारा गुरुग्राम के DLF 'द डहलियाज' में खरीदे गए 271 करोड़ रुपये के पेंटहाउस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे. शुक्रवार (7 अगस्त) को हर साल की तरह इस बार भी मानसूनी बारिश ने गुरुग्राम के जलनिकासी तंत्र की पोल खोल दी. सड़कें जलमग्न हो गईं, यातायात ठप हो गया और लोग घंटों फंसे रहे. हैरानी की बात यह है कि शहर के डूबने से कुछ घंटे पहले ही गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) ने एक्स पर पोस्ट किया था—"बाढ़-मुक्त गुरुग्राम बनाने में हर नाला अहम है." इसके कुछ ही घंटों बाद लोगों ने जलमग्न सड़कों और पानी में फंसी गाड़ियों की तस्वीरों के साथ प्रशासन को जवाब दिया.

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सुहेल सेठ ने शुरू किया नागरिक आंदोलन

गुरुग्राम के नागरिक मुद्दों को लंबे समय से उठाने वाले सुहेल सेठ ने इसे विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक 'नागरिक आंदोलन' का नाम दिया है. उनका कहना है कि पुख्ता सबूतों और जनता के एकजुट दबाव से अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जा सकता है. यह अभियान अब सिर्फ गुरुग्राम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के कई अन्य शहरों से भी लोग अपनी बदहाल नागरिक सुविधाओं की तस्वीरें और कहानियां साझा कर रहे हैं.

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इस अभियान की शुरुआत सुहेल सेठ द्वारा एक्स (X) पर पोस्ट किए गए उस वीडियो से हुई, जो उन्होंने गुरुग्राम में भारी जलभराव के बाद बनाया था. 63 वर्षीय सुहेल सेठ ने कहा, "मैं भारत के शहरों में जिस लाचारगी भरी जिंदगी को हम जी रहे हैं, उससे बेहद गुस्से में हूं. हम चूहों की तरह जी रहे हैं, बल्कि उससे भी बदतर."

भारत के शहरी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए सेठ ने कहा कि सड़कों के गड्ढे "माउंट एवरेस्ट" जितने बड़े हो गए हैं, जबकि सदियों का अनुभव होने के बावजूद हर मानसून में शहर पानी में डूब जाते हैं. उन्होंने गुरुग्राम के स्थानीय प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि हर मानसून में मिलेनियम सिटी को वेनिस बनने दिया जाता है.

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सिर्फ गुस्सा निकालने के बजाय सेठ ने लोगों से जवाबदेही तय करने वाले इस आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया. उन्होंने लोगों से जलभराव, टूटी सड़कों और अन्य नागरिक विफलताओं की तारीख और स्थान के साथ तस्वीरें व वीडियो व्हाट्सएप करने को कहा, उन्होंने वादा किया कि वे जांचे गए हर सबूत को मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए सरकार तक पहुंचाएंगे.

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उन्होंने कहा, "कमियों पर सिर्फ बातें करना बंद करते हैं और समाधान की तरफ बढ़ते हैं. हम ऐसे शहरों के हकदार हैं, जहां हम रह सकें, न कि ऐसे शहरों के जहां हमें तैरना पड़े." मंगलवार सुबह तक उनके इस पोस्ट को करीब 4 लाख व्यूज, 728 कमेंट्स, 2,100 रीपोस्ट और 7,100 से ज्यादा लाइक्स मिल चुके थे.

अपील करते वक्त सुहेल सेठ के सामने उनकी लिखी किताब "WTF India" रखी हुई थी. अमेज़न लिस्टिंग के मुताबिक, यह किताब 13 जुलाई 2026 को यानी इस वीडियो से ठीक 28 दिन पहले ही प्रकाशित हुई है. इससे पहले 4 अगस्त को भी सुहेल सेठ ने गुरुग्राम जाने वाले यात्रियों को तंज कसते हुए नाव साथ ले जाने की सलाह दी थी, उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर पर कटाक्ष करते हुए लिखा था: "जनहित में जारी: आज जो लोग भी गुरुग्राम आ रहे हैं या जा रहे हैं, कृपया नाव का इस्तेमाल करें. प्रशासन की महानता का शुक्रिया, जिसने कभी मानसून का अनुमान ही नहीं लगाया और हम खुशी-खुशी डूब रहे हैं."

सुहेल सेठ के अभियान को मिला दिग्गजों का साथ

सुहेल सेठ की अपील के 24 घंटे के भीतर देश भर से सैकड़ों लोगों ने जलभराव, ट्रैफिक जाम और प्रशासनिक नाकामियों के वीडियो और तस्वीरें भेजना शुरू कर दिया, जिन्हें सेठ ने अपने एक्स अकाउंट से रीपोस्ट भी किया. बायोकॉन की संस्थापिका किरण मजूमदार-शॉ ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि इसे जनभागीदारी वाले एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप लेना चाहिए, उन्होंने लिखा, "इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन बनना चाहिए. आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दशक पहले 'स्वच्छ भारत' आंदोलन शुरू किया था, और यह हमारे लिए नागरिक शर्म की बात है कि हम नागरिक के रूप में काम करने में विफल रहे. बेंगलुरु में हम साफ-सुथरे शहर के अभियान पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन यह अच्छी आदतों के जरिए ही संभव है."

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बेंगलुरु में रहने वाली 73 वर्षीय उद्यमी किरण मजूमदार-शॉ इससे पहले भी बेंगलुरु की बदहाल सड़कों, कचरे और अनियोजित शहरी विकास की आलोचना कर चुकी हैं. जून में उन्होंने कहा था कि 'गार्डन सिटी' कहे जाने वाला बेंगलुरु अब 'कचरे का शहर' बनता जा रहा है.

वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने भी इस प्रयास का समर्थन किया और कोविड-19 ऑक्सीजन संकट के दौरान सुहेल सेठ की भूमिका को याद किया. वहीं, एंजेल इन्वेस्टर लॉयड मथियास ने इसे उत्कृष्ट पहल बताते हुए कहा कि इसके लिए नागरिकों की ठोस कार्रवाई की जरूरत है.

भारतीय शहरों में सालों से जनता का गुस्सा दिखता रहा है, लेकिन अब सुहेल सेठ को भरोसा है कि एक संगठित नागरिक आंदोलन वह बदलाव ला सकता है जो महज आक्रोश अब तक नहीं ला पाया है.

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