सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पार्श्वनाथ डेवलपर्स के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने होमबायर्स के दावों का निपटारा फ्लैट का कब्जा देने या ब्याज के साथ पैसे लौटाने के जरिए करने की बात कही थी. कोर्ट ने कहा कि यह प्रस्ताव कार्यवाही में देरी करने का एक और तरीका नजर आता है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने कंपनी को एक और मौका देते हुए कहा कि वह ऐसा नया प्रस्ताव पेश करे, जिसमें कंपनी और उसकी सभी सहायक कंपनियों के सभी अलॉटियों और होमबायर्स के दावों को शामिल किया जाए.
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर कंपनी व्यापक प्रस्ताव पेश नहीं करती है तो वह मामले की जिम्मेदारियां संभालने के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी नियुक्त कर सकता है. इन दावों में पैसे की वापसी, फ्लैट का कब्जा देने में देरी के लिए मुआवजा और हरियाणा RERA के आदेशों को लागू न किए जाने से जुड़े मामले शामिल हैं.
SC ने एक साल में फ्लैट देने की योजना ठुकराई
सुनवाई के दौरान पार्श्वनाथ ने कहा कि वह एक साल के भीतर होमबायर्स को उनके फ्लैटों का कब्जा दे देगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. कंपनी के वकील ने बताया कि पार्श्वनाथ ग्रुप के 24 हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं, जिनमें करीब 27,000 फ्लैट हैं. इनमें से लगभग 24,000 फ्लैट बिक चुके हैं, जबकि करीब 3,000 फ्लैटों का अभी कब्जा दिया जाना बाकी है.
कोर्ट ने कहा कि होमबायर्स पहले ही काफी परेशानी झेल चुके हैं और कंपनी से ऐसा प्रस्ताव लाने को कहा जो उनके दावों का समाधान कर सके. मुख्य न्यायाधीश ने यह भी सुझाव दिया कि पार्श्वनाथ सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 500 करोड़ रुपये जमा करे. इसके बाद कोर्ट हाई-पावर्ड कमेटी नियुक्त करने पर विचार कर सकता है.
बेंच ने कहा कि कुछ होमबायर्स के पक्ष में पैसे की डिक्री पहले ही जारी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें राहत पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ये लोग ‘एक जगह से दूसरी जगह भटक रहे हैं’. उन्होंने कहा कि CBI जांच का आदेश देने से भी जरूरी नहीं कि उनकी समस्या का समाधान हो जाए. सुप्रीम कोर्ट पहले ही पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों से होमबायर्स द्वारा उनके खिलाफ दर्ज मामलों की स्थिति और उनमें हुई कार्रवाई की जानकारी देने वाली रिपोर्ट दाखिल करने को कह चुका है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट इस बिल्डर के खिलाफ 10 से ज्यादा मामलों की सुनवाई कर रहा है.
1.78 करोड़ रुपये दिए, फिर भी फ्लैट तैयार नहीं हुआ
सुनवाई के दौरान बेंच ने रीटा टिक्कू और लोकेश टिक्कू के मामले का भी जिक्र किया. रीटा टिक्कू कैंसर सर्वाइवर हैं. इस दंपति ने गुरुग्राम के सेक्टर 53 स्थित पार्श्वनाथ एक्सोटिका प्रोजेक्ट में अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाई थी. कोर्ट ने बताया कि दंपति ने फ्लैट की पूरी कीमत 1.78 करोड़ रुपये चुका दी थी. समझौते के मुताबिक 36 महीने के भीतर कब्जा दिया जाना था और कब्जे की समयसीमा फरवरी 2013 में पूरी हो गई थी.
पूरी रकम चुकाने के बावजूद फ्लैट का निर्माण भी पूरा होने के करीब नहीं था. कोर्ट ने कहा कि 2021 तक याचिकाकर्ताओं को न तो फ्लैट मिला था और न ही उनका पैसा वापस किया गया था. कोर्ट ने कहा कि टिक्कू करीब दो दशक से अपने घर से वंचित हैं.
IRP को फ्रीज बैंक खाते चलाने की अनुमति नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ के खिलाफ चल रही दिवाला प्रक्रिया में नियुक्त इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) को कंपनी के फ्रीज किए गए एक बैंक खाते को चलाने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया. IRP ने कोर्ट को बताया था कि उसे होमबायर्स के करीब 3,000 दावे मिले हैं और कंपनी के कामकाज को चलाने के लिए कम से कम एक फ्रीज खाते को संचालित करने की अनुमति मांगी थी. कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी.
मुख्य न्यायाधीश ने दिवाला प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर IRP ठीक से काम कर रहे होते और प्रभावी होते, तो लोगों को सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं करना पड़ता.
हरियाणा के अधिकारियों को भी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य के अधिकारियों की भूमिका की भी आलोचना की. बेंच ने कहा कि जिन अधिकारियों से होमबायर्स के हितों की रक्षा की उम्मीद थी, उन्होंने कथित तौर पर बिल्डर के साथ मिलीभगत की. बिल्डर ने हरियाणा RERA जैसे अर्ध-न्यायिक मंच के आदेशों का भी पालन नहीं किया.
कोर्ट की पिछली टिप्पणियां रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की प्रभावशीलता को लेकर भी चिंता से जुड़ी थीं, खासकर होमबायर्स को राहत दिलाने के मामले में. सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज करने का आदेश दिया था और कंपनी के नेतृत्व के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे.
यह कार्रवाई तब हुई थी जब बेंच ने घर का कब्जा पाने के लिए 20 साल से संघर्ष कर रहे वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति पर गौर किया था. कोर्ट ने हरियाणा के अधिकारियों को भी हरियाणा RERA के पार्श्वनाथ के खिलाफ दिए गए आदेशों को लागू न करने को लेकर कड़ी फटकार लगाई थी.
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