दिल्ली और एनसीआर में आने वाले दिनों में और नए मॉल खुलेंगे. रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म कुशमैन एंड वेकफील्ड की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 से 2028 के बीच आने वाले नए मॉल्स में आधी से ज्यादा हिस्सेदारी अकेले दिल्ली की होगी. इस अवधि के दौरान NCR में लगभग 71 लाख वर्ग फुट संगठित रिटेल स्पेस जुड़ने की उम्मीद है. इसमें से दिल्ली अकेले लगभग 37 लाख वर्ग फुट यानी 52% का योगदान देगी. इसके बाद गुरुग्राम 26 लाख वर्ग फुट यानी 37% और नोएडा 8 लाख वर्ग फुट यानी 11% हिस्सेदारी के साथ क्रमश, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहेंगे.
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि भारत के रिटेल रियल एस्टेट सेक्टर ने 2026 की दूसरी तिमाही में अपनी बढ़त कायम रखी. देश के शीर्ष 8 शहरों में कुल ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम बढ़कर 24 लाख वर्ग फुट हो गया, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 23.2% और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 17.6% की वृद्धि दर्शाता है.
इसके अलावा, साल 2026 की पहली छमाही में कुल रिटेल लीजिंग 43.5 लाख वर्ग फुट तक पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि से 3.1% अधिक है और प्रमुख रिटेल बाजारों में लगातार हो रहे विस्तार को दर्शाती है.
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ये शहर सबसे आगे
राष्ट्रीय स्तर पर, 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान कुल लीजिंग गतिविधियों में दिल्ली-NCR, मुंबई और हैदराबाद सबसे आगे रहे और इन तीनों ने मिलकर कुल लीजिंग का 64% हिस्सा हासिल किया. इसमें दिल्ली-NCR 6.7 लाख वर्ग फुट (28%) के साथ शीर्ष पर रहा, जिसके बाद मुंबई 5 लाख वर्ग फुट (21%) और हैदराबाद 3.7 लाख वर्ग फुट (15%) के साथ दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे। इनके अलावा बेंगलुरु और पुणे प्रत्येक ने 2.5 लाख वर्ग फुट, चेन्नई ने 2 लाख वर्ग फुट, अहमदाबाद ने 1.1 लाख वर्ग फुट और कोलकाता ने 0.5 लाख वर्ग फुट की लीजिंग दर्ज की.
विशेष बात यह रही कि लगातार दूसरी तिमाही में कोई भी नया ग्रेड-A मॉल चालू नहीं हुआ, इसके बावजूद, नए स्पेस की कमी के बाद भी मॉल्स की लीजिंग काफी मजबूत बनी रही. यह मुख्य रूप से साल 2025 की दूसरी छमाही में पूरे हुए प्रोजेक्ट्स में लगातार बनी मांग के कारण संभव हुआ, जो यह दिखाता है कि रिटेल ब्रांड्स आज भी संगठित और प्रीमियम रिटेल डेस्टिनेशंस को ही पहली प्राथमिकता दे रहे हैं.
जब कई मॉल घाटे में हैं, तो नए मॉल्स का क्या होगा?
हालांकि नए मॉल स्पेस के इस तेजी से विस्तार के बीच एक बड़ा विरोधाभास भी देखने को मिल रहा है. हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश के लगभग 70% मॉल्स ग्राहकों की कमी, घटते फुटफॉल और गलत लोकेशन या मैनेजमेंट की वजह से संघर्ष कर रहे हैं या घाटे में चल रहे हैं. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि नए मॉल स्पेस की इतनी बड़ी सप्लाई का भविष्य क्या होगा?
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