ब्रिटेन की पहचान और वहां के राजा-रानी का आधिकारिक घर बकिंघम पैलेस में इस समय सबसे बड़े मरम्मत का काम चल रहा है. इस ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए बिल्कुल सुरक्षित और नया जैसा बनाए रखना बड़ी चुनौती है.
इस पूरे काम पर लगभग 369 मिलियन पाउंड (करीब 3,800 करोड़ रुपये) का खर्च आ रहा है, इसके तहत महल की दशकों पुरानी बिजली की वायरिंग, पानी के पाइप, हीटिंग सिस्टम और नेटवर्क केबलों को बदला जा रहा है. इससे पहले महल में इतना बड़ा मरम्मत का काम 1950 के दशक में हुआ था, जब दूसरे विश्व युद्ध के बम धमाकों से हुए नुकसान को ठीक किया गया था.
इस बार के खर्च का इंतज़ाम 'सॉवरेन ग्रांट' में मिलने वाली थोड़ी बढ़ोतरी से किया जा रहा है, यह काम अप्रैल 2017 में शुरू हुआ था और 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. वैसे, बकिंघम पैलेस का इतिहास 300 साल से भी ज़्यादा पुराना है. 1703 में जब यह बना था, तब इसे 'बकिंघम हाउस' कहा जाता था, बाद में राजा जॉर्ज तृतीय ने इसे अपनी पत्नी के लिए खरीदा और फिर इसे एक आलीशान पैलेस का रूप मिला, 1837 में जब महारानी विक्टोरिया यहां रहने आईं, तब से यह ब्रिटिश राजशाही का मुख्य ठिकाना और कामकाज का सेंटर बन गया.
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क्या बदलाव हो रहा है?
'रिजर्विसिंग प्रोग्राम' के तहत, इंजीनियर्स पुराने इलेक्ट्रिकल वायरिंग, प्लंबिंग, हीटिंग और संचार प्रणालियों को बदल रहे हैं, जिन्होंने दशकों से पैलेस को अपनी सेवाएं दी हैं. बकिंघम पैलेस को सुचारू रूप से चलाने वाली इन आवश्यक प्रणालियों का अंतिम बड़ा मरम्मत कार्य 1950 के दशक में द्वितीय विश्व युद्ध के बम हमलों से हुए नुकसान के जवाब में किया गया था.
इस परियोजना का मुख्य आकर्षण बकिंघम पैलेस के पुराने यूटिलिटी नेटवर्क को बदलना है. इंजीनियर्स मील लंबी पुरानी इलेक्ट्रिकल वायरिंग, सीसे (लेड) के पाइप, पानी के पाइप, बॉयलर, हीटिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिकल स्विचबोर्ड, पानी की टंकियों और संचार केबलों को हटा रहे हैं, जो अपनी निर्धारित समयावधि पूरी कर चुके हैं. इन प्रणालियों को आधुनिक बुनियादी ढांचे से बदला जा रहा है, जिसे पैलेस को आग, बाढ़ और मैकेनिकल फेलियर के बढ़ते खतरों से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यह कम से कम अगली आधी सदी तक काम करना जारी रख सके.
पैलेस की यांत्रिक सेवाओं को भी पुनर्जीवित किया जा रहा है. तीन दशक से अधिक पुराने बॉयलरों को बदला जा रहा है, क्योंकि इंजीनियर्स ने चेतावनी दी थी कि इनके स्पेयर पार्ट्स मिलना मुश्किल हो गया था और इनकी विफलता पूरी इमारत में हीटिंग को प्रभावित कर सकती थी.
एक अन्य प्रमुख फोकस पैलेस का पुराना प्लंबिंग नेटवर्क है. इंजीनियर्स ने पाया कि कास्ट-आयरन से बने ज़मीन से ऊपर के ड्रेनेज सिस्टम झुकने लगे थे, और उनकी खराब होती जॉइंट्स लीक होने की संभावना को बढ़ा रही थीं. चूंकि अधिकांश पाइपवर्क ऐतिहासिक दीवारों के अंदर और मूल फर्शों के नीचे छिपा हुआ है, इसलिए किसी भी विफलता से सदियों पुरानी आंतरिक बनावट और अमूल्य कलाकृतियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था, इसलिए, इस परियोजना में पानी के पुराने पाइपों, ड्रेनेज सिस्टम और संबंधित प्लंबिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को किसी बड़े नुकसान से पहले ही बदलना शामिल है.
यह प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली-पानी के पाइप बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पैलेस में स्टाफ के दफ्तरों को बेहतर बनाया जा रहा है और आम जनता के लिए एक नया 'लर्निंग सेंटर', बेहतर लिफ्टें और दिव्यांगों के लिए खास सुविधाएं तैयार की जा रही हैं, जिससे हर साल 1,15,000 टूरिस्ट और 30,000 स्कूली बच्चे यहां आ सकेंगे.
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