कागजों पर दाम बढ़ना ही काफी नहीं, रियल एस्टेट में निवेश से पहले समझें असली खेल

एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेश करने से पहले निवेशकों को यह आंकलन कर लेना चाहिए कि भविष्य में उस प्रॉपर्टी को कौन खरीद सकता है, क्योंकि अगर महंगी प्रॉपर्टी जरूरत पर बिक न पाए तो वो किस काम का है.

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प्रॉपर्टी में पैसा लगाने से पहले सोचें (Photo-ITG) प्रॉपर्टी में पैसा लगाने से पहले सोचें (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

भारतीय निवेशकों के लिए रियल एस्टेट लंबे समय से संपत्ति बनाने के सबसे भरोसेमंद जरिया रहा है. आमतौर पर निवेश के फैसले कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद, रेंटल यील्ड, बिल्डर की विश्वसनीयता और आने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं जैसे कारकों से तय होते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू अक्सर नजरअंदाज हो जाता है वह है लिक्विडिटी, यानी जरूरत पड़ने पर किसी प्रॉपर्टी को कितनी आसानी से नकदी में बदला जा सकता है.

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BOP.in के सह-संस्थापक गौरव मावी के अनुसार, लिक्विडिटी को नजरअंदाज करना गलत प्रॉपर्टी खरीदने से भी बड़ी गलती साबित हो सकता है. कागजों पर भले ही किसी प्रॉपर्टी की कीमत काफी बढ़ गई हो, लेकिन उसकी असली कीमत की परीक्षा तब होती है, जब कोई निवेशक उसे बेचना, पूंजी जुटाना या अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करना चाहता है.

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मावी ने कहा, "करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी कागजों पर एक सफल निवेश दिख सकती है, लेकिन अगर भारी मोलभाव या लंबे इंतजार के बिना उसे बेचा न जा सके, तो उसका वित्तीय मूल्य सीमित रह जाता है."

कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब आसान बिक्री नहीं

दिल्ली-एनसीआर का हाउसिंग मार्केट इसका एक बेहतरीन उदाहरण है. इस क्षेत्र में साल 2025 में आवासीय कीमतों में सालाना आधार पर लगभग 24% की वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत के प्रमुख शहरों में सबसे अधिक थी. हालांकि, केवल बढ़ती कीमतें ही बेहतर लिक्विडिटी की गारंटी नहीं होतीं. विशेषज्ञों का कहना है कि प्रॉपर्टी के दाम बढ़ना और लिक्विडिटी, रियल एस्टेट निवेश के दो अलग-अलग पहलू हैं, जहाँ एक प्रॉपर्टी एक दशक में शानदार रिटर्न दे सकती है, वहीं मामूली बढ़ोतरी लेकिन मजबूत मांग वाली दूसरी प्रॉपर्टी ज्यादा वित्तीय लचीलापन दे सकती है, क्योंकि उसे बेचना आसान होता है.

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शेयरों, म्यूचुअल फंड या बॉन्ड के उलट, रियल एस्टेट में सौदे खरीदार मिलने पर निर्भर करते हैं. लोकेशन, कीमत, लोन की उपलब्धता, इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार का माहौल जैसे कारक तय करते हैं कि कोई प्रॉपर्टी कितनी जल्दी बिक सकती है.

सिर्फ संपत्ति नहीं, मांग में निवेश करें

मावी का मानना है कि निवेशकों को सिर्फ आकर्षक संपत्तियां खरीदने के बजाय ऐसे बाजारों पर ध्यान देना चाहिए, जहां लगातार मांग बनी रहे. उन्होंने द्वारका एक्सप्रेसवे कॉरिडोर का उदाहरण दिया. 2020 और 2024 के बीच यहां 16,500 से अधिक मकान बिके, जो इस अवधि के दौरान लॉन्च हुए लगभग 16,000 नए मकानों के बराबर थे. सट्टेबाजी के बजाय वास्तविक खरीदारों की मजबूत मांग के चलते इस कॉरिडोर में प्रॉपर्टी के दाम लगभग दोगुने हो गए.

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इंफ्रास्ट्रक्चर से बढ़ती है लिक्विडिटी

इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का सीधा असर रीसेल की संभावनाओं पर पड़ता है, मेट्रो नेटवर्क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, रोजगार के केंद्र, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े क्षेत्रों में आमतौर पर ज्यादा खरीदार आते हैं, जिससे सौदे तेजी से होते हैं. द्वारका एक्सप्रेसवे, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के उभरते बाजारों को बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा मिला है, जिससे खरीदारों और निवेशकों दोनों की रुचि बढ़ी है.

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किराए की मांग से मिलते हैं अहम संकेत

किराए की मजबूत मांग भी भविष्य की लिक्विडिटी का संकेत दे सकती है, जिन आवासीय सोसायटियों में किराए का बाजार सक्रिय होता है, वहां रीसेल भी तेज होती है क्योंकि खरीदार उन्हें बसे हुए और जीवंत इलाके के रूप में देखते हैं. यही ट्रेंड कमर्शियल रियल एस्टेट में भी दिखता है. 20.4 करोड़ वर्ग फीट से अधिक ऑफिस स्पेस के साथ एनसीआर भारत का दूसरा सबसे बड़ा ऑफिस मार्केट बना हुआ है. मुख्य बिजनेस सेंटर्स में मांग की तुलना में सप्लाई कम रहने के कारण 2025 में कुल लीजिंग में ग्रेड-ए ऑफिस बिल्डिंग्स की हिस्सेदारी लगभग 84% रही, जबकि औसत किराए में करीब 10% की बढ़ोतरी हुई.

एग्जिट स्ट्रैटेजी क्यों जरूरी है?

वित्तीय आपातकाल के दौरान लिक्विडिटी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, चाहे बिजनेस बढ़ाने के लिए हो, पारिवारिक जरूरतों के लिए या पोर्टफोलियो री-एलोकेशन के लिए. अत्यधिक सप्लाई वाले बाजारों में मौजूद संपत्तियों को बेचने के लिए अक्सर कीमतें घटानी पड़ती हैं और लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे वास्तविक रिटर्न कम हो जाता है.

इसीलिए अनुभवी निवेशक संभावित रिटर्न के साथ-साथ 'बाहर निकलने के रास्ते' का भी आंकलन करते हैं. एक सफल निवेश रणनीति न केवल यह देखती है कि किसी संपत्ति में कैसे प्रवेश करना है, बल्कि यह भी तय करती है कि उससे आसानी से बाहर कैसे निकला जाए.

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जैसा कि गौरव मावी कहते हैं- “प्रॉपर्टी का मालिक होना संतुष्टि देता है, लेकिन एक लिक्विड प्रॉपर्टी का मालिक होना वित्तीय आजादी देता है.” उन्होंने कहा कि सबसे मजबूत रियल एस्टेट पोर्टफोलियो केवल मूल्य वृद्धि के बजाय सतत मांग, रेंटल क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और दीर्घकालिक बिक्री-योग्यता वाली संपत्तियों के दम पर बनते हैं. निवेशकों के लिए, लिक्विडिटी शायद रियल एस्टेट निवेश का सबसे चर्चित पहलू न हो, लेकिन अंततः यही सबसे ज्यादा मायने रखता है.

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