अहमदाबाद तेजी से बढ़ते फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस मार्केट के रूप में उभर रहा है. 2026 की पहली छमाही (H1) में यहां फ्लेक्स सीट लीजिंग में सालाना आधार पर 570.3% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई. अहमदाबाद के साथ कोलकाता और दूसरे शहरों में भी मजबूत वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत में फ्लेक्स वर्कस्पेस का विस्तार अब सिर्फ पारंपरिक बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है.
Cushman & Wakefield के आंकड़ों के मुताबिक, अहमदाबाद में H1 2026 के दौरान 4,927 फ्लेक्स सीटें लीज पर दी गईं, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 735 सीटों का था. हालांकि सीटों की कुल संख्या अभी भी बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई जैसे बड़े बाजारों की तुलना में काफी कम है, लेकिन इतनी तेज वृद्धि यह दिखाती है कि अलग-अलग शहरों में कंपनियों के बीच फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ रही है.
छोटे शहर भी फ्लेक्स वर्कस्पेस की दौड़ में
कोलकाता में भी फ्लेक्स सीट लीजिंग में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली. H1 2026 में यहां 3,454 सीटें लीज हुईं, जो पिछले साल की समान अवधि में 2,334 सीटों से 48% ज्यादा हैं. वहीं पुणे में फ्लेक्स सीटों की मांग 27.8% बढ़कर 20,900 सीटों पर पहुंच गई। चेन्नई में भी 3.6% की मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई और यहां कुल 16,297 सीटें लीज की गईं.
यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है जब भारत के फ्लेक्स वर्कस्पेस मार्केट ने 2026 की पहली छमाही में अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है. देश के शीर्ष आठ शहरों में फ्लेक्स ऑपरेटरों ने H1 2026 में कुल 1,91,306 सीटें लीज कीं, जो H1 2025 की 1,13,623 सीटों के मुकाबले 68.4% अधिक है.
फ्लेक्स ऑपरेटरों ने इस दौरान 84 लाख वर्ग फुट (MSF) का ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम (GLV) भी दर्ज किया, जो एक साल पहले के 54 लाख वर्ग फुट की तुलना में 55% ज्यादा है. कुल ऑफिस लीजिंग में फ्लेक्स वर्कस्पेस की हिस्सेदारी भी बढ़कर करीब 20% हो गई, जबकि H1 2025 में यह 13% थी. ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनियां ऐसे ऑफिस सॉल्यूशन को तेजी से अपना रही हैं, जिन्हें अलग-अलग शहरों और बाजारों में जरूरत के हिसाब से जल्दी बढ़ाया या घटाया जा सकता है.
हैदराबाद और NCR में भी बड़ा बदलाव
फ्लेक्स वर्कस्पेस का विस्तार सिर्फ छोटे शहरों तक सीमित नहीं है. बड़े शहरों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. हैदराबाद में फ्लेक्स सीट लीजिंग 170.8% बढ़कर 40,451 सीटों पर पहुंच गई. दिल्ली-NCR में 152.7% की बढ़ोतरी के साथ 21,970 सीटें लीज हुईं, जबकि मुंबई में फ्लेक्स सीट लीजिंग 130% बढ़कर 25,820 सीटों पर पहुंच गई.
बेंगलुरु अब भी देश का सबसे बड़ा फ्लेक्स वर्कस्पेस बाजार बना हुआ है. कुल सीट लीजिंग में इसकी हिस्सेदारी करीब 30% रही और H1 2026 में यहां 57,487 सीटें लीज हुईं. हालांकि इसकी सालाना वृद्धि दर 31.8% रही, जो कई दूसरे बाजारों की तुलना में काफी कम है.
GCC बढ़ा रहे हैं फ्लेक्स ऑफिस की मांग
इस विस्तार में Global Capability Centres (GCCs) की भी बड़ी भूमिका है. H1 2026 में लीज हुई कुल फ्लेक्स सीटों में GCCs की हिस्सेदारी 44% रही, जबकि पूरे 2025 में यह 37% थी. Cushman & Wakefield की एग्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर, बेंगलुरु और हेड-फ्लेक्स, इंडिया रमिता अरोड़ा ने कहा कि फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस अब कॉरपोरेट रियल एस्टेट रणनीतियों का अहम हिस्सा बन चुका है. उन्होंने कहा कि कंपनियां ज्यादा लचीलापन और बेहतर दक्षता चाहती हैं, इसलिए फ्लेक्स और मैनेज्ड ऑफिस सॉल्यूशन लंबे समय की वर्कप्लेस प्लानिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहे हैं.
अरोड़ा के मुताबिक, कंपनियां अब ऐसे कस्टमाइज्ड और बेहतर अनुभव देने वाले वर्कप्लेस चाहती हैं, जो ग्लोबल ऑफिस स्टैंडर्ड, कंपनी की ब्रांड पहचान और वर्कप्लेस कल्चर के अनुरूप हों। फ्लेक्स ऑपरेटर इन जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसे ऑफिस स्पेस उपलब्ध करा रहे हैं.
अहमदाबाद और कोलकाता में आई यह तेज वृद्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के ऑफिस मार्केट में हो रहे एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है.
aajtak.in