त्योहारों के सीजन से पहले देश के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए उत्साहजनक संकेत सामने आए हैं. कॉलिएर्स की रिपोर्ट Homebuying Sentiment Survey 2026: Decoding India's Evolving Buyer Preferences के मुताबिक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ती लागत के बावजूद भारतीय खरीदारों का घर खरीदने का इरादा मजबूत बना हुआ है. सर्वे में शामिल करीब 50 फीसदी लोगों ने कहा कि वो अगले दो साल के भीतर नया घर खरीदना चाहते हैं.
ये सर्वे देश के 30 से ज्यादा स्थापित और उभरते रेजिडेंशियल मार्केट्स में करीब 1800 लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है. रिपोर्ट में खरीदारों की बदलती प्राथमिकताओं और घर खरीदने के फैसले को प्रभावित करने वाली प्रमुख वजहों का विश्लेषण किया गया है.
ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद भरोसा बरकरार!
दुनियाभर में भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. इसके बावजूद भारतीय खरीदार रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं. सर्वे में 54 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना है कि इन बाहरी चुनौतियों का भारतीय रियल एस्टेट बाजार पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ेगा.
50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक के घरों की मांग!
रिपोर्ट बताती है कि खरीदार अब कीमत और वैल्यू को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं. 46 फीसदी खरीदार 50 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये के बीच की प्रॉपर्टी पसंद कर रहे हैं. मुंबई, दिल्ली NCR, बेंगलुरु और हैदराबाद में ऊंचे बजट वाले घरों की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है. दिल्ली NCR, बेंगलुरु और हैदराबाद में बड़े और ज्यादा स्पेस वाले घरों को प्राथमिकता मिल रही है, जबकि मुंबई में कॉम्पैक्ट और राइट-साइज्ड यूनिट्स की मांग ज्यादा है.
2-3 BHK फ्लैट्स सबसे पसंदीदा
सर्वे के मुताबिक 62 फीसदी संभावित खरीदार 2 और 3 BHK अपार्टमेंट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. घर खरीदने के दौरान अफोर्डेबिलिटी के अलावा यूनिट का साइज, लेआउट, कनेक्टिविटी और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर भी अहम भूमिका निभा रहे हैं. करीब 75-80 फीसदी खरीदारों ने यूनिट साइज, लेआउट, कनेक्टिविटी और आसपास की सुविधाओं को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया. गेटेड सोसाइटी में सुरक्षा और सेफ्टी सिस्टम सबसे अहम सुविधा के रूप में उभरे. इसके बाद ग्रीन स्पेस, ओपन एरिया और कम्युनिटी सुविधाओं को प्राथमिकता मिली. 30 साल से कम उम्र के खरीदारों में फिटनेस और वेलनेस सुविधाओं को लेकर रुचि औसत खरीदारों की तुलना में काफी ज्यादा देखी गई.
रेडी-टू-मूव घरों की बढ़ रही मांग
रिपोर्ट के अनुसार 60 फीसदी से अधिक खरीदार अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के बजाय रेडी-टू-मूव या जल्द पूरे होने वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे साफ है कि खरीदार अब समय पर पजेशन और कम प्रोजेक्ट रिस्क वाले विकल्पों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. हालांकि युवा खरीदारों का नजरिया कुछ अलग है. 30 साल से कम उम्र के करीब 50 फीसदी खरीदार शुरुआती चरण के प्रोजेक्ट्स में निवेश का जोखिम उठाने को तैयार हैं. 30 साल से अधिक उम्र के केवल 36 फीसदी खरीदार ही इस तरह का जोखिम लेने के इच्छुक हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रियल एस्टेट बाजार में एंड-यूजर डिमांड का दबदबा बना हुआ है. सर्वे में 51 फीसदी लोगों ने कहा कि वे खुद रहने के लिए घर खरीदना चाहते हैं. वहीं 16 फीसदी उत्तरदाताओं ने सेकेंड होम या वेकेशन होम खरीदने की इच्छा जताई. यह संकेत देता है कि अब खरीदार केवल प्राथमिक आवास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लाइफस्टाइल और अवकाश से जुड़ी जरूरतों के लिए भी प्रॉपर्टी में निवेश कर रहे हैं.
अफोर्डेबिलिटी सबसे बड़ी चिंता
घर खरीदने की इच्छा मजबूत होने के बावजूद बजट और कीमतें अब भी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई हैं. करीब 31 फीसदी लोगों ने अफोर्डेबिलिटी और प्रॉपर्टी की कीमतों को अपनी प्रमुख चिंता बताया. इसके अलावा जॉब सिक्योरिटी और भविष्य की आय को लेकर भी खरीदार सतर्क नजर आए.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
कॉलिएर्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, रेजिडेंशियल ट्रांजेक्शन सर्विसेज रवि शंकर सिंह का कहना है कि भारतीय हाउसिंग मार्केट अभी भी मुख्य रूप से एंड-यूजर डिमांड पर आधारित है. हालांकि खरीदार अब कीमत, वैल्यू और जोखिम को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं. ऐसे में आने वाले समय में बिक्री इस बात पर निर्भर करेगी कि डेवलपर्स सही कीमत, बेहतर प्रोडक्ट और लचीले फाइनेंसिंग विकल्प कितनी प्रभावी तरीके से उपलब्ध करा पाते हैं. वहीं कॉलिएर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और हेड ऑफ रिसर्च विमल नादर का मानना है कि फेस्टिव सीजन के दौरान हाउसिंग डिमांड मजबूत बनी रह सकती है. लेकिन डेवलपर्स को खरीदारों की बदलती जरूरतों, बजट और पसंद के अनुरूप अपने प्रोजेक्ट्स तैयार करने होंगे.
आदित्य के. राणा