IT Firms ADR Fall: सबकुछ बर्बाद, 16.50 लाख करोड़ की कंपनी का 9 लाख करोड़ स्वाहा

IT Stocks में लंबे समय से जारी गिरावट के बाद गुरुवार को भले तेजी लौटी हो, लेकिन अमेरिकी आईटी सेक्टर में ग्रोथ की चिंताओं को लेकर विप्रो, इंफोसिस के एडीआर में भारी गिरावट का असर हाल-फिलहाल कम होता नजर नहीं आ रहा है.

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अमेरिकी आईटी सेक्टर में ग्रोथ को लेकर चिंता से भारतीय कंपनियों पर असर. (Photo: Reuters) अमेरिकी आईटी सेक्टर में ग्रोथ को लेकर चिंता से भारतीय कंपनियों पर असर. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:56 PM IST

गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान तेजी देखने को मिली. बीएसई का सेंसेक्स 579 अंक की उछाल के साथ बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी ने 169 अंक चढ़कर क्लोज हुआ. यह तेजी इसलिए भी खास रही, क्‍योंकि काफी दिनों के बाद आईटी शेयरों में फिर से तेजी आई और कई दिनों की गिरावट के बाद विप्रो से लेकर Infosys-TCS तक के शेयर तेज उछाल के साथ बंद हुए. 

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भले ही IT शेयरों में रौनक लौटी हो, लेकिन बीते लंबे समय से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए ये नाकाफी है. गौर करें, तो करीब पांच सालों में इन दिग्गज आईटी कंपनियों ने शून्य या निगेटिव रिटर्न ही दिया है. आईटी कंपनियों की बदहाली का अंदाजा इस उदाहरण से लगाया जा सकता है कि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा ग्रुप की टीसीएस का मार्केट कैपिटल महज सालभर से भी कम समय में 16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा से गिरकर 7 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया है. 

अमेरिका से जुड़ा बदहाली का कनेक्शन
आईटी कंपनियों में बीते कुछ समय में आई तेज गिरावट और नुकसान की सीधा कनेक्शन अमेरिका से जुड़ा हुआ है. अमेरिकी आईटी सेक्टर में तगड़ी बिकवाली और भारतीय दिग्गज आईटी कंपनियों की इनकम को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों को हैरान किया है. खासकर AI के आने के बाद आईटी कंपनियों के बिजनेस पर दबाव बना है.

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बीते दिनों अमेरिकी आईटी कंपनी Accenture ने जून तिमाही के नतीजों के बाद कमजोर ग्रोथ और रेवेन्यू का अनुमान जाहिर किया और कहा कि बड़े क्लाइंट्स अब खर्च को लेकर सतर्क हैं. 

इसके बाद तो आईटी सर्विसेज मुहैया कराने वाली भारतीय कंपनियों के शेयरों में कोहराम सा मच गया. इसकी वजह ये है कि इनका बड़ा अमेरिका और यूरोप पर निर्भर है. अगर अमेरिकी कंपनियां आईटी पर खर्च कम करती हैं, तो इन भारतीय कंपनियों के कारोबार और मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है. 

विप्रो-इंफोसिस का सबसे बुरा हाल 
अमेरिकी आईटी कंपनियों के सतर्क आउटलुक को लेकर भारतीय कंपनियों विप्रो और इंफोसिस के ADR में तेज गिरावट देखने को मिली है. इसकी वजह ये है कि इनका काफी हद तक कारोबार अमेरिकी ग्राहकों पर निर्भर है. बीते कारोबारी दिन बुधवार को Wipro ADR 14% से ज्यादा टूट गया. कंपनी की आय का भी करीब 55–60% हिस्सा अमेरिका से ही आता है. अमेरिकी आईटी खर्च को लेकर बढ़ती चिंता ने इंफोसिस पर भी असर डाला, Infosys ADR 7-8 फीसदी टूटा है, जिसका उत्तरी अमेरिका में प्रमुख कारोबार है और रेवेन्यू का 60 फीसदी अमेरिका से जुड़ा हुआ है. 

अगर विप्रो के शेयर की बात करें, तो Wipro Share गुरुवार को 2.27 फीसदी चढ़कर 174 रुपये पर क्लोज हुआ. लेकिन इससे पहले महीनेभर में ये 17 फीसदी फिसला. Infosys Share 5.82% की तेजी के साथ 1042 रुपये पर बंद हुआ, जबकि महीनेभर में 18 फीसदी फिसला. 

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TCS के शेयरों पर भी पड़ा असर 
TCS Share 4.45% चढ़कर बंद हुआ, बीते एक महीने में ये 16 फीसदी फिसला. इसके अलावा भी आईटी कंपनियों के शेयरों में बीते कुछ दिनों में भूचाल सा आया है. टीसीएस का लंबे समय से बुरा हाल है और बीते अगस्त 2024 के 16.47 लाख करोड़ रुपये की तुलना में इसका मार्केट कैप अब गिरकर 7.48 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है. हालांकि, इसका एडीआर अमेरिका में लिस्ट नहीं है, लेकिन आईटी सेक्टर में मंदी और धीमी ग्रोथ से ये भी लगातार प्रभावित हुई है.

ADRs क्या होते हैं? 
अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट या एडीआर एक फाइनेंशियल तरीका होता है, जिसके जरिए अमेरिकी निवेशक किसी विदेशी कंपनी के शेयरों में सीधे उस देश के शेयर मार्केट में निवेश किए बिना अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंजों के जरिए इन्वेस्ट करते हैं. दरअसल, US Stock Markets में विदेशी कंपनियों के शेयरों की खरीद-फरोख्त को आसान बनाने के लिए अमेरिकी बैंकों द्वारा ADR जारी किए जाते हैं. इनकी खरीद-बिक्री न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) या Nasdaq एक्सचेंज पर डॉलर में होती है.

(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने‍ वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

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