US Vs Iran: अमेरिका-ईरान फिर आमने-सामने, हमलों से कच्चे तेल की कीमतों में उबाल

Crude Oil Price Surge: अमेरिका और ईरान में हमलों से मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है और इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा है. ब्रेंट क्रूड का दाम फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है.

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अचानक फिर 90 डॉलर के पार निकला ब्रेंट क्रूड का दाम. (Photo: Reuters) अचानक फिर 90 डॉलर के पार निकला ब्रेंट क्रूड का दाम. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:16 AM IST

मिडिल ईस्ट में टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है, एक बार फिर अमेरिका और ईरान आमने-सामने आ गए है और हमलों का सिलसिला भी शुरू हो गया है. दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20% को पूरा करने में अहम रोल निभाने वाले होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में जहां ईरानी द्वीप पर अमेरिका ने हमले किए, तो ईरान की ओर से भी जवाबी पलटवार किया गया. इस तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है और इनमें अचानक तेल उछाल आ गया है. 

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फिर 90 डॉलर के पार क्रूड 
अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3 फीसदी की उछाल के साथ एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई. तो डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी जोरदार तेजी देखने को मिली है. Brent Crude Price 90.15 डॉलर, WTI Crude Oil Price 85.20 डॉलर और Murban Crude Price 4 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 95,75 पर ट्रेड कर रहा था.  

आखिर कब तक चलेगा युद्ध? 
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, US-Iran के बीच टकराव की खबरें आने के बाद अचानक से कच्चे तेल की कीमतों में उबाल आना शुरू हुआ और ये तेज होता गया. अमेरिका ने Strait of Hormuz में ईरान के एक द्वीप पर हमले किए, जबकि उसके जवाब में तेहरान ने भी कार्रवाई की है. IG मार्केट एनालिस्ट टोनी सिकामोर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'ऐसा लगता है कि हम तनाव बढ़ने के एक और दौर में हैं. यह कब तक चलेगा, यह बताना मुश्किल है, इसमें कुछ दिन या कुछ हफ्ते लग सकते हैं.' 

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तेल महंगा होने से दुनिया सहमी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और युद्ध अब छठे महीने में प्रवेश कर चुका है और जब दोनों ओर टेंशन चरम पर थी, तो कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल का असर दुनिया के तमाम देशों में देखने को मिला था. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते बीते अप्रैल महीने में Brent Crude Price 120 डॉलर के करीब पहुंच गया था और पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन से लेकर भारत तक में इसका असर पेट्रोल, डीजल (Petrol-Diesel) से लेकर एलपीजी तक पर महंगाई (LPG Price Hike) की मार के रूप में दिखा था. अब एक बार फिर से वहीं डर गहराता हुआ नजर आ रहा है. 

क्रूड का आम आदमी से कनेक्शन?
भारत के लिहाज से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी के असर पर गौर करें, तो Crude Oil Price Hike के कई साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि क्रूड की कीमत में होने वाला 1 डॉलर प्रति बैरल का भी इजाफा, घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमत में 50-60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकता है. तेल महंगा होने से इसके आयात का खर्च बढ़ता है और आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च होते हैं.

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आयतित सामान महंगा होने से देश में जरूरी चीजों की कीमतों पर महंगाई की मार देखने को मिलती है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर क्रूड आयात करता है और ऐसे तमाम अन्य तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए इसका महंगा होना परेशानी का सबब बनता है.

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