अमेरिका ने 2 मुंबई बेस्ड कंपनियों और 5 लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत यह कार्रवाई की गई है. अमेरिकी वित्त विभाग और अमेरिकी विदेश विभाग ने अंतरराष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को टारगेट करते हुए बड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है. इस कार्रवाई में भारत बेस्ड व्यापारिक कंपनियों, सीमा शुल्क ब्रोकर और कॉर्पोरेट डॉरेक्टर को निशाना बनाया गया है.
इन कंपनियों पर ईरानी पेट्रोकेमिकल्स और पेट्रोलियम उत्पादों की तस्करी का आरोप है. इन आरोपों के तहत अमेरिका ने भारत की दो कंपनियों पर प्रतिबंध लागू कर दिया है. अमेरिका का आरोप है कि इन नेटवर्कों ने ईरान को लाखों डॉलर भेजे हैं, जिससे ईरानी शासन जंग जारी रखने के लिए बल मिला है.
भारत को टारगेट करने वाली कार्रवाई
अमेरिका की ओर से की गई ये कार्रवाई भारत को टारगेट करते हुए दिखाई दे रहा है. क्योंकि भारत स्थित कई संस्थाओं और उनके प्रमुख अधिकारियों को ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन में जानबूझकर शामिल होने के लिए टारगेट किया गया है.
एसएसपीएल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड
भारत स्थित एक पेट्रोकेमिकल ट्रेडिंग कंपनी जिसने फरवरी 2025 और जुलाई 2025 के बीच ईरान से 2 मिलियन डॉलर के पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात किया था. अब इसे लेकर एसएसपीएल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के डॉरेक्टर और भारतीय नागरिक ध्वनि निसर्ग वोरा और निसर्ग समीर वोरा को कार्यकारी आदेश 13846 के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है.
समुद्रा मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड
भारत स्थित एक सीमा शुल्क ब्रोकर कंपनी जिसने ईरान से आए पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेपों के भारत में आयात को सुगम बनाया है. कार्रवाई के तहत केतन मनोहर कोचीकर, भूपेंद्रसिंह धलसिंह साहू और हरिश्याम हरिहरन चुंडाकट्टिल - सभी भारतीय नागरिक और समुद्र मरीन सर्विसेज के डायरेक्टर को स्पष्ट रूप से रोक दिया गया है.
ईरान के गुप्त सैन्य बेड़े पर व्यापक कार्रवाई
भारत पर फोकस ये कार्रवाई दोहरी एजेंसी अभियान का हिस्सा है, जिसमें तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और चीन भी शामिल हैं. इसके साथ ही इसमें दर्जनों अंतरराष्ट्रीय फ्रंट कंपनियों, पोत प्रबंधन प्रदाताओं और छाया बेड़े के टैंकरों को शामिल किया गया है, ताकि ईरान की बाकी फाइनेंशियल लाइफलाइन को रोका जा सके.
अमेरिकी सरकार ने चेतावनी दी है कि ईरानी शासन की ओर से व्यापार, रसद या प्रतिबंधों से बचने में सहायता जारी रखने वाली किसी भी संस्था या वित्तीय संस्थान को गंभीर दंड का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें द्वितीयक प्रतिबंध भी शामिल हैं जो उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अलग कर देंगे.
आजतक बिजनेस डेस्क