महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने अपने एक बड़े फैसले में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी और टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह की शिकायत को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने इसी साल 10 जून को एक ई-मेल के जरिए ट्रस्ट पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी.
शिकायत में विजय सिंह ने करीब 37 साल पहले वर्ष 1989 में नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से मौजूदा चेयरमैन नोएल टाटा के पिता नवल एच. टाटा को टाटा संस के 833 शेयर हस्तांतरित किए जाने पर सवाल उठाए थे. उन्होंने इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की थी.
इस शिकायत पर चैरिटी कमिश्नर अमोघ कलोटी ने विस्तृत जांच के बाद मामला बंद करते हुए कहा कि 1989 में हुआ वह शेयर ट्रांसफर तत्कालीन वैधानिक और टैक्स नियमों के तहत पूरी तरह कानूनी और सही था.
इसके लिए उचित मूल्य का भुगतान किया गया था. शेयर ट्रांसफर की प्रक्रिया के सारे दस्तावेज भी सही पाए गए. अब इससे आगे किसी भी तरह की जांच जरूरी नहीं है.
आदेश में शेयर लेन-देन की स्वतंत्र जांच की मांग को बंद करने के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने के तरीके को लेकर भी कमिश्नर ने टिप्पणियां की. अपने फैसले में चैरिटी कमिश्नर ने विजय सिंह के रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ट्रस्टी के लिए अशोभनीय आदरण बताया.
आदेश में कहा गया कि विजय सिंह ने 8 जून को हुई बोर्ड बैठक में हिस्सा लिया था. वहां चैरिटी कमिश्नर के सामने ट्रस्ट का पक्ष रखने का प्रस्ताव पास हुआ था. लेकिन इसके ठीक दो दिन बाद 10 जून को उन्होंने बाकी ट्रस्टियों को अंधेरे में रखकर खुद ही स्वतंत्र जांच की शिकायत दर्ज करा दी.
इस निर्णय पर टाटा ट्रस्ट ने कहा कि वे पूरी तरह सही साबित हुए हैं. उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे, बेबुनियाद और दुर्भावना से प्रेरित थे. आदेश में यह भी कहा गया कि विजय सिंह के कदमों का संस्थान की प्रतिष्ठा और सद्भावना पर बुरा असर पड़ा. उनके ऐसे आचरण को नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी के पद के अनुरूप नहीं बताया गया.
इस फैसले से टाटा संस के शेयर ट्रांसफर से जुड़ा यह पुराना विवाद अब पूरी तरह खत्म हो गया है. वर्तमान चेयरमैन नोएल टाटा के नेतृत्व को बड़ी कानूनी राहत भी मिली है.
आजतक ने इस निर्णय और चैरिटी कमिश्नर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया के लिए विजय सिंह से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट के तहत चैरिटी कमिश्नर ट्रस्ट के संचालन और ट्रस्टियों के आचरण से जुड़े मामलों की जांच कर सकता है.
कानून की धारा 41D कुछ निर्धारित परिस्थितियों में ट्रस्टी के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करती है. इनमें कर्तव्यों की लगातार उपेक्षा, ट्रस्ट के प्रति दायित्व का उल्लंघन तथा कुछ मामलों में कदाचार जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं.
कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निलंबन, हटाने या बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई का प्रावधान है. हालांकि, 2 सितंबर का यह आदेश अपने आप में धारा 41D के तहत कोई कार्रवाई शुरू किए जाने का आदेश नहीं है. लेकिन विजय सिंह के आचरण को लेकर की गई प्रतिकूल टिप्पणियां भविष्य में किसी नियामकीय जांच या ट्रस्टी की भूमिका से जुड़े विवाद में प्रासंगिक हो सकती हैं.
पूर्व केंद्रीय रक्षा सचिव रहे विजय सिंह ने अगस्त 2026 में सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दिया था. हालांकि, वह टाटा ट्रस्ट्स से जुड़ी अन्य संस्थाओं में अपनी भूमिकाएं जारी रखे हुए हैं.
उनका प्रशासनिक और सार्वजनिक क्षेत्र का लंबा अनुभव भी इस पूरे घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाता है. यह मामला एक पुराने शेयर हस्तांतरण की जांच की मांग से शुरू होकर अब ट्रस्टी के आचरण और संस्थागत प्रक्रिया के सवाल तक पहुंच गया.
संजय शर्मा